- बर्फ में फिसलकर कार डैमेज हो जाए तो अक्सर इसे एक्सीडेंट मानकर भरपाई की जाती है, पर इसकी कई शर्तें हैं
- कोहरे में होने वाले एक्सीडेंट कॉम्प्रिहेंसिव इंश्योरेंस में कवर्ड तो होते हैं, लेकिन इसमें एक बड़ा पेच होता है
- कॉम्प्रिहेंसिव बीमा में कई नुकसान कवर नहीं होते, इसलिए जीरो डेप और कंज्यूमेबल्स जैसे ऐड-ऑन जरूरी हैं
पहाड़ों पर बर्फबारी का नजारा जितना दिलकश होता है, ड्राइविंग के लिए उतना ही खतरनाक भी हो सकता है. हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में बर्फ की सफेद चादर बिछते ही सैलानियों का सैलाब उमड़ पड़ा, लेकिन इसके साथ ही हादसों की डराने वाली तस्वीरें भी आईं. मनाली से आया एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है, जिसमें एक कार बर्फ पर बेकाबू होकर खिलौने की तरह फिसलते हुए सीधे गहरी खाई में जा गिरती है. बर्फीली सड़क पर किसी कार के रपटते हुए दूसरी कारों को ठोकने के भी कई वीडियो सामने आए हैं.
सर्दियों के मौसम में खासकर उत्तर भारत और पहाड़ी इलाकों में ड्राइविंग करना जोखिम भरा होता है. बर्फबारी और कोहरे के कारण होने वाले सड़क हादसों में अक्सर लोग बीमा के भरोसे रहते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी कॉम्प्रिहेंसिव (Comprehensive) इंश्योरेंस पॉलिसी भी बर्फ पर आपकी कार को हुए हर नुकसान की भरपाई नहीं करती? ऐसे हर हादसे का क्लेम पास नहीं होता. क्लेम पास होता भी है तो स्टैंडर्ड कॉम्प्रिहेंसिव पॉलिसी में भी कई ऐसे ब्लाइंड स्पॉट्स होते हैं जो आपकी जेब खाली कर सकते हैं. ऐसे में ये सवाल उठता है कि पहाड़ों की बर्फ पर अगर आपकी गाड़ी हादसे का शिकार होती है तो इंश्योरेंस कंपनी कब पैसा देगी और कब आपकी क्लेम फाइल रिजेक्ट हो सकती है.
पहाड़ों में इस वक्त भारी बर्फबारी हो रही है. हिमाचल का मनाली भी बर्फ की सफेद चादर में लिपटा हुआ है. इस बीच एक ऐसा रोंगटे खड़े कर देने वाला वीडियो सामने आया है, जो यह साबित करता है कि पहाड़ों पर लापरवाही जानलेवा हो सकती है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस सीसीटीवी फुटेज में… pic.twitter.com/ctkUNZUti7
— NDTV India (@ndtvindia) January 24, 2026
कार इंश्योरेंस कितनी तरह के?
पहले वाहनों के इंश्योरेंस को समझिए. ये मोटे तौर पर तीन तरह के होते हैं.
1. थर्ड पार्टी इश्योरेंस- यह कानूनी रूप से लेना जरूरी होता है. अगर आपकी कार से किसी दूसरे व्यक्ति, उसकी गाड़ी या संपत्ति को नुकसान होता है तो यह इंश्योरेंस एक हद तक उसकी भरपाई करता है. लेकिन इसमें आपकी अपनी गाड़ी को हुए नुकसान के लिए कोई क्लेम नहीं मिलता.
2. कॉम्प्रिहेंसिव इंश्योरेंसः इसमें थर्ड पार्टी इंश्योरेंस के साथ-साथ आपकी कार को होने वाला नुकसान भी काफी हद तक कवर होता है. एक्सीडेंट, चोरी, आग, भूकंप या बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं में गाड़ी को संभावित नुकसान पर भी सुरक्षा मिलती है.
3. स्टैंडअलोन Own Damage Insurance - यह उनके लिए है जिनके पास पहले से थर्ड पार्टी इंश्योरेंस है लेकिन वो अपनी गाड़ी के लिए अलग से सुरक्षा चाहते हैं. यह आपकी कार को दुर्घटना, चोरी या आपदा से होने वाले नुकसान की भरपाई करता है.
#DekhRahaHaiIndia | हिमाचल में बर्फबारी से हाहाकार: 1250 से ज़्यादा सड़कें बंद, लोग 24 घंटे तक जाम में फंसे#HimachalPradesh | @malhotra_malika
— NDTV India (@ndtvindia) January 27, 2026
देखें LIVE: https://t.co/VeTAtQYmAA pic.twitter.com/qeKMGvGSX4
ऐड-ऑन (Add-ons) का खेल
कॉम्प्रिहेंसिव इंश्योरेंस भी अपने आप में संपूर्ण नहीं होता. उसमें भी बहुत सी ऐसी चीजें होती हैं, जो कवर नहीं होतीं. इसके लिए कंपनियां ऐ़़ड-ऑन प्रोवाइड करती हैं. इनके लिए अलग से पैसा देना होता है. प्रमुख ऐड-ऑन इस प्रकार हैं-
जीरो डेप्रिसिएशन (Zero Dep): कार जैसे-जैसे पुरानी होती जाती है, उसके प्लास्टिक, रबर और धातु के पार्ट्स की घिसाई (डेप्रिसिएशन) को काटकर कंपनियां क्लेम देती हैं. अगर ये कवर न हो तो कभी-कभी 50 पर्सेंट तक क्लेम ही मिल पाता है. जीरो डेप होने पर कंपनी पार्ट्स की पूरी कीमत चुकाती है.
कंज्यूमेबल्स कवर - कार की मरम्मत के दौरान कई छोटी चीजें बदलनी पड़ती हैं जैसे इंजन ऑयल, कूलेंट, ब्रेक ऑयल, नट बोल्ट और ग्रीस वगैरा. नॉर्मल कॉम्प्रिहेंसिव बीमा में इन चीजों का पैसा नहीं मिलता. कंज्यूमेबल्स कवर लेने पर इन छोटी लेकिन बार-बार होने वाले खर्च का भुगतान भी कंपनी करती है.
इंजन प्रोटेक्शन - स्टैंडर्ड पॉलिसी में इंजन के अंदरूनी हिस्सों का नुकसान तभी कवर होता है, जब वह एक्सीडेंट से हुआ हो. लेकिन अगर भारी बारिश में पानी भरने या ऑयल लीकेज वगैरा से इंजन खराब होता है तो साधारण बीमा उसे कवर नहीं करता. इसके लिए इंजन प्रोटेक्शन अलग से लेना होता है.
रोडसाइड असिस्टेंस - अगर आपकी कार बीच रास्ते में खराब हो जाती है, टायर पंचर हो जाता है, चाबी अंदर छूट जाती है या पेट्रोल खत्म हो जाता है तो कई कंपनियां बस एक कॉल पर आपको मैकेनिक या गाड़ी खींचकर वर्कशॉप तक ले जाने की सुविधा देती है.
बर्फ में गाड़ी फिसलकर डैमेज हो तो क्या पूरा क्लेम मिलेगा?
अगर बर्फ में फिसलकर कार डैमेज होती है तो अक्सर इसे एक्सीडेंट मानकर इसकी भरपाई की जाती है, बशर्ते आपने जीरो डेप और कंज्यूमेबल्स ऐड-ऑन लिए हों, लेकिन इसकी भी कई शर्तें हो सकती हैं. एक्सपर्ट्स बताते हैं कि अधिकतर इंश्योरेंस अचानक और एक्सीडेंटल नुकसान की भरपाई करती हैं, 'धीरे-धीरे' या मौसम की वजह से खराब होने वाली चीजों का क्लेम अक्सर पास नहीं होता.
कोहरे में हुए हादसों में क्या बीमा कंपनियां पूरा पैसा देती हैं?
कोहरे में होने वाले एक्सीडेंट कॉम्प्रिहेंसिव इंश्योरेंस में कवर्ड तो होते हैं, लेकिन यहां एक पेच है. ऐसे हादसों में अक्सर हेडलाइट, बंपर और प्लास्टिक के पार्ट्स को नुकसान होता है. अगर आपने जीरो डेप ऐड-ऑन नहीं लिया होगा तो कंपनी डेप्रिसिएशन काटकर पेमेंट करेगी.
ठंड में इंजन स्टार्ट न होने या इंजन सीज होने पर क्या क्लेम मिलती है?
सर्दियों में ऑयल गाढ़ा हो जाता है. जबरन गाड़ी स्टार्ट करने की कोशिश हो तो कई बार इंजन सीज हो जाता है. ऐसे में कोल्ड स्टार्ट के कारण इंजन में आई तकनीकी खराबी को बीमा कवर नहीं करता. कंपनियां इसे खराब मेंटेनेंस का नतीजा मानती हैं. इंजन से जुड़े क्लेम तभी मिलते हैं जब आपने 'इंजन प्रोटेक्शन' जैसा ऐड-ऑन लिया हो और कार की सर्विस समय पर कराई हो.
क्या सर्दियों में कार की बैटरी खराब होने पर इंश्योरेंस क्लेम मिलेगा?
आमतौर पर नहीं. बहुत ज्यादा ठंड में कार की बैटरियों पर असर पड़ता है. कंपनियां ठंड की वजह से बैटरी के डिस्चार्ज होने या खराब होने को 'सामान्य घिसाई' (Wear and Tear) मानती हैं. ऐसे में वह बैटरी रिप्लेसमेंट का पैसा तभी देती हैं जब वह एक्सीडेंट में क्षतिग्रस्त हुई हो.
क्या सर्दी में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की बैटरी के लिए क्लेम मिल सकता है?
अत्यधिक ठंड के कारण EV की ड्राइविंग रेंज कम होना या चार्जिंग में ज्यादा समय लगना नेचुरल है. इसे तकनीकी खराबी या दुर्घटना नहीं माना जाता. इंश्योरेंस केवल तभी काम आता है, जब बैटरी में कोई शॉर्ट सर्किट हो या फिर वह किसी एक्सीडेंट में डैमेज हो जाए.
इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट होने से बचना है तो सबसे पहले आपको अपनी गाड़ी का सर्विस रिकॉर्ड अपडेट रखना होगा. अगर कंपनी को लगता है कि गाड़ी को नुकसान किसी लापरवाही या खराब मेंटिनेंस की वजह से हुआ है तो वह क्लेम रिजेक्ट कर सकती है. इसके अलावा कंज्यूमेबल्स और इंजन प्रोटेक्शन जैसे ऐड-ऑन लेना समझदारी भरा फैसला साबित हो सकता है.
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