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थरूर कांग्रेस से जा रहे दूर? लगातार दूसरी अहम बैठक में नहीं आए,केरल और दिल्ली के समीकरण समझिए

कांग्रेस वर्किंग कमिटी के सदस्य थरूर पार्टी की अहम बैठकों से दूरी के साथ–साथ गाहे बगाहे पीएम मोदी की तारीफ़ करते तो कभी अपनी पार्टी की लाइन से अलग रूख अपनाते नजर आते हैं.

थरूर कांग्रेस से जा रहे दूर? लगातार दूसरी अहम बैठक में नहीं आए,केरल और दिल्ली के समीकरण समझिए
शशि थरूर कांग्रेस की बैठक में फिर नहीं पहुंचे
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  • शशि थरूर ने निजी व्यस्तताओं के कारण कांग्रेस की महत्वपूर्ण बैठकों में शामिल नहीं होने का निर्णय लिया है
  • थरूर केरल विधानसभा चुनाव में अहम भूमिका निभाना चाहते हैं और उनकी नजर मुख्यमंत्री पद पर बताई जा रही है
  • कांग्रेस पार्टी थरूर के अलग रुख और पीएम मोदी की तारीफ करने पर असहज है, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं करती
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नई दिल्ली:

केरल से कांग्रेस सांसद शशि थरूर एक बार फिर पार्टी की अहम बैठक में शामिल नहीं हुए. संसद के बजट सत्र की रणनीति बनाने को लेकर मंगलवार शाम सोनिया गांधी की अध्यक्षता में कांग्रेस संसदीय दल की स्ट्रेटजी ग्रुप की बैठक हुई जिसमें थरूर अपनी निजी व्यस्तताओं के कारण हाजिर नहीं हो पाए.थरूर के करीबी सूत्रों के मुताबिक़ दुबई से उनकी वापसी मंगलवार रात होगी. अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम की जानकारी उन्होंने पार्टी नेतृत्व को दे दी थी. इससे पहले बीते शुक्रवार को केरल विधानसभा चुनाव को लेकर दिल्ली में हुई कांग्रेस की शीर्ष बैठक में भी थरूर नहीं पहुंचे थे. तब उनके दफ़्तर द्वारा बताया गया था कि वो कोझिकोड में केरल लिट्रेचर फेस्टिवल में व्यस्त हैं. सवाल उठाना लाज़िमी है कि आख़िर थरूर पार्टी की महत्वपूर्ण बैठकों से ज़्यादा अहमियत निजी कार्यक्रमों को क्यों दे रहे हैं? 

राहुल ने भी नहीं किया था थरूर का जिक्र

कुछ दिनों पहले ही जनवरी के तीसरे हफ़्ते में अपने केरल दौरे के समय राहुल गांधी ने भाषण में थरूर को छोड़ बाक़ी सभी नेताओं का जिक्र किया. माना जा रहा है कि मंच पर मौजूद थरूर इस बात से आहत हुए. पहले से उनकी शिकायत है कि केरल प्रदेश कांग्रेस में उन्हें अहमियत नहीं मिलती. कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक़ थरूर केरल विधानसभा चुनाव में अहम भूमिका निभाना चाहते हैं. जानकारों का मानना है कि थरूर की नजर सीएम की कुर्सी पर है. 

कांग्रेस वर्किंग कमिटी के सदस्य थरूर पार्टी की अहम बैठकों से दूरी के साथ–साथ गाहे बगाहे पीएम मोदी की तारीफ़ करते तो कभी अपनी पार्टी की लाइन से अलग रूख अपनाते नजर आते हैं. इन सब से कांग्रेस पार्टी असहज होती है लेकिन फिर भी थरूर पर कोई कार्रवाई करने से बचती है. कांग्रेस सूत्रों का मानना है थरूर के रूख से पार्टी की थोड़ी बहुत किरकिरी तो होती है लेकिन उनपर कोई कार्रवाई करने से ग़लत संदेश जाएगा.

क्या मानती है कांग्रेस पार्टी? 

पार्टी मानती है कि थरूर विचारधारा के स्तर पर बीजेपी या वाम दलों की तरफ़ नहीं जा सकते. वो महज़ पार्टी पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं. थरूर का बचाव करते हुए एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने एनडीटीवी से कहा कि वो आम राजनेता से ज्यादा पहले बुद्धिजीवी हैं. ऐसे में लेखक–वक्ता के तौर पर उनकी व्यस्तता स्वाभाविक है. हालाँकि इस बात का जवाब किसी के पास नहीं है कि पीएम मोदी को लेकर बीते कुछ समय से थरूर नरमी क्यों दिखा रहे हैं! 

तिरुवनंतपुरम से चार बार के सांसद थरूर की केरल के अलावा देश भर के उच्च मध्यम वर्ग के बीच सकारात्मक छवि है. वो केरल के प्रभावशाली नायर समुदाय से आते हैं. अपनी बात रखने के लिए थरूर काफ़ी समय से कांग्रेस आलाकमान से समय मांग रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक़ कुछ ही हफ्तों में होने वाले केरल विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए संसद के बजट सत्र के दौरान राहुल गांधी और खरगे थरूर से मुलाक़ात कर उनकी शिकायत सुन सकते हैं. हालांकि क्या कांग्रेस आलाकमान थरूर को संतुष्ट कर पाएगा ये तो आगे थरूर के रूख से ही साफ़ होगा.

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