- केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड मामले में अपनी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर जांच की जानकारी दी
- दिल्ली पुलिस की FIR को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर CBI को ट्रांसफर किया गया और नई FIR दर्ज कर जांच शुरू हो गई
- गृह मंत्रालय ने डिजिटल अरेस्ट के मामलों से निपटने के लिए उच्चस्तरीय अंतर-मंत्रालयी समिति गठित की है
देश में बढ़ते डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड के बीच केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर दी है. कोर्ट के निर्देशों के अनुसार दिल्ली पुलिस की FIR को CBI को भी ट्रांसफर कर दिया गया है और एजेंसी ने इस मामले में नई FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. ये सब तब हो रहा है जब दिल्ली के ग्रेटर कैलाश में रहने वाले NRI डॉक्टर दंपति से वीडियो कॉल के जरिए डिजिटल अरेस्ट करके 14.85 करोड़ की ठगी का सनसनीखेज मामला सामने आया, जिसने इस अपराध की गंभीरता और व्यापकता को एक बार फिर उजागर कर दिया.
केंद्र की स्टेटस रिपोर्ट: CBI के पास केस, नई FIR दर्ज
सुप्रीम कोर्ट के 16 दिसंबर 2025 के आदेश के तहत दिल्ली पुलिस की FIR नंबर 59/2025 को CBI को ट्रांसफर किया गया. CBI ने इसे FIR नंबर RC2332026E0001 (दिनांक 09.01.2026) के रूप में रजिस्टर किया है और जांच शुरू हो चुकी है. केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कम से कम एक महीने का अतिरिक्त समय मांगा है, ताकि सभी संबंधित मंत्रालयों/संस्थाओं से लिखित रिपोर्ट प्राप्त कर समग्र कार्ययोजना पेश की जा सके.
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हाई-लेवल इंटर-डिपार्टमेंटल कमेटी गठित
डिजिटल अरेस्ट की समस्या को व्यवस्थित ढंग से निपटाने के लिए गृह मंत्रालय (MHA) ने उच्चस्तरीय अंतर-मंत्रालयी समिति का गठन किया है, कौन-कौन शामिल हैं?
- गृह मंत्रालय (MHA)
- इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय (MeitY)
- दूरसंचार विभाग (DoT)
- विदेश मंत्रालय (MEA)
- वित्तीय सेवा विभाग (DFS)
- विधि मंत्रालय
- उपभोक्ता मामले मंत्रालय
- RBI, CBI, NIA, दिल्ली पुलिस, I4C (Indian Cyber Crime Coordination Centre)
समिति की अध्यक्षता स्पेशल सेक्रेटरी (इंटरनल सिक्योरिटी), MHA कर रहे हैं, जबकि I4C के CEO सदस्य सचिव हैं. अटॉर्नी जनरल भी इन बैठकों में नियमित रूप से भाग ले रहे हैं.
बैठकों की टाइमलाइन: अमाइक्स क्यूरी और टेक कंपनियों से परामर्श
- 29 दिसंबर 2025: कमेटी की पहली बैठक—समस्या की परिभाषा, दायरा और तात्कालिक उपायों पर चर्चा
- 2 जनवरी 2026: अमाइक्स क्यूरी के साथ विशेष बैठक; इसमें RBI, DoT, MeitY और I4C के अधिकारी शामिल—अमाइक्स की सिफारिशों पर स्पष्टीकरण व रोडमैप
- 6 जनवरी 2026: MeitY ने Google, WhatsApp, Telegram, Microsoft सहित प्रमुख टेक कंपनियों के साथ बैठक—प्लेटफॉर्म एब्यूज़, KYC/traceability, त्वरित टेकी-कोऑर्डिनेशन और यूज़र सेफ्टी प्रोटोकॉल पर चर्चा
केंद्र ने बताया कि DoT और RBI से प्रारंभिक सुझाव प्राप्त हो चुके हैं, जबकि अन्य मंत्रालयों/एजेंसियों से रिपोर्टें जल्द अपेक्षित हैं.
केस स्टडी: दिल्ली में NRI डॉक्टर दंपति का ‘डिजिटल अरेस्ट'
ग्रेटर कैलाश में रहने वाले NRI डॉक्टर दंपति डॉ. ओम तनेजा और उनकी पत्नी डॉ. इंदिरा तनेजा को 24 दिसंबर से 9 जनवरी के बीच साइबर ठगों ने वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट कर रखा था. इस दौरान ठगों ने फर्जी मुकदमे, अरेस्ट वारंट, PMLA/मनी लॉन्ड्रिंग, नेशनल सिक्योरिटी के नाम पर धमकाया और आठ अलग-अलग खातों में किस्तों में करोड़ों रुपये ट्रांसफर कराए, कभी 2 करोड़, तो कभी 2.10 करोड़.
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दंपति को बाहर जाने या किसी से बात करने पर ठग लगातार वीडियो कॉल पर निगरानी रखते थे. बैंक विजिट के दौरान भी, यदि स्टाफ ने पूछताछ की तो ठगों ने पहले से स्क्रिप्ट थमाकर झूठी कहानी बताने को कहा. ये मामला तब खुला जब 10 जनवरी की सुबह ठगों ने दंपति को लोकल पुलिस स्टेशन जाने को कहा और दावा किया कि RBI पैसा रिफंड कर देगा. थाने पहुंचने पर स्पष्ट हुआ कि दंपति ₹14.85 करोड़ की ठगी का शिकार हो चुके हैं. मामले की जांच दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल की साइबर यूनिट IFSO को सौंप दी गई है.
क्यों खतरनाक है ‘डिजिटल अरेस्ट'? कैसे बनाते हैं शिकार
- इम्परसनेशन कॉल: ठग खुद को पुलिस/एजेंसी/बैंक अधिकारी बताते हैं.
- कानूनी डर का इस्तेमाल: अरेस्ट वारंट, PMLA, मनी लॉन्ड्रिंग, नेशनल सिक्योरिटी—कानूनी शब्दों से धमकी
- वीडियो कॉल निगरानी: पीड़ित को लगातार ऑनलाइन रखकर आइसोलेट करते हैं
- स्क्रिप्टेड जवाब: बैंक/परिवार/दोस्तों से कुछ भी छुपाने को प्रेशर
- किस्तों में ट्रांसफर: मल्टी-बैंक/मल्टी-एकाउंट के ज़रिये पैसे लेयरिंग
- फर्जी ‘रिफंड' वादा: अंत में RBI/कोर्ट रिफंड का झांसा देकर कन्फ्यूजन और विलंब
अगले कदम: कोर्ट में केंद्र की योजना क्या रखनी है, केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से जो अतिरिक्त एक महीना मांगा है, उसका उद्देश्य:
- सभी मंत्रालयों/एजेंसियों से लिखित रिपोर्ट और एक्शनएबल सुझाव प्राप्त करना
- प्लेटफॉर्म-लेवल उपाय—KYC सख्ती, रेड-फ्लैग ट्रांजैक्शन, तेज ब्लॉक/फ्रीज मेकैनिज्म
- बैंकिंग/पेमेंट चैनल में त्वरित फंड-फ्रीज़ और रिकवरी प्रोटोकॉल
- कानूनी/प्रोसीजरल बदलाव—अंतर-राज्यीय/अंतरराष्ट्रीय समन्वय, MLAT/Interpol आदि
- जन-जागरूकता अभियान—हॉटलाइन, हेल्पडेस्क, check-before-pay जैसी माइक्रो-एडवाइजरी
किसी का भी कॉल/वीडियो कॉल पर ‘अरेस्ट' वैध नहीं कानून में गिरफ्तारी की निश्चित प्रक्रिया है. किसी भी धमकी पर कॉल काटें, खुद से वेरिफाई करें. 112/1930 (राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन), लोकल थाने, आधिकारिक ईमेल/नंबर पर संपर्क करें. बैंक ट्रांसफर से पहले अपने परिवार/वकील/बैंक मैनेजर से सलाह लें; बड़ी रकम पर कूलिंग-ऑफ अपनाए. स्क्रीन शेयर/OTP/पिन कभी किसी को न दें. अगर शक हो तो तुरंत 1930 पर शिकायत और बैंक/UPI पर फ्रीज रिक्वेस्ट डालें, समय सबसे बड़ा फैक्टर है.
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