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ईरान की सरकार को उखाड़ फेंकना इतना आसान क्यों नहीं? समझें- IRGC और बासिज की काट निकालना क्यों है टेढ़ी खीर

ईरान में सरकार विरोधी विद्रोह तेज है, लेकिन सत्ता बदलना मुश्किल है क्योंकि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और बासिज नेटवर्क शासन की रीढ़ हैं. IRGC सेना से बढ़कर समानांतर सत्ता है, जबकि बासिज समाज में डर फैलाता है. इंटरनेट ब्लैकआउट, नेतृत्व की कमी और सुरक्षा बलों की वफादारी के कारण आंदोलन सड़कों तक सीमित रह जाते हैं.

ईरान की सरकार को उखाड़ फेंकना इतना आसान क्यों नहीं? समझें- IRGC और बासिज की काट निकालना क्यों है टेढ़ी खीर
  • ईरान में विद्रोह के बावजूद इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स और बासिज सत्ता का मजबूत आधार बने हुए हैं.
  • IRGC एक समानांतर सत्ता जैसा संगठन है जो सेना, खुफिया, साइबर और आर्थिक क्षेत्र में व्यापक नियंत्रण रखता है.
  • बासिज सामाजिक नेटवर्क के रूप में कार्य करता है जो डर और मुखबिरी के जरिए विरोधों को दबाता है.
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ईरान में इन दिनों सत्ता के खिलाफ विद्रोह अपने चरम पर है. सुप्रीम लीडर खामेनेई की नीतियों के खिलाफ युवा सड़कों पर उतरे हैं. सरकार को उखाड़ फेंकने तक की बातें कही जा रही हैं. लेकिन इन सबके बीच सरकार बदलने की बात जितनी आसान लगती है, जमीनी हकीकत उतनी ही कठोर है. इसकी सबसे बड़ी वजह है- इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और उसका अर्धसैनिक नेटवर्क बासिज. यही दोनों ईरानी सत्ता की रीढ़ हैं, और यही वजह है कि वहां विद्रोह अक्सर सड़कों तक सीमित रह जाता है, सत्ता तक नहीं पहुंच पाता.

IRGC: सिर्फ सेना नहीं, एक समानांतर सत्ता

IRGC कोई पारंपरिक सैन्य बल नहीं है. यह एक समानांतर स्टेट है. अपनी सेना, खुफिया तंत्र, साइबर यूनिट और विदेशों में सक्रिय नेटवर्क इसकी असली ताकत है.  दरअसल ईरान की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा तेल, कंस्ट्रक्शन, पोर्ट्स, टेलीकॉम आदि IRGC के हाथ में ही है. संसद, न्यायपालिका और मीडिया में इसकी गहरी घुसपैठ है. 

सबसे बड़ी बात, IRGC सीधे सुप्रीम लीडर के प्रति जवाबदेह है, न कि राष्ट्रपति या संसद के प्रति. यानी सरकार बदले, IRGC नहीं बदलता.

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बासिज: डर का सामाजिक नेटवर्क

अगर IRGC सत्ता की तलवार है, तो बासिज उसका डर फैलाने वाला साया. बासिज कोई साधारण पुलिस या मिलिशिया नहीं है. यह समाज के भीतर बुना हुआ नेटवर्क है. आपका पड़ोसी, दुकानदार या क्लासमेट भी बासिज से जुड़ा हो सकता है. वहां मुखबिरी एक सिस्टम का हिस्सा बन चुकी है.

ईरानी बलों को विरोधियों पर गोली चलाने के लिए अक्सर किसी कानूनी इजाजत की जरूरत नहीं होती है. यही वजह है कि ईरान में विरोध सिर्फ सरकार से नहीं, अपने ही समाज से टकराव बन जाता है.

विद्रोह को कुचलने की रणनीति

ईरानी शासन विरोध को केवल बल से नहीं तोड़ता, बल्कि मनोवैज्ञानिक तौर पर खत्म करता है.

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लंबे समय तक यातना देना., सालों जेल, अकेला सेल, पूछताछ करना. शारीरिक के साथ मानसिक प्रताड़ना करना ईरानी शासल की रणनीति का हिस्सा है.

‘जिंदा रहकर भी खत्म कर देता है ईरान'

जब कोई युवक कई साल बाद जेल से बाहर आता है तो पड़ोसी उससे दूरी बना लेते हैं. लोग डरते हैं कि कहीं उससे बात करने पर वे भी निशाने पर न आ जाएं.

नौकरी, शादी, सामाजिक जीवन- सब खत्म

यानी एक व्यक्ति नहीं, उसके पूरे भविष्य को सजा दी जाती है. 

क्यों विद्रोह और क्रांतियां हो जाती हैं फेल?

ईरान में छात्र आंदोलन होते हैं, महिलाओं के नेतृत्व में बड़े प्रदर्शन होते हैं, आर्थिक बदहाली पर सड़कों पर गुस्सा फूटता है. लेकिन हर बार अंत एक जैसा होता है. इसका एक मुख्य कारण है- तुलनात्मक शून्यता. यानी ईरान सरकार किसी भी उभरते हुए नेता को या तो जेल में डाल देती है या देश निकाला दे देती है. बिना किसी एक चेहरे या संगठित नेतृत्व के, सड़क पर उतरी भीड़ को लंबे समय तक टिकने नहीं दिया जाता है. 

इंटरनेट ब्लैकआउट भी एक अहम कारण है. जैसे ही प्रदर्शन तेज होते हैं, सरकार इंटरनेट बंद कर देती है, जिससे प्रदर्शनकारी आपस में समन्वय नहीं कर पाते.

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इसके अलावा सेना या सुरक्षा बलों में बड़े पैमाने पर विद्रोह नहीं होना भी इन विद्रोहों को अक्सर हल्का कर देता है. IRGC और बासिज की वफादारी सुप्रीम लीडर से बहुत ज्यादा है. इसलिए भी ईरान में आंदोलन कमजोर पड़ते हैं. 

क्या बाहर से सरकार गिराई जा सकती है?

बाहरी दबाव, प्रतिबंध, कूटनीति, यहां तक कि सैन्य कार्रवाई भी ईरान के भीतर सत्ता ढांचे को कमजोर नहीं करती, बल्कि कई बार उसे और मजबूत करती है. ऐसा इसलिए क्योंकि मौजूदा शासन इसे 'देश बनाम दुश्मन' की लड़ाई बना देता है. IRGC खुद को राष्ट्ररक्षक के रूप में पेश करता है.

ईरान में समस्या सिर्फ सरकार नहीं, पूरा सत्ता तंत्र है. जहां बंदूक, खुफिया, अर्थव्यवस्था और डर एक ही हाथ में हैं. जब तक IRGC नहीं टूटता, बासिज का सामाजिक नेटवर्क नहीं दरकता और सुरक्षा बलों के भीतर दरार नहीं पड़ती तब तक ईरान में सरकार को उखाड़ फेंकना क्रांति नहीं, लगभग असंभव मिशन बना रहेगा. 

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