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Digital Arrest कर 29 लाख की ठगी, साइबर ठगों ने बुजुर्ग दंपती को 24 घंटे तक वीडियो कॉल पर बनाए रखा बंधक

भिंड जिले में साइबर अपराधियों ने एक बुजुर्ग दंपति को निशाना बनाया, जिन्हें खुद को पुलिस और सरकारी अधिकारी बताकर 29.50 लाख रुपये की ठगी की गई. ठगों ने वीडियो कॉल के जरिए मानसिक दबाव डाला और ऑनलाइन कोर्ट पेशी का नाटक रचा.

Digital Arrest कर 29 लाख की ठगी, साइबर ठगों ने बुजुर्ग दंपती को 24 घंटे तक वीडियो कॉल पर बनाए रखा बंधक

भिंड जिले में साइबर अपराधियों ने एक बार फिर कानून का डर दिखाकर बुजुर्गों को निशाना बनाया है. ठगों ने खुद को मुंबई पुलिस, दिल्ली भारत सरकार का इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर, डीएसपी, आईजी और बैंक अधिकारी बताकर 64 वर्षीय रिटायर्ड शिक्षक प्रेम सिंह कुशवाह और उनकी पत्नी को डिजिटल अरेस्ट में रखकर 29 लाख 50 हजार रुपये की ठगी कर ली. यह पूरा घटनाक्रम करीब 24 घंटे तक चला, जिसमें दंपति को लगातार वीडियो कॉल के जरिए मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया.

पहला कॉल और डर की शुरुआत

7 जनवरी की सुबह करीब 11:30 बजे प्रेम सिंह कुशवाह के मोबाइल पर वीडियो कॉल आया. कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को मुंबई पुलिस का अधिकारी बताया. उसने कहा कि मुंबई की सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र स्थित कैनरा बैंक शाखा में उनके नाम से जुड़े एक खाते से करोड़ों रुपये की ब्लैक मनी का लेनदेन सामने आया है.

ठग ने दावा किया कि यह लेनदेन एक बड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस से जुड़ा है और इस मामले में प्रभावशाली लोगों के नाम शामिल हैं. भय का माहौल बनाने के लिए ठग ने महाराष्ट्र के राज्यसभा सांसद संजय राउत के नाम का भी जिक्र किया और कहा कि उनके नाम से जुड़े खाते में भी करोड़ों का लेनदेन हुआ है.

गिरफ्तारी का डर और नाम लिस्ट का झांसा

साइबर ठगों ने बुजुर्ग को बताया कि जांच एजेंसी के पास एक लंबी सूची है, जिसमें अंतिम 47 नामों में उनका नाम भी शामिल है. ठगों ने कहा कि अगर जांच में सहयोग नहीं किया गया तो तत्काल गिरफ्तारी होगी और मीडिया के सामने बदनामी तय है.
इस डर से बुजुर्ग प्रेम सिंह कुशवाह घबरा गए और अपनी पत्नी के साथ घर के एक कमरे में जाकर खुद को बंद कर लिया.

डिजिटल अरेस्ट और मानसिक दबाव

ठगों ने बंद कमरे में वीडियो कॉल पर साफ शब्दों में कहा कि किसी भी व्यक्ति से संपर्क नहीं कर सकते. उन्हें चेतावनी दी गई कि यदि किसी को जानकारी दी गई तो यह “कानून का उल्लंघन” माना जाएगा. डर को और गहरा करने के लिए ठगों ने वीडियो कॉल पर रामचरितमानस पर हाथ रखवाकर कसम दिलाई कि वे इस पूरे मामले की जानकारी किसी को नहीं देंगे. इसी वजह से घर में मौजूद बेटी को भी दंपति ने कुछ नहीं बताया.

ऑनलाइन कोर्ट पेशी का नाटक

ठगों ने अगले चरण में वीडियो कॉल के जरिए ऑनलाइन कोर्ट पेशी कराई, जो करीब तीन घंटे तक चली. ठग का पहला शख्स खुद को डीएसपी बनकर और दूसरा शख्स मुंबई कमिश्नर/आईजी व बैंक अधिकारी बनकर बात करता रहा. वीडियो कॉल पर ही आधार कार्ड, एटीएम कार्ड नंबर और अन्य व्यक्तिगत जानकारियां मांगी गईं. ठगों ने कथित दस्तावेज दिखाते हुए बताया कि ये सभी रिकॉर्ड मुंबई के कैनरा बैंक से जुड़े हैं.

आधार और एटीएम की स्कैनिंग

डिजिटल अरेस्ट के दौरान ठगों ने वीडियो कॉल पर ही आधार कार्ड और एटीएम कार्ड को स्कैन कर लिया. इसके बाद कहा गया कि यह प्रक्रिया जांच का हिस्सा है और इससे निर्दोष साबित होने में मदद मिलेगी.

RTGS से 29.50 लाख का ट्रांसफर

अगले दिन ठगों ने बुजुर्ग प्रेम सिंह कुशवाह को बैंक भेजा और RTGS के माध्यम से 29 लाख 50 हजार रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवा लिए. ठगों ने भरोसा दिलाया कि जांच पूरी होते ही 24 घंटे के भीतर पूरी रकम वापस कर दी जाएगी. लेकिन ट्रांसफर होते ही यह रकम गुजरात के बड़ोदरा स्थित एक खाते से 20 अलग-अलग खातों में भेज दी गई, जिससे साफ हो गया कि यह सुनियोजित साइबर ठगी है.

शिकायत और पुलिस की कार्रवाई

जब दंपती को ठगी का एहसास हुआ तो उन्होंने कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पीड़ित का बैंक खाता होल्ड कराया और अज्ञात साइबर ठगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की.

पुलिस का बयान

एसडीओपी रविंद्र वास्कले ने बताया कि यह डिजिटल अरेस्ट के नाम पर की गई गंभीर साइबर ठगी का मामला है. ठगों ने खुद को पुलिस और सरकारी अधिकारी बताकर बुजुर्ग दंपति से 29.50 लाख रुपये ठग लिए हैं. पुलिस बैंकिंग लेनदेन, कॉल डिटेल और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर सभी पहलुओं की जांच कर रही है.

पुलिस की अपील

  • पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि कोई भी पुलिस या जांच एजेंसी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी या डिजिटल अरेस्ट नहीं करती.
  • किसी भी अनजान व्यक्ति को OTP, आधार, एटीएम या बैंक विवरण साझा न करें.
  • साइबर ठगी होने पर तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं.
  • यह घटना दर्शाती है कि साइबर अपराधी अब कानून, अदालत और प्रभावशाली नामों का सहारा लेकर बुजुर्गों को मानसिक रूप से तोड़कर बड़ी ठगी को अंजाम दे रहे हैं. सतर्कता ही इससे बचाव का सबसे बड़ा हथियार है.

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