संगम तट पर तीन जनवरी पौष पूर्णिमा से शुरू हो चुका है आस्था का सबसे बड़ा महापर्व माघ मेला और मेले में इन दिनों आस्था का जनसैलाब उमड़ रहा है.धार्मिक और आध्यात्मिक मेले में कई रंग देखने को मिल रहे है.साधु–संतों के अलग-अलग पंडालों में भक्ति की धारा बह रही है.वहीं माघ मेला क्षेत्र के सेक्टर पांच स्थित झूसी पुल के देवरहा बाबा के आश्रम में कुछ अलग ही नजारा देखने को मिल रहा है.देवरहा बाबा के पंडाल में पिछले बीस सालों से अनवरत अखंड ज्योति जल रही है.जहां संगम की रेती पर हर साल लगने वाले माघ मेले या महाकुंभ के खत्म होने के बाद तंबुओं को उखाड़ दिया जाता है, वहीं देवरहा बाबा का पंडाल हमेशा बसा रहता है.
स्वर्गीय देवरहा बाबा के न रहने पर उनकी याद में पंडाल में करीब 20 फीट ऊंची कुटिया भी है, जहां उनकी फोटो भी लगी है.इस पंडाल की सेवा उनके शिष्य महंत रामदास महाराज करते हैं.हर साल मेले के आयोजन के दौरान यहां आने वाले श्रद्धालु देवरहा बाबा के पंडाल में पहुंचकर भजन कीर्तन करते हैं. पंडाल में जल रही अखंड ज्योति के दर्शन करते हैं.इस पंडाल की खासियत यही है कि देवरहा बाबा की याद में बनी कुटिया और उसमें करीब 50 फीट ऊपर अखंड ज्योति जल रही है.

Devraha Baba देवरहा बाबा की कुटिया
यह अखंड ज्योति पिछले 20 सालों से अनवरत जल रही है.इस पंडाल में देवरहा बाबा का मंदिर भी स्थापित है.50 फीट ऊपर लोहे के पोल में इस अखंड ज्योति का एक ढांचा ऐसा तैयार किया गया है. चाहे हवा हो या तूफान लेकिन यह अखंड ज्योति हमेशा जलती रहती है.हर साल संगम में आने वाली बाढ़ भी इस ज्योति को हिला नहीं सकती है.अखंड ज्योति तक पहुंचाने के लिए बाकायदा लोहे की सीढ़ियां तैयार की गई है.कहा जाता है कि यह अखंड ज्योति सुख समृद्धि और कल्याण के लिए जलाई गई है.
देवरहा बाबा के पंडाल में जल रही यह अखंड ज्योति बेहद ही चमत्कारी मानी जाती है.प्रसिद्ध संत देवरहा बाबा का जीवन रहस्यों से भरा हुआ था.उनकी सबसे अजीब बात थी कि वो जमीन से थोड़ी ऊंचाई पर रहते थे और जब भक्त उनसे आशीर्वाद लेने आते थे तो वो अपने चरणों को उनके सर पर रख देते थे और आशीर्वाद देते थे.बाबा एक ऐसे योगी माने जाते थे जो 150 से अधिक वर्षों तक जीवित रहे.

Akhand Jyoti
देवरहा बाबा हमेशा एक लकड़ी और बांस की बने ऊंचे मचान पर रहते थे, जो जमीन से लगभग करीब 15 फीट से ज्यादा ऊंचा होता था.यह स्थान इसलिए भी खास हो जाता है क्योंकि यहां देवरहा बाबा बैठकर साधना करते थे और श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देते थे.देवरहा बाबा ने फरवरी 1989 में संगम के किनारे लगे कुंभ मेले में घोषणा की थी कि अयोध्या में श्रीराम का भव्य मंदिर बनेगा.यहीं से उन्होंने राम मंदिर आंदोलन का समर्थन किया था.
संगम की रेती के सेक्टर पांच में संत देवरहा बाबा का शिविर स्वामी रामदास जी महाराज संचालित करते है.उन्होंने बताया कि जबसे पूज्य सरकार देवरहा बाबा का मचान स्थापित हुआ तबसे ये अखंड ज्योति अनवरत पिछले बीस सालों से जल रही है.इस शिविर में 50 फीट ऊंचाई पर लगाई गई अखंड ज्योति सर्दी, गर्मी और बारिश-बाढ़ में भी जलती रहती है.सावन के महीने में बाढ़ आने पर भी अखंड ज्योति सुबह और शाम जलाई जाती है.
देवरहा बाबा को समर्पित यह शिविर और स्थापित कुटिया माघ मेले में श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहती है.पहले कुछ वर्षों तक लकड़ी के स्तंभ पर या अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित होती रहती थी.बाढ़ के समय भी नाव के जरिए यहां पहुंचकर अखंड ज्योति की सेवा की जाती है.2025 में एक भक्त द्वारा लौ स्तंभ की स्थापना की गई.अखंड ज्योति को सनातन संस्कृति के नित्य उन्नयन के लिए जलाया गया है.
सनातन संस्कृति के जरिए ही मानवता का कल्याण हो सकता है.आज के परिवेश में मानवता सुरक्षित रहे यही मानव की सबसे बड़ी उपलब्धि है.ये अखंड ज्योति दिव्य समाज के लिए है.मां गंगा के गर्भ में यह अखंड ज्योति पूज्य सरकार संत देवराहा बाबा की स्मृति में जल रही है.हर समय ये सुरक्षित जलती रहती है.सम्पूर्ण विश्व में मानवता के लिए जो भी नुकसानदेह है उनका विनाश हो इस संकल्प के साथ अखंड ज्योति जल रही है.
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