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चुनाव में AAP विधायक ने दिया शिक्षा का गलत ब्योरा? सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जवाब

हाई कोर्ट ने यह भी माना था कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 123(4) के तहत भ्रष्ट आचरण का आरोप तभी बनता है जब किसी दूसरे उम्मीदवार के बारे में चुनावी संभावनाओं को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से गलत बयान दिया गया हो.

चुनाव में AAP विधायक ने दिया शिक्षा का गलत ब्योरा? सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जवाब
आप विधायक विशाल रवि
NDTV

सुप्रीम कोर्ट ने AAP विधायक विशाल रवि से जवाब मांगा है. शैक्षणिक योग्यता के कथित गलत ब्योरे से यह मामला जुड़ा हुआ है. दिल्ली के  2020 के विधानसभा चुनाव के दौरान करोल बाग सीट पर यह विवाद शुरू हुआ था.

पूरा मामला क्या है?

अब सुप्रीम कोर्ट ने करोल बाग से आम आदमी पार्टी (AAP) विधायक विशेष रवि के 2020 के विधानसभा चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका पर उनका जवाब मांगा है. BJP सांसद योगेंद्र चंदोलिया ने रवि के चुनाव को इस आधार पर चुनौती दी है कि उन्होंने चुनावी हलफनामे और फॉर्म-26 में अपनी शैक्षणिक योग्यता के बारे में कथित तौर पर गलत जानकारी दी थी. 

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ दिल्ली हाई कोर्ट के अप्रैल 2026 के उस फैसले के खिलाफ चंदोलिया की अपील पर सुनवाई कर रही थी जिसमें उनकी चुनाव याचिका को आगे चलाने योग्य नहीं माना गया था. 

दिल्ली हाई कोर्ट ने 24 अप्रैल 2026 को कहा था कि 2020 का चुनाव समाप्त हो चुका है और रवि 2025 के विधानसभा चुनाव में दोबारा करोल बाग से निर्वाचित हो चुके हैं. ऐसे में पुरानी चुनाव याचिका निष्प्रभावी हो गई है. 

हाई कोर्ट ने यह भी माना था कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 123(4) के तहत भ्रष्ट आचरण का आरोप तभी बनता है जब किसी दूसरे उम्मीदवार के बारे में चुनावी संभावनाओं को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से गलत बयान दिया गया हो. चंदोलिया की शिकायत रवि की शैक्षणिक योग्यता से संबंधित थी. 

बीजेपी का क्या पक्ष है?

सुप्रीम कोर्ट में चंदोलिया की ओर से पेश वकील ने कहा कि रवि ने 2013 के नामांकन दस्तावेजों में खुद को बी.कॉम स्नातक बताया था, जबकि 2015 में उन्होंने खुद को स्नातक की पढ़ाई कर रहा बताया था. वकील के मुताबिक, 2020 के चुनाव में रवि ने खुद को केवल 10वीं पास बताया.  उनका कहना था कि इन अलग-अलग घोषणाओं से शैक्षणिक योग्यता को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं और यह तय किया जाना जरूरी है कि चुनावी हलफनामे में अपनी योग्यता के बारे में गलत जानकारी देना चुनावी अपराध या भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में आता है या नहीं. 

सुनवाई के दौरान बेंच ने यह भी ध्यान दिलाया कि इस बीच नए चुनाव हो चुके हैं और रवि फिर चुनाव जीत चुके हैं. चंदोलिया के वकील ने इस मामले की तुलना पूर्व दिल्ली मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर से जुड़े लंबित चुनाव विवाद से भी की जिसमें शैक्षणिक योग्यता के कथित गलत विवरण का मुद्दा उठा था।

आगे क्या होने वाला है?

वकील की दलीलों के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) की डिग्री की मान्यता से जुड़े पहलू पर भी सवाल उठाया और कहा कि IGNOU की डिग्रियां कुछ समय के लिए मान्य नहीं थीं. सुप्रीम कोर्ट ने मामले में रवि समेत 2020 के करोल बाग चुनाव लड़ने वाले अन्य प्रत्याशियों से जवाब दाखिल करने को कहा है.

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