क्रिकेट में कई बार स्कोरबोर्ड पर दिखने वाले बड़े आंकड़े सारी सुर्खियां बटोर लेते हैं, लेकिन मैच के नतीजे पर असल असर उन पारियों का भी होता है जो सही समय पर आती हैं. शिवम दुबे पिछले कुछ वर्षों में टीम इंडिया के लिए ऐसे ही 'फाइनल स्पेशलिस्ट' खिलाड़ी बनकर उभरे हैं. जब भी कोई बड़ा फाइनल सामने आया, दुबे ने अपने योगदान से टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाने का काम किया. अगर पिछले तीन बड़े खिताबी मुकाबलों पर नजर डालें तो शिवम दुबे का प्रभाव साफ दिखाई देता है. टी20 वर्ल्ड कप 2024 के फाइनल में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ उन्होंने 16 गेंदों पर 27 रन बनाए थे. उस मुकाबले में भारत को बीच ओवरों के बाद तेजी से रन जुटाने की जरूरत थी और दुबे ने वही भूमिका निभाई. उनकी पारी ने टीम को ऐसे स्कोर तक पहुंचाने में मदद की, जिसने आखिरकार विश्व कप जीत की नींव रखी.
इसके बाद टी20 वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई. महज 8 गेंदों पर 26 रन की उनकी विस्फोटक पारी ने मैच का मोमेंटम पूरी तरह भारत की तरफ मोड़ दिया. आंकड़ों में यह पारी छोटी जरूर लगती है, लेकिन एक फाइनल में इतनी तेज रन गति से रन बनाना विपक्षी टीम पर अतिरिक्त दबाव डाल देता है और उन्होंने ये काम कर दिखाया.
अब एशियन गेम्स 2026 के गोल्ड मेडल मुकाबले में पाकिस्तान के खिलाफ भी शिवम दुबे ने वही कहानी दोहराई. भारत का स्कोर 133 रन पर 5 विकेट था और पारी थोड़ी धीमी पड़ चुकी थी. ऐसे समय में दुबे ने तिलक वर्मा का साथ निभाते हुए सिर्फ 15 गेंदों में 27 रन बनाए. दोनों बल्लेबाजों ने छठे विकेट के लिए 62 रन जोड़े और भारत को 211 रन के मजबूत स्कोर तक पहुंचाया. यही साझेदारी बाद में मैच का बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई.
एशियन गेम्स फाइनल की खास बात यह रही कि यहां दुबे का योगदान सिर्फ बल्ले तक सीमित नहीं रहा. पाकिस्तान के रन चेज के दौरान उन्होंने गेंद से भी अहम भूमिका निभाई. तीन ओवर में 33 रन देकर दो विकेट लेने वाले दुबे ने विपक्षी टीम की लय तोड़ी और भारत को मुकाबले में मजबूती दिलाई. टी20 वर्ल्ड कप 2024 और 2026 के फाइनल में उन्होंने गेंदबाजी नहीं की थी, लेकिन एशियन गेम्स फाइनल में एक सच्चे ऑलराउंडर की तरह दोनों रूप में योगदान दिया.
यही वजह है कि शिवम दुबे का महत्व केवल उनके रन या विकेट के आंकड़ों से नहीं मापा जा सकता. बड़े मुकाबलों में वह अक्सर वही काम करते हैं, जिसकी टीम को उस समय सबसे ज्यादा जरूरत होती है. कभी तेजी से रन बनाकर मैच की दिशा बदलना, तो कभी गेंद से अहम विकेट निकालना. यही गुण उन्हें टीम इंडिया का भरोसेमंद खिलाड़ी भी बनाता है.
एशियन गेम्स में गोल्ड जीतने के बाद दुबे ने भी इस उपलब्धि को बेहद खास बताया. उन्होंने कहा, "इस भावना को शब्दों में बयां करना मुश्किल है क्योंकि हमने देश के लिए गोल्ड जीता है. यह हमारे लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है. देश का मान बढ़ाना शब्दों से परे है. सभी भारतीयों को हम पर गर्व होगा."
दुबे ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के समर्थन को भी अपनी सफलता का अहम कारण बताया. उन्होंने कहा, "BCCI लगातार हमारा समर्थन करता है और यही भरोसा हमें देश के लिए बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा देता है."
टी20 वर्ल्ड कप 2024 में 27 रन, टी20 वर्ल्ड कप 2026 में 26 रन और एशियन गेम्स 2026 के फाइनल में 27 रन के साथ दो विकेट. ये सिर्फ आंकड़े नहीं हैं, बल्कि उन तीन बड़े फाइनल की कहानी हैं जहां शिवम दुबे ने दबाव के बीच टीम इंडिया के लिए निर्णायक भूमिका निभाई. यही कारण है कि भारतीय क्रिकेट में उन्हें अब सिर्फ एक पावर हिटर नहीं, बल्कि "फाइनल स्पेशलिस्ट" के तौर पर भी देखा जाने लगा है.
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