सुप्रीम कोर्ट ने देश में सड़क सुरक्षा और मोटर वाहन कानूनों को सही तरीके से लागू करने को लेकर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कई अहम निर्देश दिए हैं. जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि केवल ई-चालान जारी करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जुर्माने की प्रभावी वसूली और नियमों का जमीन पर पालन भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए.
कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मोटर वाहन अधिनियम की धारा 136A और केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के नियम 167A के तहत इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और सड़क सुरक्षा व्यवस्था लागू करने का निर्देश दिया.
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 28 अक्टूबर 2025 को सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) की ओर से तैयार SOP लागू करने और ई-एनफोर्समेंट साइट्स अधिसूचित करने को भी कहा गया है.
लंबित ई-चालान पर वाहन की ऑनलाइन सेवाएं रोकें
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिन वाहनों पर ई-चालान की राशि बकाया है, उनके लिए ऑनलाइन वाहन सेवाओं को रोका जाए. ऐसे वाहनों का रजिस्ट्रेशन नवीनीकरण, डुप्लीकेट रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट, मालिक का पता अपडेट करने जैसी सेवाएं रोकने का निर्देश दिया गया है.
बार-बार ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई
कोर्ट ने 2026 में प्रभावी हुए संशोधित नियम 21(25) का भी जिक्र किया. इसके तहत 1 जनवरी 2026 से शुरू होने वाली एक साल की अवधि में पांच या उससे अधिक अपराध या उल्लंघन करने वाले ड्राइविंग लाइसेंस धारक के कृत्य को सार्वजनिक खतरा माना गया है.
कोर्ट ने वाहनों की रैंडम जांच का भी निर्देश दिया है. यदि जांच में पाया जाता है कि ई-चालान का भुगतान नहीं किया गया है, तो आवश्यक कार्रवाई के तहत वाहन को जब्त किया जा सकता है.
ई-चालान का करीब 49,194 करोड़ रुपये बकाया
सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पास जारी किए गए. ई-चालानों के तहत करीब 49,194.05 करोड़ रुपये की राशि वसूलना बाकी है. इनमें से करीब 26,175.05 रुपये करोड़ की वसूली हो चुकी है. कोर्ट ने अधिकारियों से कहा कि सिर्फ हजारों-लाखों ई-चालान जारी करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि वसूली और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन पर ध्यान देना होगा.
दिल्ली में पैदल यात्रियों की सुरक्षा पर भी निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट और राष्ट्रीय प्राणी उद्यान के बीच मथुरा रोड पर पैदल यात्रियों की सुरक्षा को लेकर दिल्ली सरकार और केंद्र को तत्काल कदम उठाने को कहा.
कोर्ट ने कहा कि इस हिस्से में बड़ी संख्या में कर्मचारी, वकील, मुकदमेबाज, बच्चे और परिवार सड़क पार करते हैं और उनकी सुरक्षा के लिए पर्याप्त व्यवस्था जरूरी है.
कोर्ट ने बताया कि एक पैदल यात्री रेड लाइट लगाई गई है, लेकिन वह कई मौकों पर काम नहीं करती. अदालत ने दो स्थानों पर सिंक्रोनाइज्ड रेड लाइट, रंबल स्ट्रिप और इलेक्ट्रॉनिक निगरानी जैसे उपायों पर भी विचार करने को कहा है.
यूपी बस हादसे पर भी जवाब मांगा
सुप्रीम कोर्ट ने 23/24 सितंबर 2026 की रात यमुना एक्सप्रेसवे के पास जेवर में डबल-डेकर बस में आग लगने से नौ यात्रियों की मौत की घटना को भी गंभीरता से लिया है कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव, केंद्र सरकार और सड़क परिवहन मंत्रालय से जवाब मांगा है.
पीठ ने बस के चालक और पंजीकृत मालिक के खिलाफ की गई कार्रवाई, उनकी गिरफ्तारी तथा बस को सड़क पर चलाने से पहले नियमों और सुरक्षा मानकों के अनुपालन की जानकारी हलफनामे के जरिए मांगी है.
मामले की अगली सुनवाई 25 नवंबर 2026 को दोपहर 2 बजे होगी.
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