- फ्लाईदुबई की फ्लाइट में पायलट स्मित मच्छार पर ओमानी सह-पायलट ने धारदार हथियार से हमला किया था.
- स्मित मच्छार ने अपनी जान जोखिम में डालकर विमान का नियंत्रण संभाला और 176 लोगों की जान बचाई.
- इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्मित मच्छार से बातचीत कर उन्हें बहादुरी के लिए सम्मानित किया.
फ्लाईदुबई की फ्लाइट में पायलट स्मित मच्छार पर जिस तरह से हमला किया गया, अब उसकी पूरी कहानी सामने आ गई है. यह पूरी कहानी खुद पायलट स्मित मच्छार ने बताई है. स्मित मच्छार पर भी कॉकपिट में ओमानी सह-पायलट ने कुल्हाड़ी जैसे धारदार हथियार से हमला किया था. यूएई जांच एजेंसी अभी आरोपी ओमानी पायलट हमम अल-हम्ममी से पूछताछ कर रही है. दूसरी ओर स्मित मच्छार का भी इलाज जारी है. मच्छार ने जिस तरह से अपनी जान पर खेलकर 176 लोगों की जिंदगी बचाई, उससे वो वर्ल्ड हीरो बन चुके हैं. हर कोई उनकी बहादुरी की तारीफ कर रहा है. अब इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी कैप्टन स्मित मच्छार से बातचीत की. इस बातचीत में स्मित ने हमले की पूरी कहानी बताई.
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और कैप्टन स्मित मच्छार के बीच क्या हुई बातचीत, पढ़ें
नेतन्याहूः कैप्टन स्मित, क्या आप मुझे सुन पा रहे हैं?
कैप्टन स्मित: जी सर, सुन रहा हूं. आप कैसे हैं?
नेतन्याहू: मैं ठीक हूं, पर आप कैसा महसूस कर रहे हैं?
कैप्टन स्मित: धीरे-धीरे ठीक हो रहा हूं, सर.
नेतन्याहू: शुक्रिया. कैप्टन, मैं आपको और अपने प्रिय मित्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को न्योता देना चाहता हूं कि आप हमारे अगले स्वतंत्रता दिवस पर मशाल जलाएं. आप भारत और इजरायल, दोनों बहादुर देशों के सच्चे नायक हैं, और पूरी दुनिया के नायक हैं. मेरी कामना है कि आप जल्द से जल्द पूरी तरह स्वस्थ हो जाएं. पर मैं यह पूछना चाहता था कि यह सब शुरू कैसे हुआ? क्या आप बता सकते हैं?
कैप्टन स्मित: यह एक आम उड़ान थी. सह-पायलट ने कहा... मेरा मतलब, उसने मांग की... मांग नहीं, वह नमाज पढ़ना चाहता था. यहां के बहुत से लोग नमाज पढ़ते हैं, तो इसमें कोई असामान्य बात नहीं थी. वह नमाज पढ़ रहा था, तो मैं लिहाज में सामने की तरफ देख रहा था, पीछे नहीं.
और अचानक, करीब चार-पांच मिनट बाद, मेरे सिर के पिछले हिस्से पर जोर का वार हुआ. मुझे पहले लगा कि विमान को कोई भारी नुकसान हुआ है, कुछ गड़बड़ है. लेकिन उसके बाद वार लगातार होते रहे, एक के बाद एक. तब मुझे समझ आया कि यह विमान नहीं, बल्कि कॉकपिट में मेरे साथ मौजूद वह आदमी है. मैंने उसे रोकने की कोशिश की, पर शुरुआती वारों की वजह से मुझे लगभग कुछ दिख ही नहीं रहा था. सब धुंधला हो गया था. उसी वक्त मुझे लगा कि विमान तेजी से नीचे जा रहा है.

स्मित मच्छार ने आगे बताया कि मुझे अब भी पूरी बात टुकड़ों में ही याद है, पर उस वक्त का इतना याद है. मैंने एक बार दरवाजा खोलने में कामयाबी पाई थी, पर मुझे लगता है उसने उसे फिर बंद कर दिया. इसके बाद मुझे याद है कि मैं कॉकपिट के फर्श पर पड़ा था, और मुझे विमान की सनसनाहट और लोगों की चीखें सुनाई दे रही थीं.
जैसा मैंने यहां राजदूत को भी बताया, मेरे अंदर एक आखिरी लड़ाई बाकी थी. इसे निजी कह लीजिए या लोगों के लिए कह लीजिए, पर मैंने बस इतना सोचा कि अगर मैंने यह नहीं किया तो मैं मर जाऊंगा. तभी मैंने पूरी ताकत लगा दी. जो कुछ भी बचा था, सब झोंक दिया और दरवाजे की तरफ बढ़ा और उसे खोल दिया. शुक्र है कि बाहर लोग टूट पड़ने को तैयार खड़े थे, उन्होंने कमान संभाल ली. उसके आगे की बात तो आपको पता ही है, सर.

नेतन्याहू: सच कहूं तो मैं आपकी हिम्मत से हैरान हूं, और उन नामुमकिन हालात में आपके संयम से भी. मुझे यह नहीं पता कि आपने वह पिन कैसे खींची जो पायलट का दरवाजा... कॉकपिट का दरवाजा खोलती है?
कैप्टन स्मित: नहीं सर. दरवाजे में अंदर से घुमाकर खोलने वाला तरीका होता है. बाहर से इसे सिर्फ कोड डालकर खोला जा सकता है. मेरे साथी बाहर से कोड डालने की कोशिश कर रहे थे, पर वह आदमी कोड से खुलने नहीं दे रहा था. दरवाजा खोलने का एक ही रास्ता था — नॉब तक पहुंचना, और बाकी नॉब की तरह उसे घुमा देना, फिर वह खुद ही खुल जाता है. तो कोई पिन नहीं थी, पर हां, दरवाजा... बस एक छोटा-सा झटके से घुमाना था. असली बात वहां तक पहुंचने की थी. और एक बार हाथ नॉब पर पहुंच गया, तो मुझे लगता है मैंने उसे घुमा दिया और दरवाजा खुल गया.
नेतन्याहू: मुझे लगता है यह किस्मत का फेर भी था और आस्था का फेर भी. आपने जो किया, वह असाधारण है. इजरायली यात्रियों से मैंने सुना कि उसके बाद क्या हुआ. आप महान नायक हैं, और आपके साथ भी नायक ही थे. आपने उस दिन को बचा लिया. आपने इतनी जानें बचाईं. मुझे लगता है आपने इससे भी बड़ी कोई चीज बचाई — आपने दुनिया का यह भरोसा बचाया कि एक बहादुर पायलट और बहादुर यात्री इस बुराई पर काबू पा सकते हैं, चाहे वह कितनी भी डरावनी और कितनी भी हिंसक क्यों न हो. पूरी दुनिया में इसकी जो सराहना हो रही है, वह जायज है. आप इजरायल के नायक हैं, भारत के नायक हैं, पूरी दुनिया के नायक हैं. और मैं आपको बता सकता हूं कि यहां के लोग आपका खुली बांहों से स्वागत करेंगे. उस डेंटिस्ट समेत, जिसने आपका इलाज किया! मैंने उनसे पूछा था... खैर, यह ठीक दांत खींचने जैसा तो नहीं था... उन्होंने कहा कि आप बेहद बहादुर थे. मुझे कहना होगा कि यह लगभग चमत्कार जैसा है.
कैप्टन स्मित: मैं भी उनसे मिलना चाहूंगा. सच कहूं तो उन्होंने मेरी जान बचाई.
नेतन्याहू: आप दोनों ने मिलकर कितनी जानें बचाईं. और कृपया मेरी और मेरी पत्नी की तरफ से अपनी पत्नी को शुभकामनाएं कहिएगा. मुझे पता है आपका परिवार है, और यह भी जान लीजिए कि आप राष्ट्रों के परिवार का हिस्सा हैं. उस परिवार का एक वीर हिस्सा. जल्दी स्वस्थ हो जाइए.
कैप्टन स्मित: जी सर, जरूर. बहुत-बहुत धन्यवाद.
नेतन्याहू: और मैं फिर कहूंगा, मैं चाहता हूं कि कैप्टन स्मित और प्रधानमंत्री मोदी, हमारे अच्छे मित्र, मशाल जलाएं. यह हमारा सर्वोच्च सम्मान है जो हम स्वतंत्रता दिवस पर देते हैं. आमतौर पर यह इजरायली नागरिकों के लिए ही होता है, पर मुझे लगता है इस मामले में इजरायल के सभी नागरिक आपको अपना मान लेंगे. वे अभी भी ऐसा मानते हैं, और तब भी मानेंगे. तो हम आपसे जल्द इजरायल में मिलने की उम्मीद करते हैं. मैं आपसे मिलने का इंतजार करूंगा, सर. हालात को देखते हुए मुझे लगता है यह एक यादगार और ऐतिहासिक यात्रा होगी. धन्यवाद सर. आपने जो कुछ किया, उसके लिए धन्यवाद.
कैप्टन स्मित: धन्यवाद, बहुत-बहुत धन्यवाद सर.
नेतन्याहू: धन्यवाद, सर.
कैप्टन स्मित: आपसे बात करके अच्छा लगा.
नेतन्याहू: धन्यवाद.
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