- धार भोजशाला विवाद मामले में मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में नमाज के लिए दी गई वैकल्पिक जमीन पर आपत्ति जताई
- मुस्लिम पक्ष के वकील हुजैफा अहमदी ने बताया कि उपलब्ध कराई गई जमीन विवादित स्थल से लगभग दो किलोमीटर दूर है
- SC ने शुक्रवार की नमाज जारी रखने के लिए भोजशाला के आसपास वैकल्पिक जगह मुहैया कराने का निर्देश दिया था
धार भोजशाला विवाद मामले में मुस्लिम पक्ष एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. मामले में आज सुनवाई हुई. इस दौरान मुस्लिम पक्ष के वरिष्ठ वकील हुजैफा अहमदी ने नमाज के लिए मुहैया कराई गई जमीन पर अपनी आपत्ति जताई. वकील ने कहा कि शुक्रवार की नमाज के लिए जो वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराई गई है, वह भोजशाला विवादित स्थल से काफी दूर है. उन्होंने कहा कि अदालत के आदेश के अनुसार जमीन भोजशाला के पास होनी चाहिए थी, लेकिन उपलब्ध कराई गई जमीन लगभग 2 किलोमीटर दूर है.
'एक शुक्रवार की नमाज पहले ही छूट चुकी है'
वकील हुजैफा अहमदी ने कहा कि इस वजह से एक शुक्रवार की नमाज पहले ही छूट चुकी है. उनके अंतरिम आवेदन पर जल्द सुनवाई की जाए. इस पर सॉलिसिटर जनरल (SG) ने कहा कि वह इस मामले को व्यक्तिगत रूप से देखेंगे और आवश्यक सुधार करेंगे. उन्होंने मामले की सुनवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को शुक्रवार के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया. सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि अदालत के आदेश का लैटर एंड स्प्रिट यानी भावना के अनुरूप पालन होना चाहिए.
नमाज की वैकल्पिक जमीन पर मुस्लिम पक्ष की नाराजगी
बता दें कि 14 जुलाई को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार की नमाज जारी रखने की मुस्लिम पक्ष की मांग पर वैकल्पिक जगह का प्रस्ताव दिया था. सीजेआई सूर्य कांत ने सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता से पूछा था कि क्या नमाजियों के लिए भोजशाला परिसर के आसपास कोई खुली जगह मुहैया कराई जा सकती है. CJI सूर्य कांत ने मुस्लिम पक्ष से पूछा था, "क्या हम आसपास के एरिया में नमाज की व्यवस्था के आदेश दे सकते हैं? जब तक इस मामले में अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक के लिए ऐसी अंतरिम व्यवस्था की जा सकती है.
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