दिल्ली में झुग्गी-झोपड़ी की जगह बहुमंजिला इमारतों का रास्ता साफ हो गया है. राजधानी की 675 जेजे क्लस्टर के 5 लाख परिवारों यानी 20 लाख आबादी को इसका लाभ मिलेगा. दिल्ली के एलजी तरनजीत सिंह संधू ने शहरी विकास विभाग की दिल्ली स्लम एवं झुग्गी-झोपड़ी पुनर्वास और पुनर्स्थापन नीति 2026 को बुधवार को अधिसूचित कर दिया. इसकी कट ऑफ डेट बढ़ाकर 1 जनवरी 2025 कर सबसे बड़ा बदलाव किया गया है. यानी इस तारीख तक बनी सारी झुग्गी बस्तियों के लोगों को पुनर्वास योजना का लाभ मिलेगा. पहले कटऑफ डेट 1 जनवरी 2015 थी, जिससे लाखों परिवार वंचित हो रहे थे.
पहले चरण में सीलमपुर, सुल्तानपुरी और लाजपत नगर
दिल्ली सरकार ने सीलमपुर, सुल्तानपुरी और लाजपत नगर के 17 क्लस्टरों के लिए नई रीडेवलपमेंट नीति भी घोषित कर दी है.दिल्ली में झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले परिवारों को पक्के मकान देने की दिशा में यह बड़ा कदम है.सरकार की नई पुनर्वास नीति में दिल्ली के तीन मुख्य इलाकों सीलमपुर, सुल्तानपुरी और लाजपत नगर में फैली 17 झुग्गी बस्तियों में बहुमंजिला आवासीय सोसायटी बनाई जाएंगी. इसके लिए 4870 झुग्गियों को हटाकर पात्र परिवारों को आधुनिक फ्लैट में शिफ्ट किया जाएगा.
निजी बिल्डर बनाएंगे ऊंची इमारतें
पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर किसी बिल्डर को सोसायटी तैयार करने का ठेका दिया जाएगा. निजी बिल्डर पात्र झुग्गीवासियों के लिए बहुमंजिला आवासीय फ्लैट तैयार करेंगे. इसके बदले बिल्डरों को जमीन के एक हिस्से पर व्यावसायिक और आवासीय निर्माण कर उसे खुले बाजार में बेचने की अनुमति दी जाएगी ताकि परियोजना की लागत निकल सके. इन बहुमंजिला इमारतों में लिफ्ट, चौड़ी सड़कें, सीवरेज सिस्टम, सामुदायिक भवन, पार्क और पार्किंग भी होंगी.
पहले चरण में 5 क्लस्टर
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के मुताबिक, पहले चरण में मयूर विहार, सीलमपुर, सुल्तानपुरी, लाजपत नगर और पीतमपुरा के 5 जेजे क्लस्टरों का पुनर्विकास होगा. लेकिन बाकी जेजे क्लस्टर का काम भी युद्धस्तर पर बढ़ेगा और DDA और DUSIB हर महीने कम से कम 5 पुनर्वास परियोजनाओं के टेंडर जारी करेंगे. 50 अतिरिक्त जेजे क्लस्टरों के लिए डीपीआर की तैयारी है. पुनर्वास कॉलोनियों में केवल आवासीय फ्लैट ही नहीं होंगे बल्कि वहां आंगनवाड़ी केंद्र और स्कूल होंगे. प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र यानी आयुष्मान आरोग्य मंदिर होंगे. बच्चों के लिए खेल के मैदान और सामुदायिक पार्क बनेंगे. स्वच्छ पेयजल की दोहरी पाइपलाइन, लिफ्ट और जल भंडारण सुविधा होगी.
दिल्ली में अभी 675 झुग्गी-झोपड़ी क्लस्टर
दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (DUSIB) के अनुसार, राजधानी में कुल 675 झुग्गी-झोपड़ी क्लस्टर हैं. इनमें से 376 क्लस्टर केंद्र और दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) की जमीन पर हैं. जबकि 299 जेजे क्लस्टर दिल्ली सरकार और DUSIB के दायरे में हैं. साल 2015 की पुरानी नीति के जटिल नियमों में अड़चनों के बाद नई नीति लाई गई है.
17 जेजे क्लस्टर में 4870 झुग्गियां
सीलमपुर (उत्तर-पूर्वी दिल्ली) के चार क्लस्टर में 1243 झुग्गियां हैं. ब्रह्मपुरी रोड क्लस्टर 24,900 वर्ग मीटर में फैला होने के साथ सबसे बड़ा क्लस्टर है, जहां 305 झुग्गियां हैं. ब्लॉक-जी गुरुद्वारा पार्क, पुश्ता ईआईजे ब्लॉक और सीपीजे-ब्लॉक में भी ऐसी झुग्गी बस्ती हैं. सुल्तानपुरी (उत्तर-पश्चिमी दिल्ली) की बात करें तो यहां 9 क्लस्टर हैं, जिनमें 1997 बस्ती हैं. लेबर कॉलोनी सुल्तानपुरी, एफ-7, ई-6 ब्लॉक, डी-1 मच्छी चौक, एफ-ब्लॉक मंगोलपुरी, जी-ब्लॉक, के-ब्लॉक, एल-ब्लॉक और डी-4 ब्लॉक में भी झुग्गी झोपड़ी हैं. लाजपत नगर (दक्षिण दिल्ली) की बात करें तो 4 बस्ती हैं, जिसमें 1630 झोपड़ी हैं. जल विहार रेलवे लाइन, इंदिरा गांधी कैंप नंबर-1, विजय कैंप हाउसिंग फैक्ट्री और इंदिरा गांधी कैंप नंबर-2 इसमें आता है.
चार महीने में रिपोर्ट तैयार होगी
दिल्ली अर्बन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड (DUSIB) ने इस परियोजना की फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार करने के लिए कवायद भी शुरू कर दी है. निजी एजेंसी जमीन के कुल एरिया, फ्लोर एरिया रेश्यो, पार्क, सीवेज सिस्टम, पार्किंग तक पूरे इलाके का सटीक आकलन करेगी. कुल खर्च का आकलन कर लेआउट प्लान तैयार होगा और फिर टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी.
A Gazette notification published in the Delhi Gazette (Extraordinary), notifies the ‘Delhi Slum and Jhuggi-Jhopri Rehabilitation and Resettlement Policy, 2026' through the Delhi Government's Urban Development Department, by the Lieutenant Governor of the National Capital Territory of Delhi.
— Press Trust of India (@PTI_News) November 4, 2026
कठपुतली कॉलोनी और कालकाजी मॉडल
दिल्ली में इन-सीटू स्लम रीडेवलपमेंट मॉडल यानी जहां झुग्गी झोपड़ी है, वहीं पक्का मकान देने की नीति लागू की जाएगी. दिल्ली में कालकाजी और कठपुतली कालोनी जैसी परियोजनाओं में ऐसा हो चुका है. कालकाजी परियोजना में भूमिहीन कैंप और नवजीवन कैंप के बाशिंदों को आधुनिक फ्लैट मिले हैं. कठपुतली कॉलोनी के शादीपुर में दिल्ली के पहले ऐसे पीपीपी मॉडल पर टावर बने थे.जेलर वाला बाग की अशोक विहार परियोजना में झुग्गीवासियों को बहुमंजिला फ्लैट आवंटित हुए हैं.
पात्रों का चयन और सत्यापन
झुग्गी झोपड़ी बस्ती की पुनर्वास योजना में पात्र लोगों की जांच और बायोमेट्रिक, दस्तावेजी सत्यापन होगा. पहले ऐसी कई परियोजनाओं में कट ऑफ डेट और दस्तावेजों की कमी को लेकर विवाद हो चुके हैं. हालांकि सरकार का कहना है कि पूरी प्रक्रिया डिजिटल, पारदर्शी और जन सुनवाई से पूरी होगी, ताकि किसी का भी हक न मारा जाए और प्रोजेक्ट समय पर पूरा हो.
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