दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने संगठित अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए टिल्लू ताजपुरिया, कौशल चौधरी और गुरविंदर बाबा गैंग से जुड़े तीन सक्रिय शूटरों को गिरफ्तार किया है. पुलिस के अनुसार आरोपी विदेश में बैठे गैंगस्टर गुरविंदर उर्फ बाबा के निर्देश पर रंगदारी वसूली और फायरिंग जैसी वारदातों को अंजाम देने की तैयारी कर रहे थे. गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हेमंत उर्फ मोनू, नयन अग्रवाल और दुर्गेश राय उर्फ डेविल के रूप में हुई है. इनके कब्जे से दो सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल और 11 जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं. पुलिस अब गैंग के अन्य सदस्यों और नेटवर्क की जांच में जुटी है.
2 सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल और 11 जिंदा कारतूस बरामद
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की साउथ-वेस्टर्न रेंज ने कुख्यात टिल्लू ताजपुरिया-कौशल चौधरी-गुरविंदर बाबा गैंग के तीन शूटरों को गिरफ्तार किया है. पुलिस के मुताबिक, इनकी गिरफ्तारी से रंगदारी के लिए की जाने वाली फायरिंग की कई कोशिशों को नाकाम किया गया है. आरोपियों के कब्जे से 2 सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल और 11 जिंदा कारतूस बरामद हुए हैं.

Delhi Police Special Cell: दिल्ली स्पेशल सेल ने टिल्लू-कौशल गैंग के 3 शूटर दबोचे
30 जुलाई 2026 को गैंगस्टर दिनेश कराला के करीबी हरिश माथुर की हत्या के बाद इस गैंग का नाम चर्चा में आया था. इसके बाद स्पेशल सेल की टीम दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय गैंग के सदस्यों और शूटरों पर लगातार नजर रख रही थी. पुलिस ने करीब 10 दिनों तक ह्यूमन इंटेलिजेंस के जरिए जानकारी जुटाई.
पश्चिम विहार से दबोचे गए दो आरोपी, चंडीगढ़ में रंगदारी के लिए फायरिंग की थी तैयारी
2 अगस्त को पुलिस को सूचना मिली कि गैंग के दो सक्रिय शूटर पश्चिम विहार इलाके में मौजूद हैं. इसके बाद स्पेशल सेल की टीम ने जिला पार्क के पास जाल बिछाकर हेमंत उर्फ मोनू और नयन अग्रवाल को गिरफ्तार कर लिया. उनके पास से एक सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल और 8 जिंदा कारतूस बरामद किए गए.
पुलिस के अनुसार, मई में ही दोनों आरोपी चंडीगढ़ के दो सैलून पर रंगदारी के लिए फायरिंग करने पहुंचे थे, लेकिन वारदात को अंजाम नहीं दे सके. इसके बाद दोनों दोबारा फायरिंग की तैयारी कर रहे थे, तभी पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया.
तीसरा आरोपी दुर्गेश उर्फ डेविल भी गिरफ्तार
8 अगस्त को स्पेशल सेल ने गैंग के एक अन्य सदस्य दुर्गेश राय उर्फ डेविल को भी गिरफ्तार कर लिया. पुलिस के मुताबिक, दुर्गेश ने गुरविंदर बाबा के कहने पर हरियाणा के करनाल में खेतों के बीच बने एक मकान पर फायरिंग की थी. दुर्गेश पहले से ही अपहरण और लूट के मामलों में आरोपी रह चुका है. पुलिस का कहना है कि वह सोशल मीडिया पर हथियारों के साथ रील बनाकर इलाके में दहशत फैलाने की कोशिश करता था.
दुर्गेश ने क्यों रखा 'डेविल' नाम?
पुलिस के मुताबिक दुर्गेश राय ने खुद को खौफनाक छवि देने के लिए 'डेविल' नाम अपनाया था. वह सोशल मीडिया पर हथियारों के साथ वीडियो और रील पोस्ट कर खुद को गैंगस्टर और माफिया के तौर पर पेश करता था. उसके खिलाफ राजस्थान में अपहरण और लूट का मामला भी दर्ज है.
कौन है हेमंत उर्फ मोनू?
पुलिस के अनुसार हेमंत ने 12वीं तक पढ़ाई की है. जल्दी पैसा कमाने की चाह में वह अपराध की दुनिया में पहुंच गया. वह पहले भी एक रेस्टोरेंट मालिक पर फायरिंग के मामले में आरोपी रह चुका है. जांच में सामने आया है कि हेमंत गैंग के लिए हथियारों की व्यवस्था, पैसों की सप्लाई और अन्य लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाता था.
पहली बार अपराध में सामने आया नयन
नयन अग्रवाल का नाम पहली बार किसी आपराधिक मामले में सामने आया है. पुलिस के अनुसार वह हेमंत उर्फ मोनू के संपर्क में आने के बाद गैंग से जुड़ा था और धीरे-धीरे गैंग की गतिविधियों में शामिल हो गया.
पुलिस ने कहा- जांच जारी
स्पेशल सेल के अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ की जा रही है. साथ ही गैंग से जुड़े अन्य सदस्यों, हथियार सप्लाई नेटवर्क और रंगदारी के पूरे तंत्र की जांच जारी है. पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ से गैंग की गतिविधियों और उसके विदेशी कनेक्शन से जुड़ी कई अहम जानकारियां सामने आ सकती हैं.
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