- एअर इंडिया की फुकेट से दिल्ली आ रही फ्लाइट में कंट्रोल सर्फेसेज ने काम करना बंद कर दिया था
- हाइड्रोलिक सिस्टम फेल होने से एलिवेटर, एलरॉन और स्पॉइलर बिना पायलट कमांड के हिलने लगे थे
- खराबी की वजह से ऑटो-पायलट बंद हो गया और को-पायलट विमान का नोज नीचे करने की कोशिश करने लगा
फुकेट से दिल्ली आ रही एअर इंडिया की फ्लाइट आखिर 250 फीट नीचे कैसे आई, इतना भयानक टर्बुलेंस आखिर हुआ कैसे? इसकी जांच लगातार चल रही है.पायलट के गांजा के नशे में होने की बात सामने आई है. लेकिन कुछ ऐसी जानकारी सामने आई है, जिससे सिर्फ पायलट के नशे में होने की वजह से फ्लाइट में वह स्थिति पैदा हुई, इस पर फिलहाल संशय बना हुआ है.जेट में टेक्निकल खराबी की बात जांच में पता चली है. जांच रिपोर्ट के मुताबिक, प्लेन के पूरे कंट्रोल सर्फेसेज ने 4 सेकेंड के लिए पूरी तरह से काम करना बंद कर दिया था. इसी वजह से भयानक टर्बुलेंस की स्थिति पैदा हुई थी.
जेट का कंट्रोल सर्फेज 4 सेकेंड के लिए हुआ फेल
एयरबस ने डिजिटल फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर यानी कि ब्लैक बॉक्स की शुरुआती जांच में बड़ा खुलासा किया है. पता चला है कि एलिवेटर और एलरॉन समेत पूरे कंट्रोल सर्फेसेज ने 4 सेकंड के लिए एक साथ पूरी तरह से काम करना बंद कर दिया था.इसी हाइड्रोलिक फेलियर की वजह से स्पॉइलर भी काम नहीं कर रहा था. जेट के तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम में कई तरह की खराबी आने की वजह से उन 4 सेकंड के दौरान A-320 NEO के एलिवेटर और एलरॉन बिना पायलट कमांड के ही अपने आप हिलने लगे. फ्लाइट ऑपरेशन में इस तरह की घटना पहले कभी नहीं देखी गई.
विमान में हुआ क्या था, जानें
फ्लाइट कंट्रोल सर्फेसेज के ऑपरेशन के लिए हाइड्रोलिक्स बहुत अहम होते हैं. इनमें एलिवेटर से जेट के आगे के हिस्से को ऊपर या नीचे किया जाता है. वहीं एलरॉन विंगटिप को झुकाकर विमान को लेफ्ट-राइट घुमाने का काम करता है. वहीं स्पॉइलर लिफ्ट को कम कर ड्रैग बढ़ाता है, ताकि विमान नीचे उतर सके या स्पीड धीमी हो सके, इसमें लैंडिंग के समय ब्रेक लगाना भी शामिल है.
हाइड्रोलिक सिस्टम में खराबी आते ही एयरलाइनर का ऑटो-पायलट सिस्टम बंद हो गया. जेट उड़ा रहे को-पायलट ने अपना कंट्रोल-स्टिक आगे की ओर पुश किया. माना जा रहा है कि कॉकपिट में विमान के सिस्टम ने 'स्टॉल' की चेतावनी दी थी.'स्टॉल' क्या होता है ये भी जान लीजिए.
जेट के विंग्स ऊपर की ओर नहीं उड़ पा रहे थे
स्टॉल वह खतरनाक स्थिति होती है, जब विमान के विंग्स उसे उड़ाना जारी रखने के लिए जरूरी लिफ्ट यानी ऊपर की ओर प्रेशर पैदा करना बंद कर देते है.जेट उड़ा रहे को-पायलट को डर था कि उसका जेट पर से कंट्रोल न छूट जाए. इयी सोचकर उसने जेट के नोज वाले हिस्से को नीचे लाने के लिए अपना साइड-स्टिक आगे पुश किया. बता दें कि संभावित स्टॉल की स्थिति में यह एक सामान्य प्रक्रिया है.
हाइड्रोलिक पावर न होने के की वजह से उसके साइड-स्टिक के इनपुट का जेट के अगले हिस्से को नीचे लाने पर कोई असर नहीं हुआ, जब तक कि कुछ ही सेकंड में तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम ठीक होने हो गए.हालांकि इससे विमान पर कंट्रोल तो वापस मिल गया, लेकिन उसका नोट वाला हिस्सा तेजी से नीचे की ओर झुकने लगा.इसी वजह से तेज टर्बुलेंस की स्थिति पैदा हुई और यात्री और केबिन क्रू झटके के ऊपर की ओर उछले और उनको चोट लग गई.
एयरबस के सपोर्ट सेंटर को भेजा गया था डेटा
NDTV को मिली जानकारी के मुताबिक, एअर इंडिया के 7 साल से ज्यादा पुराने A-320 NEO विमान का डेटा एयरबस के परमानेंट सपोर्ट सेंटर - AIRTAC को भेजा गया था. यह सेंटर फ्रांस के टूलूज में है. हालांकि कुछ डेटा ACARS नाम के सिस्टम के जरिए इलेक्ट्रॉनिक रूप से एयरबस को भेजा गया होगा, लेकिन संभावना जताई जा रही है कि जेट के लैंड करने के बाद एयरलाइन ने डिजिटल फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर से पूरा डेटा डाउनलोड किया और उसे तुरंत एनालिसिस के लिए भेजा.
इस रिपोर्ट की शुरुआती जानकारी वाली एयरबस की फाइल, ऊपर बताई गई कंट्रोल खोने की घटना के करीब 15-16 घंटे बाद, यानी 5 अगस्त की मिड नइट के ठीक बाद एयर इंडिया को वापस भेज दी गई थी. एयरबस ने अपनी शुरुआती रिपोर्ट में AI-2379 की इमरजेंसी को प्रेशर सेंसर (एक खास हाइड्रोलिक प्रेशर स्विच) में खराबी की बात कही. हालांकि फ्लाइट की दिक्कत की असल वजह पता नहीं चल सकी. एयरबस ने कोई अंतिम सुझाव भी नहीं दिए.
फ्रांस के एक्सपर्ट दिल्ली में कर रहे हैं जांच
तब से ही एयरबस और फ्रांस की जांच एजेंसी BEA के एक्सपर्ट नई दिल्ली पहुंचे हुए हैं. उन्होंने गुरुवार को विमान की जांच की. NDTV को पता चला है कि विमान और उसके सिस्टम की शुरुआती फिजिकल जांच से मिली नई जानकारी भारत की AAIB (एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो) को भेज दी गई है. ये इस जांच की देखरेख करने वाली मुख्य एजेंसी है.
पायलट के नशे में होने के अलावा टेक्निकल खराबी की भी बात
अभी तक ऐसी कोई बात पता नहीं चली है, जिससे ये साफ हो सके कि फुकेट- दिल्ली फ्लाइट में जो भी हुआ उसका संबंध फ्लाइट के पायलट कैप्टन सुदीप वशिष्ठ के व्यवहार से है. हालांकि उनके नशे में होने वाली बात की भी जांच चल रही है. फ्लाइट के उतरने के बाद पायलट के दो यूरिन टेस्ट सैंपल लिए गए थे, जिनमें उनके नशे में होने की बात सामने आी है. उनके शरीर में मारिजुआना नाम का गांजा पाया गया. जानकारी के मुताबिक, फ्लाइट में मौजूद केबिन क्रू के एक सदस्य ने ये शिकायत की थी कि पायलट ने पहले मारिजुआना का सेवन किया था.
कैप्टन वशिष्ठ नशा टेस्ट में पॉजिटिव पाए जाने के बाद, एअर इंडिया ने एअर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस के सभी पायलटों को जरूरी टेस्ट कराने का आदेश दिया है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसके ब्लड में कोई प्रतिबंधित पदार्थ या दवा तो नहीं है.
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