देश के रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में हड़कंप मचाने वाले 136.40 करोड़ के फर्जी बैंक गारंटी घोटाले में दिल्ली पुलिस को बड़ी सफलता मिली है. दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में लंबे समय से फरार चल रहे और अदालत की तरफ घोषित भगोड़े आरोपी शिवशंकर दास को बिहार के पटना से गिरफ्तार किया है. आरोपी को दिल्ली लाकर पूछताछ की गई और फिलहाल उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. बताया जा रहा है कि वह लगातार ठिकाने बदल रहा था. जिसके चलते उसे पकड़ने में देरी हो रही थी. लेकिन बिहार के पटना में सटीक लोकेशन मिलते ही उसे दबोच लिया गया.
दिल्ली पुलिस ने 2025 में दर्ज किया था मामला
दिल्ली पुलिस के मुताबिक यह मामला 24 जून 2025 को EOW थाने में दर्ज किया गया था. शिकायत सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SECI) के मैनेजर बिबलेश मीणा ने दी थी. SECI नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अधीन एक सार्वजनिक उपक्रम है, जो देश में सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर टेंडर जारी करता है. जांच में सामने आया कि रिलायंस पॉवर लिमिटेड की सहयोगी कंपनी रिलायंस एनयूवेस लिमिटेड ने SECI के एक टेंडर में भाग लेने के दौरान 68.20 करोड़ रुपये की दो बैंक गारंटी जमा की थीं. इन दोनों बैंक गारंटी की कुल कीमत 136.40 करोड़ रुपये थी. दस्तावेजों में दावा किया गया था कि ये बैंक गारंटी मलेशिया के ACE Investment Bank और फिलीपीस के FirstRand Bank Ltd. की तरफ से जारी की गई हैं.
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कैसे हुआ फर्जीवाडे़ का खुलासा
पुलिस के अनुसार इन बैंक गारंटी को असली साबित करने के लिए भारतीय स्टेट बैंक के नाम पर फर्जी एंडोर्समेंट लेटर, नकली SFMS कन्फर्मेशन और फर्जी ईमेल का इस्तेमाल किया गया. बाद में जब इन दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया तो SBI ने साफ कर दिया कि उसने ऐसा कोई प्रमाणन जारी ही नहीं किया था. इसके बाद पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ था. जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि इस साजिश में कई लोग शामिल थे. आरोप है कि रिलायंस पॉवर लिमिटेड के तत्कालीन CFO अशोक कुमार पाल समेत अन्य आरोपियों ने कथित तौर पर बिचौलियों के जरिए फर्जी बैंक गारंटी तैयार करवाई और इसके लिए मोटी रकम का भुगतान किया. इसी साजिश में शिव शंकर दास की भूमिका बेहद अहम बताई गई है.
शिवशंकर दास ने रची थी प्लानिंग
EOW की जांच के मुताबिक शिव शंकर दास ने अपने साथियों के साथ मिलकर फर्जी बैंक गारंटी, नकली SBI एंडोर्समेंट लेटर, फर्जी सील, स्टांप और लेटरहेड तैयार करवाए. इतना ही नहीं उसने SBI के नाम से एक फर्जी ईमेल आईडी भी बनाई, जिसके जरिए SECI और संबंधित अधिकारियों को नकली पुष्टि भेजी गई ताकि बैंक गारंटी असली दिखाई दे.आर्थिक जांच में यह भी सामने आया कि इस पूरे फर्जीवाड़े में अपनी भूमिका निभाने के बदले शिव शंकर दास को करीब 1.44 करोड़ रुपये मिले थे. मामला दर्ज होने के बाद वह लगातार ठिकाने बदलकर पुलिस से बचता रहा. कई बार नोटिस और दबिश के बावजूद गिरफ्तारी नहीं होने पर दिल्ली की साकेत कोर्ट ने उसे भगोड़ा अपराधी घोषित कर दिया.
पश्चिम बंगाल का रहने वाला है शिवशंकर दास
पुलिस ने पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर, कोलकाता, आसनसोल और महाराष्ट्र के मुंबई सहित कई जगहों पर दबिश दी. आखिरकार लगातार निगरानी के बाद 27 जुलाई 2026 को आरोपी को पटना बिहार से गिरफ्तार कर लिया गया.दिल्ली पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपी शिव शंकर दास पश्चिम बंगाल के कोलकाता का रहने वाला है और उसने 12वीं तक पढ़ाई की है. पुलिस का कहना है कि फर्जी बैंक गारंटी को असली दिखाने की पूरी साजिश में उसकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण थी. उसने नकली SBI दस्तावेज, फर्जी SFMS कन्फर्मेशन और फर्जी ईमेल के जरिए करोड़ों रुपये की बैंक गारंटी को वैध दिखाने की कोशिश की.दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा अब इस मामले में पूरे वित्तीय नेटवर्क, फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले अन्य लोगों और इस साजिश में शामिल सभी आरोपियों की भूमिका की जांच आगे बढ़ा रही है.
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