- जंतर-मंतर पर 'कॉकरोट जनता पार्टी' के प्रदर्शन के बाद दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया कंटेंट की जांच तेज की.
- पुलिस ने 180 से ज्यादा सोशल मीडिया हैंडल्स को जांच के दायरे में लिया है.
- फेसबुक, इंस्टाग्राम, X और YouTube को फर्जी और भ्रामक पोस्ट-वीडियो हटाने के लिए नोटिस भेजे गए.
दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोट जनता पार्टी के प्रदर्शन और 'संसद मार्च' के दौरान हुए घटनाक्रम के बाद अब दिल्ली पुलिस की जांच का एक बड़ा फोकस सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी है. पुलिस ने प्रदर्शन से जुड़े वीडियो, पोस्ट, कमेंट, लाइव स्ट्रीम और दूसरे डिजिटल कंटेंट की जांच तेज कर दी है. यह जांच खास तौर पर ऐसे कंटेंट पर की जा रही है, जिनके जरिए कथित तौर पर भ्रामक जानकारी, आपत्तिजनक सामग्री या हिंसा से जुड़े चुनिंदा वीडियो प्रसारित किए गए. सूत्रों के मुताबिक, पुलिस की नजर केवल प्रदर्शन में मौजूद लोगों तक सीमित नहीं है. इस जांच में उन यूट्यूबर्स, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स की भूमिका भी खंगाली जा रही है, जिन्होंने प्रदर्शन के दौरान या उसके बाद लगातार वीडियो और पोस्ट सर्कुलेट किए.
यूट्यूबर्स की भूमिका की जांच
जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि किन कंटेंट क्रिएटर्स ने मौके से वीडियो बनाए, किस तरह के दावे किए और क्या किसी वीडियो को एडिट करके ऐसा नैरेटिव बनाने की कोशिश की गई, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति और ज्यादा तनावपूर्ण हो सकती थी.
पुलिस यह भी देख रही है कि किसी वीडियो का ओरिजिनल फुटेज क्या था और सोशल मीडिया पर वायरल होने से पहले उसमें कोई एडिटिंग, कटिंग या संदर्भ से बाहर इस्तेमाल तो नहीं किया गया.
सीजेपी के शुरुआती प्रदर्शनों में भी बड़ी तादाद में यूट्यूबर्स और इन्फ्लुएंसर्स की मौजूदगी देखी गई थी. सूत्रो के मुताबिक, कई कंटेंट क्रिएटर्स प्रोटेस्ट साइट पर अपने-अपने एजेंडे और कंटेंट के लिए पहुंचे थे.
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जांच के दायरे में 180 से ज्यादा सोशल मीडिया हैंडल
पुलिस ने प्रोटेस्ट से संबंधित सोशल मीडिया गतिविधियों की समीक्षा करते हुए करीब 180 अतिरिक्त सोशल मीडिया हैंडल को कथित तौर पर जांच के दायरे में लिया है. इनमें ऐसे अकाउंट शामिल बताए जा रहे हैं, जिनसे प्रदर्शन के दौरान या उसके बाद कथित तौर पर भ्रामक जानकारी या आपत्तिजनक कंटेंट सर्कुलेट किया गया.
फेसबुक, इंस्टाग्राम, X और YouTube से भी कंटेंट हटाने को कहा
दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को प्रदर्शन से संबंधित कथित तौर पर फर्जी, भ्रामक और आपत्तिजनक पोस्ट, वीडियो हटाने के लिए नोटिस दिए हैं. पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान और उसके बाद बड़ी तादाद में फर्जी पोस्ट, छेड़छाड़ किए गए वीडियो और भ्रामक सामग्री सोशल मीडिया पर प्रसारित की गई. पुलिस ने फेसबुक, इंस्टाग्राम, X और YouTube जैसे प्लेटफॉर्म्स को ऐसे कंटेंट पर कार्रवाई के लिए कहा है.
जांच में सोशल मीडिया आधारित कुछ न्यूज पोर्टल्स और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की भूमिका भी देखे जाने की बात सामने आई है. इन्फ्लुएंसर्स के बाद जांच का दायरा सोशल मीडिया मैनेजमेंट कंपनियों तक पहुंचा है. जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि क्या कुछ सोशल मीडिया अकाउंट्स को संगठित तरीके से ऑपरेट किया जा रहा था.
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सूत्रों के हवाले से यह भी चर्चा है कि पुलिस की नजर कुछ प्राइवेट सोशल मीडिया मैनेजमेंट/डिजिटल मार्केटिंग कंपनियों तक जा सकती है. ऐसी कंपनियों की भूमिका की जांच होने पर पुलिस यह देख सकती है कि क्या उन्होंने किसी शख्स, ऑर्गनाइजेशन या कैंपेन के लिए कंटेंट तैयार करने, उसे कई प्लेटफॉर्म पर फैलाने, ट्रेंड कराने या डिजिटल नैरेटिव को बढ़ाने में कोई भूमिका निभाई थी.
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