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'मैंने कभी दांत तो कभी हाथ तुड़वाए,' एशियन गेम्स गोल्ड विजेता इशिका चौधरी ने सुनाई संघर्ष की कहानी

भारतीय महिला हॉकी टीम की खिलाड़ी इशिका चौधरी का ग्वालियर पर उनके घर में जोरदार स्वागत हुआ. अब इशिका की निगाहें एलए 2028 ओलंपिक पर हैं.

'मैंने कभी दांत तो कभी हाथ तुड़वाए,' एशियन गेम्स गोल्ड विजेता इशिका चौधरी ने सुनाई संघर्ष की कहानी
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X (formerly Twitter)

भारतीय महिला हॉकी टीम ने एशियन गेम्स 2026 में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया. टीम की इस शानदार जीत के बाद इशिका चौधरी का ग्वालियर पर उनके घर में जोरदार स्वागत हुआ. अब इशिका की निगाहें एलए 2028 ओलंपिक पर हैं.  इशिका चौधरी ने कहा, 'हमें गोल्ड मेडल जीतने पर बेहद खुशी है. इतिहास का हिस्सा बनना और उसके लिए मेहनत करना. इससे बहुत खुशी हो रही है. उससे ज्यादा खुशी एलए ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने पर है. अब हमारे पास ओलंपिक की तैयारी के लिए समय है. अब एक-डेढ़ साल जितने भी टूर्नामेंट रहेंगे ओलंपिक को मद्देनजर रखते हुए खेले जाएंगे.'

'मैंने कभी दांत तुड़वाए कभी हाथ तुड़वाए'

इशिका ने अपने करियर में काफी उतार-चढ़ाव को देखा है. उन्होंने कहा, 'इंजरी होती रहती हैं. मैंने कभी दांत तुड़वाए, तो कभी हाथ तुड़वाए. करियर में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन मुझे सपोर्ट और प्रेरणा मिलती रही है. सपने को पूरा करने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ती है. मुझे हमेशा से परिवार का सपोर्ट मिला है. ऐसा नहीं रहा कि उन्होंने कभी मुझे खेलने से मना किया. ग्वालियर में बहुत बड़ी वर्ल्ड क्लास एकेडमी है. जितने भी अपने-अपने डोमेस्टिक से, ग्वालियर के दर्पण हॉकी स्टेडियम से बच्चे निकलते हैं, उनकी कोशिश जूनियर कैंप में और फिर सीनियर कैंप में जाने की होती है. ये एक बहुत अच्छा सेटअप है. ग्वालियर में हॉकी के लिए बहुत सपोर्ट रहा है.'

इशिका के कोच ने कहा कि यह सिर्फ ग्वालियर ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व और खुशी का पल है. एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने के बाद जब इशिका ग्वालियर लौटीं तो एयरपोर्ट पर उनका भव्य स्वागत किया गया. एकेडमी के बच्चे, रिश्तेदार, स्टाफ और खेल विभाग के अधिकारी उन्हें बधाई देने पहुंचे. कोच ने बताया कि 26 साल के अपने करियर में यह उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि है. उनकी शिष्या इशिका ने गोल्ड मेडल जीतकर उन्हें और पूरे देश को गौरवान्वित किया है. उन्होंने कहा कि उनकी एकेडमी से कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी निकले हैं और कई खिलाड़ियों को खेल कोटे से नौकरी भी मिली है.

कोच ने कहा कि ग्वालियर में हॉकी का भविष्य बहुत उज्ज्वल है. यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई एस्ट्रोटर्फ मैदान हैं, जिससे खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं. उन्होंने खेलों को बढ़ावा देने के लिए सिंधिया परिवार के सहयोग की भी सराहना की.

पिता ने बेटी की उपलब्धि पर गर्व जताते हुए कहा, "हमें उन पर काफी गर्व है. उन्हें ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बधाई दी है. सभी ने ढोल-नगाड़ों के साथ मिठाई बांटी है. फूल-मालाओं से स्वागत किया है.' वहीं, इशिका की मां ने कहा कि उनकी बेटी के गोल्ड मेडल जीतने और ओलंपिक का टिकट हासिल करने से परिवार बेहद खुश है. घर लौटने पर रिश्तेदारों और शुभचिंतकों ने उनका जोरदार स्वागत किया.

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