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कानपुर, नोएडा, दिल्ली, पुणे... देश के 5 सबसे चर्चित लग्जरी कार हादसे, रसूखदार आरोपियों को क्या मिली सजा?

भारत में लापरवाही से गाड़ी चलाने के मामले में नियम भले ही सख्त हों, लेकिन रसूखदार परिवारों के रईसजादों का महंगी कारों से हिट एंड रन के मामलों में कमी नहीं आई है. अभी कानपुर की घटना इसका ताजा उदाहरण है, लेकिन इससे पहले दिल्ली, पुणे, नोएडा से भी ऐसी कई चर्चित कहानियां सामने आ चुकी है. इन केसों का स्टेटस क्या है, जानें इस खास रिपोर्ट में.

कानपुर, नोएडा, दिल्ली, पुणे... देश के 5 सबसे चर्चित लग्जरी कार हादसे, रसूखदार आरोपियों को क्या मिली सजा?
सड़क पर करोड़ों की गाड़ी से रसूखदार परिवार के रईसजादों के हादसों की कहानी.
  • कानपुर में कारोबारी KK मिश्रा के बेटे शिवम की लैंबोर्गिनी कार ने कई वाहनों को टक्कर मारी, 6 लोग घायल हुए.
  • 1999 में दिल्ली में संजीव नंदा की BMW कार दुर्घटना में छह लोगों की मौत हुई और बाद में सजा घटाई गई.
  • नोएडा में 2025 में लैम्बोर्गिनी ने फुटपाथ पर दो लोगों को टक्कर मारी, चालक को अगले दिन जमानत मिल गई.
नई दिल्ली:

5 Luxury Car Crashes Case: करोड़ों की गाड़ी, परिवार का ऊंचा रसूख और सड़क पर खौफनाक हादसे... यूं तो भारत में हर रोज सड़क हादसों में हजारों लोगों की मौत होती है. लेकिन कोई हादसा तब बहुत चर्चित हो जाता है, उसमें सवार रसूखदार को बचाने की कोशिशें तेज हो जाती है. हादसे के पीड़ित का दर्द या तो दब जाता है या फिर किसी लालच में आकर मैनेज हो जाता है. इन दिनों कानपुर में तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा के बेटे शिवम मिश्रा के लैंबोर्गिनी हादसे की चर्चा सुर्खियों में है. 8 फरवरी को कानपुर में दिनदहाड़े इस हादसे की कई तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं. लेकिन अब ऐसे-ऐसे तथ्य सामने आ रहे हैं, जिससे आशंका है कि कोर्ट-कचहरी में यह मामला ज्यादा दिनों तक नहीं टिकेगा. अब तो आरोपी के वकील तक ने कह दिया है कि पीड़ित कोई कार्रवाई नहीं चाहता है. कानपुर से पहले भी भारत में ऐसे कई हाईप्रोफाइल हादसे हुए हैं, जब ये हादसे हुए तब कई दिनों तक इसकी चर्चा चलती रही लेकिन आगे चल कर क्या कुछ हुआ, इसके बारे में शायद ही किसी को पता हो. 

आज आपको कानपुर लैंबोर्गिनी हादसे जैसे देश के अन्य चर्चित हादसों की कहानी की याद दिला रहे हैं. साथ ही यह भी बता रहे हैं कि उन हादसों में क्या कुछ हुआ?

1999 का मशहूर BMW कांडः पूर्व नेवी चीफ के पोते ने BMW से 6 लोगों रौंदा

दिल्ली में 10 जनवरी 1999 को एक तेज रफ्तार से दौड़ रही BMW कार ने 6 लोगों को रौंदकर मार डाला. मृतकों में तीन पुलिस अधिकारी भी शामिल थे. बाद में जानकारी मिलती है कि कार को मशहूर हथियार डीलर सुरेश नंदा का बेटा और पूर्व नौसेना चीफ का पोता संजीव नंदा चला रहा था. इस दुघर्टना में 7 लोग चपेट में आ गए, जिसमें 6 लोगों की मौत हो गई. दुर्घटना के बाद संजीव नंदा वहां से फरार हो गया. इसके बाद कार को पूरी तरह धो दिया गया ताकि सबूतों को नष्ट किया जा सके. इस मामले में सह आरोपी राजीव गुप्ता और अन्य कई गवाह अपने बयानों से मुकर गए. 

2008 में ट्रायल कोर्ट ने संजीव नंदा को आईपीसी के सेक्शन 304 (II) के तहत 5 साल की जेल सश्रम कारावास की सजा सुनाई. बाकी अन्य आरोपियों को सबूत मिटाने के आरोप में सजा सुनाई गई. इस सजा के खिलाफ की गई अपील में 2009 में दिल्ली हाईकोर्ट ने आईपीसी के सेक्शन 304 (II) की सजा को घटाकर दो साल की सश्रम कारावास में बदल दिया. 

2012 में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के दोषी मानने के फैसले को बरकरार रखा लेकिन सजा को घटाकर 2 साल कर दिया. इससे संजीव नंदा फिर से जेल जाने से बच गया. कोर्ट ने संजीव नंदा को 50 लाख रुपये भारत सरकार के पास जमा कराने को कहा ताकि इस दुर्घटना में मारे गए परिजनों को मुआवजा मिल सके. इसके अलावा कोर्ट ने संजीव नंदा को कम्युनिटी सर्विस करने का भी आदेश दिया. जॉली एलएलबी फिल्म इसी हादसे से प्रेरित बताई जाती है. 

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2025 का नोएडा लैम्बोर्गिनी हादसा: चालक को एक ही दिन में मिल गई बेल 

30 मार्च 2025 को लाल रंग की लैम्बोर्गिनी कार ने नोएडा सेक्टर 94 में बन रहे एक कॉम्प्लेक्स के पास एक फुटपाथ पर लाल रंग की लैम्बोर्गिनी कार ने दो लोगों को टक्कर मार दी. वायरल वीडियो में दिखता है कि लाल कलर की एक स्पोर्ट्स कार फुटपाथ पर दिख रही है. वहां कामगार सेफ्टी हेलमेट और ऑरेंज कलर का जैकेट पहने कार की तरफ दौड़ रहे थे. उन्होंने कार का दरवाजा खोला. एक आदमी ड्राइवर को बोलते दिख रहा है, स्टंट ज्यादा सीख लिए हो? तुमको मालूम है यहां कितने लोग मरे हैं? तभी कार चला रहे चालक ने उसके सवाल का जवाब देते हुए पूचा, कोई मर गया है इधर? 

बाद में ड्राइवर ने दावा किया कि वह कार की टेस्ट ड्राइव ले रहा था. उसने कहा कि उसने गलती से कार का एक्सलेटर दबा दिया. इस दुर्घटना में घायल वर्कर को तुरंत पास के अस्पताल में इलाज के लिए ले जाया गया. जहां वो खतरे से बाहर बताया गया. 31 मार्च 2025 को इस घटना के ठीक एक दिन बाद आरोपी दीपक को जमानत मिल गई. नोएडा जिला अदालत ने उसे जमानत दे दी. 

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मिहिर शाह BMW हिट एंड रन केस: विधायक के बेटे ने BMW से मारी थी टक्कर

शिवसेना (शिंदे गुट) नेता के बेटे मिहिर शाह (24) ने अपनी BMW कार से मुंबई के वर्ली इलाके में दोपहिया सवार को टक्कर मार दी थी. इस घटना में कावेरी नखवा (45) की मौत हो गई जबकि उनके पति प्रदीप नखवा घायल हो गए. घटना के दो दिन बाद 9 जुलाई 2024 को शिवसेना नेता के बेटे को गिरफ्तार किया गया था. अभियोग पक्ष ने आरोप लगाया कि घटना के बाद मिहिर ने कार नहीं रोकी बल्कि और स्पीड बढ़ाकर बांद्रा-वर्ली सी लिंक की तरफ भागने लगे. इस घटना में महिला कावेरी कार की बोनट पर काफी देर तक रही इसके बाद वो कार के पहिये के नीचे आ गई. 

घटना के वक्त मिहिर शाह का ड्राइवर राजऋषि बिदावत भी कार में मौजूद था उसे घटना वाले दिन ही गिरफ्तार कर लिया गया. अभी इस मामले में मिहिर शाह और उसका ड्राइवर जेल में है. दिसंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने मिहिर शाह की जमानत याचिका को सुनने से इनकार कर दिया था. जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ए जी मसीह की पीठ ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि जिम्मेदारी भी जरूरी होती है. 

मिहिर शाह एक प्रभावशाली परिवार से आते हैं और उनके पिता एकनाथ शिंदे की शिवसेना के साथ जुड़े हैं. इस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस तरह के मामले में सख्त संदेश की जरूरत है. कोर्ट ने कहा कि मिहिर ने मर्सिडीज कार को शेड में पार्क किया. BMW कार बाहर ले गया और इससे एक की हत्या कर भाग गए. उसे कुछ दिन जेल के अंदर रहने दीजिए. इन लड़कों को सख्त सबक देने की जरूरत है. 

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पुणे पोर्शे हादसा: बिल्डर के नाबालिग बेटे ने पोर्शे से दो आईटी प्रोफेशनल को रौंदा

19 मई 2024 को पुणे के कल्याणी नगर इलाके में 17 साल के एक लड़के ने अपने बिल्डर पिता की पोर्शे कार से एक मोटरसाइकिल में टक्कर मार दी. इस हादसे में दो आईटी प्रोफेशनल अनीश अवधिया और अश्विनी खोष्टा मारे गए. हादसे के वक्त कार चला रहा 17 साल का लड़का शराब के नशे में था. दुर्घटना के कुछ घंटे बाद ही जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (JJB) ने नाबालिग को कुछ नरम शर्तों के साथ जमानत दे दी. जिनमें से एक शर्त यह थी कि वह सड़क दुर्घटनाओं पर 300 शब्दों का निबंध लिखे. इस फैसले के बाद पूरे देश में गुस्सा फैल गया. 

इसके बाद JJB ने नाबालिग की जमानत याचिका खारिज कर दी और उसे ऑब्जर्वेशन होम में भेज दिया. पुलिस ने नाबालिग को व्यस्क मानकर केस चलाने की इजाजत मांगी. केस का दायरा भी बढ़ाया गया और उसके पिता और दादा की भी कथित सबूत मिटाने के आरोप में गिरफ्तारी हुई. इसके अलावा नाबालिग को शराब परोसने वाले बार के मालिक को भी सलाखों के पीछे पहुंचाया गया. 

जांच में पाया गया कि कार में सवार सभी नाबालिगों के माता-पिता ने ब्लड सैंपल बदलने की कोशिश की ताकि ये साबित नहीं हो सके कि उनके बच्चे शराब के नशे में थे. जुलाई 2025 में मुख्य आरोपी बतौर वयस्क ट्रायल से बच गया. क्योंकि JJB ने कहा था कि नाबालिग पर जो आरोप हैं उसमें उसे 7 साल या उससे ज्यादा की जेल नहीं हो सकती है.

नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी की मां शिवानी अग्रवाल को अंतरिम जमानत दे दी. शिवानी कथित तौर पर ब्लड सैंपल बदलने के आरोप में 10 महीने से जेल में थी. 2 फरवरी 2026 सुप्रीम कोर्ट ने ब्लड सैंपल में छेड़छाड़ के तीनो आरोपी आशीष मित्तल, आदित्य सूद और अमर गायकवाड़ को जमानत दे दी. ये तीनों 18 महीने से जेल में बंद थे. 

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कानपुर लैम्बोर्गिनी हादसा, दो दिन बाद भी किसी की गिरफ्तारी नहीं 

कानपुर में 10 करोड़ रुपये की लैम्बोर्गिनी कार को कारोबारी केके मिश्रा के बेटे शिवम मिश्रा कथित तौर पर चला रहा था. कानपुर के ग्लावतोली इलाके में उसकी कार ने कई वाहनों को टक्कर मारी. इस हादसे में 6 लोग घायल हो गए. प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि कार ने पहले एक ऑटो रिक्शा को टक्कर मारी. इसके बाद एक खड़ी मोटरसाइकिल को टक्कर मारी. इसके बाद इसे चला रहे ड्राइवर ने इसे भगाने की कोशिश की लेकिन कार एक इलेक्ट्रिक पोल से टकरा गई. इस घटना के बाद शिवम मिश्रा घटनास्थल से भाग गया. 

उसके निजी सुरक्षाकर्मियों ने शिवम को वहां से लेकर चले गए. बाद में सामने आए सीसीटीवी फुटेज में पता चला कि शिवम के बाउंसर ने उसे ड्राइविंग सीट से बाहर निकाला और उसे लेकर भाग गए. बाद में शिवम मिश्रा के वकीलों ने दावा किया कि कार शिवम नहीं चला रहा था बल्कि उसका ड्राइवर चला रहा था. कानपुर लैम्बोर्गिनी हादसा मामले में पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है. 

शुरुआत में FIR अज्ञात के खिलाफ दर्ज की गई थी लेकिन बाद में इसमें शिवम मिश्रा का नाम भी शामिल कर लिया गया. पुलिस ने लैम्बोर्गिनी को जब्त कर लिया है. CCTV और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों की जांच की जा रही है. पुलिस मामले की जांच में जुटी है.

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नियम सख्त, 10 साल की सजा से लेकर 7 लाख तक के जुर्माने का प्रावधान

लापरवाही से गाड़ी चलाने के मामले में भले ही सख्त नियम हों. लेकिन महंगी कारों और हिट एंड रन के मामलों में कमी नहीं आई है. अक्सर ये घटनाएं हेडलाइंस बनती रही हैं. यही नहीं, कम उम्र में गाड़ी चलाने के मामले, ऐसी महंगी कारों और मशीनों को संभालकर चलाने के हुनर की कमी, खतरनाक दुर्घटना को अंजाम देते हैं और ऐसे लोग सलाखों के पीछे होते हैं. 

भारत का कानून साफ कहता है कि किसी की लापरवाही से गाड़ी चलाने के कारण हुई मौत और इसकी जानकारी नहीं देना आपको 10 साल के लिए जेल में डाल सकता है. 7 लाख रुपये तक का जुर्माना भी लग सकता है. लेकिन बावजूद इसके इस तरह की घटनाओं में कमी नहीं आ रही है. 

यह भी पढ़ें - कानपुर लैंबोर्गिनी केस: आरोपी के वकील ने कहा- पीड़ित नहीं चाहता कोई एक्शन, पिता बोले- घर में कोई नहीं पीता शराब

लेखक के बारे में
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नूपुर डोगरा
Legal Correspondent
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