- कानपुर के लैंबॉर्गिनी हादसे में आरोपी शिवम मिश्रा को गिरफ्तारी के कुछ घंटे बाद जमानत मिल गई
- अगर शिवम तुरंत सरेंडर करता तो उसके खिलाफ केवल लापरवाही से ड्राइविंग का मामला दर्ज होता
- हिट एंड रन में मौत न होने पर गिरफ्तारी नहीं होती, दोषी को छह महीने से तीन साल तक की सजा हो सकती है
कानपुर के हाई-प्रोफाइल लैंबॉर्गिनी हादसे में चार दिन बाद तो आरोपी शिवम मिश्रा की गिरफ्तारी हुई और कुछ ही घंटों बाद उसे जमानत भी मिल गई. गुरुवार को गिरफ्तारी के महज कुछ ही घंटे बाद जमानत मिलना कई सवाल खड़े कर रहा है. जिस तंबाकू कारोबारी के बेटे शिवम मिश्रा को पुलिस पिछले चार दिनों से ढूंढ रही थी उसे आखिर गिरफ्तारी के चंद घंटों बाद जमानत कैसे मिल गई. सवाल ये भी है कि क्या होता अगर आरोपी शिवम पहले ही सरेंडर कर देता?
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शिवम अगर सरें[र करता तो क्या होता?
इस सवाल का जवाब यह है कि शिवम ने अगर तुरंत सरेंडर किया होता तो उसे थाने से बेल मिल जाती. उसके खिलाफ लापरवाही से ड्राइविंग, IPC की धारा 279 के तहत मामला दर्ज होता, जिसमें 6 महीने की कैद या 1000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता था. हिट एंड रन के मामले में अगर मौत नहीं हुई है तो BNS की धाराओं में गिरफ्तारी का प्रावधान नहीं है. इस मामले में दोषी को 6 महीने से 3 साल तक की सजा हो सकती है. हिट एंड रन के मौत वाले मामलों में कड़ी सजा का प्रावधान जरूर है.
हिट-एंड-रन मामले में क्या है सजा का प्रावधान?
हिट-एंड-रन मामले में BNS की धारा 106 में केस दर्ज होता है. इस धारा को दो भागों 106 (1) और 106(2) में बांटा गया है. हादसे के बाद अगर आरोपी भागता नहीं है और मौके पर मौजूद है तो धारा 106(1) यानी गैर-इरादतन हत्या का केस दर्ज होता है. इस धारा में पांच साल की सजा और जुर्माना का प्रावधान है. वहीं हादसे के बाद फरार होने की स्थिति में 106(2) लगाया जाता है. धारा 106 (2) में 10 साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान है.
हिट एंड रन के बाद फरार क्यों होते हैं?
दरअसल ऐसे मामलों में गिरफ़्तार किए जाने का डर होता है. आरोपी को डर होता है कि भीड़ कहीं हिंसक न हो जाए. दरअसल ऐसे मामलों में कानूनी प्रक्रियाओं के प्रति जागरूकता की कमी होती है और ज़िम्मेदारी या नतीजों से बचने की कोशिश होती है इसीलिए आरोपी अक्सर सरेंडर करने के बजाय फरार होने का रास्ता चुनते हैं.
शिवम को बचाने की कितनी कोशिशें?
- अज्ञात नाम से FIR दर्ज की गई और मामले में 24 घंटे बाद शिवम का नाम जोड़ा गया.
- हादसे के बाद आरोपी गायब हो गया, ताकि खून की जांच न हो सके.
- शिवम के अस्पताल में भर्ती होने की बात सामने आई.
- दावा किया गया था कि शिवम कार नहीं चला रहा था.
- कमिश्नर के दावे पर कारोबारी ने कहा कि झूठ बोला जा रहा है.
- ड्राइवर ने अर्जी दाखिल कर कहा कि ड्राइविंग सीट पर वो बैठा था.
- दावा किया गया कि शिवम ड्राइवर की बगल वाली सीट पर बैठा हुआ था
- FIR कराने वाले से समझौते की खबर भी सामने आई थी.
शिवम दिल्ली से कैनपुर कैसे पहुंचा?
सबसे बड़ा सवाल ये भी है कि शिवम अगर दिल्ली में था तो वह कानपुर के अस्पताल में कैसे पहुंचा. ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्यों कि शिवम के परिवार ने उसके दिल्ली में होने का दावा किया था. जबकि पुलिस कह रही है कि उसकी गिरफ्तारी कानपुर के पारस अस्पताल से की गई.
गलती नहीं थी तो क्यों भाग रहा था शिवम?
इस सवाल का जवाब मिलना भी अभी काबी है कि शिवम की अगर इस पूरे मामले में कोई गलती थी ही नहीं तो वह करीब चार दिनों तक पुलिस से क्यों बचता फिर रहा था? वह खुद पुलिस के सामने आया क्यों नहीं. या फिर उसके परिवार ने पुलिस को इस बारे में सही जानकारी को क्यों नहीं दी. शिवम को कानपुर के एक कोर्ट से फिलहाल जमानत मिल चुकी है. देखना ये होगा कि इस मामले में अब आगे क्या होता है.
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