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लड़ाई अमेरिका-इजरायल और ईरान की, जेब कट गई पाकिस्‍तान की!

Pakistan Economical Crisis: एक तरफ मिडिल ईस्ट की आग है, तो दूसरी तरफ अफगानिस्तान के साथ बढ़ता सीमा विवाद. पाकिस्तान ने ‘स्‍पेशल ऑपरेशन' शुरू किया है, जिससे रक्षा बजट पर बोझ बढ़ गया है.

लड़ाई अमेरिका-इजरायल और ईरान की, जेब कट गई पाकिस्‍तान की!
Pakistan Crisis: पाकिस्‍तान की इन दिनों दुर्दशा हो गई है. आर्थिक तौर पर पाकिस्‍तान चौतरफा मार झेल रहा है.
  • पाकिस्तान के शेयर बाजार में भारी गिरावट आई, KSE-100 इंडेक्स 13000 अंक तक लुढ़क गया
  • होर्मुज संकट से कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से पाकिस्तान की ऊर्जा आयात निर्भरता महंगी हो गई है
  • अफगानिस्तान सीमा पर बढ़ते तनाव और घरेलू दंगों के कारण पाकिस्तान की रक्षा बजट पर दबाव बढ़ा है

दुनिया की नजरें इस वक्त मिडिल ईस्ट (Middle East) पर टिकी हैं. मिसाइलें ईरान और इजरायल के बीच चल रही हैं, धमकियां वॉशिंगटन से दी जा रही हैं, लेकिन बड़ी चोट की गूंज पाकिस्‍तान में भी सुनाई दे रही है. असलहे इजरायल और ईरान के खर्च हो रहे हैं, जबकि तिजोरी पाकिस्‍तान की खाली हो रही है. ये जंग पहले से वेंटिलेटर पर चल रही पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए किसी 'डेथ वारंट' की आहट से कम नहीं है.  

पाकिस्‍तानी शेयर बाजार के लिए 'ब्लैक मंडे' 

सोमवार को पाकिस्तान के शेयर बाजार (PSX) में वो मंजर दिखा जो इतिहास में पहले कभी नहीं देखा गया. KSE-100 इंडेक्स 16000 अंक तक गिर गया था और KSE-30 इंडेक्स भी 10% तक हुआ क्रैश हो गया. बाद में स्थिति थोड़ी संभली. डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, KSE-30 इंडेक्स खुलते ही ताश के पत्तों की तरह ढह गया और 9.6% की भारी गिरावट के साथ ट्रेडिंग को 45 मिनट के लिए रोकना पड़ा. करीब 5,000 अंकों के इस गोते ने निवेशकों के अरबों रुपये स्वाहा कर दिए. मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर इंडेक्स 41,000 का सपोर्ट लेवल तोड़ता है, तो यह 33,000 तक जा सकता है.

'तेल' की आग में झुलसती अवाम

पाकिस्तान अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पूरी तरह आयात पर निर्भर है. कच्चे तेल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में 90 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल चुकी हैं. कुछ रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल की कीमतें पहले से ही आसमान छू रही हैं. वहीं दूसरी ओर माल ढुलाई महंगी होने से खाने-पीने की चीजों के दाम आम आदमी की पहुंच से बाहर हो गए हैं. बिजली के बिल अब गरीब के लिए 'मौत के फरमान' जैसे बन चुके हैं.

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'होर्मुज' का डर और गैस पाइपलाइन पर ताला

पाकिस्तान का अधिकांश तेल होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के रास्ते आता है. इसे बंद करने के ईरान के फैसले ने पाकिस्तान की नींद उड़ा दी है. वहीं, अरबों डॉलर की ईरान-पाकिस्तान (IP) गैस पाइपलाइन अब ठंडे बस्ते में जाती दिख रही है. अमेरिकी प्रतिबंधों और युद्ध के चलते इस प्रोजेक्ट में हो रही देरी से पाकिस्तान पर भारी अंतरराष्ट्रीय जुर्माने का खतरा मंडरा रहा है.

घर के अंदर 'गृहयुद्ध' जैसे हालात

लड़ाई सिर्फ सरहद पार नहीं है. ईरान के समर्थन में पाकिस्तान के कई शहरों में हिंसक प्रदर्शन शुरू हो गए हैं. कराची में अमेरिकी दूतावास के बाहर हुई झड़पों में 10 लोगों की मौत ने देश के आंतरिक सुरक्षा ढांचे को हिला दिया है. निवेशक इस अराजकता को देखकर देश से अपना पैसा निकाल रहे हैं, जिससे पाकिस्तानी रुपया डॉलर के मुकाबले और कमजोर होता जा रहा है.

दोतरफा मार: अफगानिस्तान सीमा पर भी तनाव

एक तरफ मिडिल ईस्ट की आग है, तो दूसरी तरफ अफगानिस्तान के साथ बढ़ता सीमा विवाद. पाकिस्तान ने ‘स्‍पेशल ऑपरेशन' शुरू किया है, जिससे रक्षा बजट पर बोझ बढ़ गया है.

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि पाकिस्तान इस समय 'परफेक्ट स्टॉर्म' (Perfect Storm) के बीच में है. एक तरफ कर्ज का बोझ है, दूसरी तरफ तेल का संकट और तीसरी तरफ घरेलू दंगे. सच तो यह है कि अमेरिका और ईरान की इस रस्साकशी में पाकिस्तान की 'आर्थिक जेब' पूरी तरह कट चुकी है.

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निलेश कुमार
Senior Producer
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