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This Article is From Nov 28, 2025

हर 3 मिनट में बच्चे के साथ अपराध, हर 8 मिनट में 1 पॉक्सो केस... चौंका रहे नाबालिगों से अपराध को लेकर NCRB के आंकड़े

मध्य प्रदेश में देश के 13% बाल-अपराध का भार उठाए हुए है. राज्य में 2023 में 22,393 मामले दर्ज हुए लगातार पांचवें साल देश में सबसे अधिक.

हर 3 मिनट में बच्चे के साथ अपराध, हर 8 मिनट में 1 पॉक्सो केस... चौंका रहे नाबालिगों से अपराध को लेकर NCRB के आंकड़े
भोपाल:

नाबालिग बच्चों के साथ होने वाली अपराधिक घटनाएं समाज के साथ-साथ प्रशासन के लिए भी एक बड़ी समस्या की तरह हैं. इसे लेकर NCRB के आंकड़े चिंता और बढ़ाने वाले हैं. NCRB के आंकड़ों अनुसार भारत में हर तीन मिनट में एक बच्चा किसी न किसी अपराध का शिकार बनता है. हर आठ मिनट में एक पॉक्सो केस दर्ज होता है. साल 2023 में देश में बच्चों के खिलाफ 1,77,335 अपराध दर्ज हुए पिछले साल की तुलना में 9.2% की भयावह बढ़ोतरी हुई. और इस राष्ट्रीय शर्म के केंद्र में खड़ा है मध्य प्रदेश, जो अकेले देश के 13% बाल-अपराध का भार उठाए हुए है. राज्य में 2023 में 22,393 मामले दर्ज हुए लगातार पांचवें साल देश में सबसे अधिक. यहां बच्चों के खिलाफ अपराध दर 77.9 प्रति लाख बाल आबादी है राष्ट्रीय औसत से लगभग दोगुनी.

इन्हीं भयावह आंकड़ों की पृष्ठभूमि में रायसेन रेप केस सामने आया एक ऐसा मामला जिसने पहले से ही विचलित राज्य की आत्मा को झकझोर दिया.21 नवंबर को छह साल की बच्ची को चॉकलेट का लालच देकर जंगल में ले जाकर बलात्कार किया गया. बच्ची की हालत इतनी गंभीर थी कि उसे भोपाल के बड़े सरकारी अस्पताल में ICU में भर्ती करना पड़ा डॉक्टरों के मुताबिक उसके कई बाहरी और आंतरिक घावों को भरने में छह महीने तक लग सकते हैं.जैसे ही अपराध सामने आया, रायसेन फट पड़ा सड़कें जाम, थाना घेर लिया गया, पथराव हुआ। गुस्सा इतना तीव्र था कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव खुद पुलिस मुख्यालय पहुंचे, SP को हटा दिया गया और थाना प्रभारी को सस्पेंड कर दिया.

उधर, आरोपी 23 वर्षीय सलमान वारदात के बाद फरार हो गया. उसे पकड़ने के लिए 11 टीमें और 300 से ज्यादा पुलिसकर्मी जंगलों, बस्तियों, नेशनल हाईवे और शहर के कोने-कोने में तलाश में जुट गए.144 घंटे बाद, सुराग मिला भोपाल के गांधी नगर की एक चाय की दुकान से वहीं दुकान जहाँ सलमान कुछ साल पहले काम कर चुका था. नई बस्ती के अब्दुल, रिजवान और आसिफ ने उसे देखा, शक हुआ, उसकी फोटो चुपचाप एक स्थानीय पुलिसवाले को भेज दीऔर कुछ ही मिनटों में भगोड़ा धर दबोचा गया.

लेकिन असली ड्रामा उसके बाद शुरू हुआ. गौहरगंज ले जाते समय ओबेदुल्लागंज के जंगलों के पास पुलिस की गाड़ी पंक्चर हो गई. जैसे ही पुलिसकर्मी नीचे उतरे, सलमान ने अचानक सब-इंस्पेक्टर श्याम राज की सर्विस रिवॉल्वर छीन ली.पिस्टल छोड़! इंस्पेक्टर विजय त्रिपाठी, जिन्होंने आरोपी के पैर में गोली मारी, ने बताया कि उसने हम पर दो राउंड फायर कर दिए. हमने चेतावनी दी ‘पिस्टल छोड़ दो' लेकिन वो फिर फायर करने लगा. हमने पहले हवाई फायर किया. जब नहीं रूका, तो हमने आत्मरक्षा में गोली चलाई. एक गोली उसके पैर में लगी और वो गिर गया. 

यह मुठभेड़ सुबह 4 से 4:30 बजे के बीच हुई. पुलिस का कहना है कोई दबाव नहीं था, फायरिंग पूरी तरह आत्मरक्षा में हुई.सलमान,जो सीहोर के शाहगंज थाने से एक स्थायी वारंटी भी है,अब भोपाल के हमीदिया अस्पताल में भर्ती है खतरे से बाहर. उधर, पीड़ित बच्ची ICU में है गाल सूजे हुए, घुटनों और हाथों पर गहरे घाव, पूरे शरीर पर चोट और छिलने के निशान. उसका दर्द केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं यह एक ऐसे राज्य की चुनौती है जो NCRB की सबसे काली सूची में लगातार नंबर-1 है. 

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी सख्त प्रतिक्रिया दी कि एक अबोध बच्ची के साथ दुष्कर्म हुआ लेकिन जैसा मैंने कहा था हमारी पुलिस छोड़ने वाली नहीं है जरा ढिलाई होगी तो हम पसंद नहीं करते भागते हुए शॉर्ट एनकाउंटर करते पकड़ा है. हमारी पकड़ से कोई भाग नहीं सकता ये पक्की बात है सबको लेकर चलने की भावना है लेकिन कोई कानून हाथ में लेगा तो हम उसको छोड़ने वाले नहीं हैं. एक आरोपी की गिरफ्तारी से फाइल बंद हो सकती है लेकिन आंकड़े कहते हैं कि लड़ाई बहुत बड़ी है. क्योंकि आरोपी सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, वह सिस्टम है जो बार-बार अपने बच्चों को बचाने में असफल हो रहा है. 

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