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चुनाव से ऐन पहले पंजाब कांग्रेस में बदलाव की सुगबुगाहट, लेकिन क्या ये सही समय है?

पंजाब को लेकर राहुल गांधी को जल्दी फैसला लेना है. माना जा रहा है कि इसी रविवार को राहुल गांधी विदेश दौरे पर जाएंगे और उसके पहले पंजाब का मसला सुलझा लिया जाएगा.

चुनाव से ऐन पहले पंजाब कांग्रेस में बदलाव की सुगबुगाहट, लेकिन क्या ये सही समय है?
पंजाब में किसे कहां सेट करना है इसका राहुल गांधी ने हिसाब-किताब कर लिया है. (फोटो क्रेडिट-पीटीआई)
  • कांग्रेस में संगठन सुधार को लेकर अजय माकन की समिति ने 75 नेताओं से चर्चा कर रिपोर्ट सौंपी
  • राहुल गांधी ने पंजाब के पांच वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर बदलाव की संभावना पर विचार किया
  • पंजाब चुनाव में धार्मिक मुद्दे, नशा और गैंगवार प्रमुख विषय होंगे, और राहुल गांधी को जल्द लेना आवश्यक है

पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में हलचल तेज है और लगातार मीटिंग हो रही है. कांग्रेस आलाकमान ने अजय माकन, मीनाक्षी नटराजन और भजनलाल जाटव जैसे नेताओं की एक समिति बनाई, जिन्होंने दिल्ली में पंजाब के नेताओं से मुलाकात की. करीब 75 नेताओं से बातचीत करने के बाद अजय माकन ने अपनी रिपोर्ट कांग्रेस आलाकमान को सौंप दी. उसके बाद राहुल गांधी ने पंजाब अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वाडिंग, पंजाब में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा, पूर्व मुख्यमंत्री और सांसद चरणजीत सिंह चन्नी, सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा और पूर्व सांसद विजय इंदर सिंगला से मुलाकात की. बैठक के बाद प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि “राहुल गांधी जो भी निर्णय लेंगे, वो सभी को मान्य होगा “

क्या ये सही समय है बदलाव का?

मगर सबसे बड़ा सवाल कांग्रेस के सामने यही है कि कांग्रेस को करना क्या है? कांग्रेस पार्टी संगठन में बदलाव करना चाहती है ताकि कार्यकर्ताओं में नया जोश भरा जा सके और पंजाब कांग्रेस के बड़े पांच नेताओं में बेहतर तालमेल हो. मगर सबसे बड़ा सवाल है कि क्या यह सही समय है बदलाव करने का? कहा जाता है कि लड़ाई के मैदान में बीच सेनापति बदलने के नतीजे ठीक नहीं होते हैं. कांग्रेस ने पिछली बार भी इन्हीं अजय माकन की रिपोर्ट पर कैप्टन अमरिंदर सिंह को हटाकर दलित मुख्यमंत्री के तौर पर चरणजीत सिंह चन्नी की ताजपोशी की थी, मगर उसके बाद चुनाव में हार ही मिली. पंजाब में दलित वोटरों की संख्या 32 फीसदी के आसपास है, मगर इतने जतन के बाद भी कांग्रेस को केवल 23 फीसदी ही वोट मिले थे. मतलब कांग्रेस को सभी दलितों का भी वोट नहीं मिला और ना ही जट्ट सिख का. 

पंजाब में किसका पलड़ा भारी?

पंजाब में दलित की राजनीति भी मजहबी और रामदासी सिख के बीच में घूमती है. चन्नी रामदासी सिख हैं और अभी भी चरणजीत सिंह चन्नी कांग्रेस की तरफ से बड़े चेहरा माने जा रहे हैं, क्योंकि वो पंजाब के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. मगर 2022 विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री रहते हुए भी चमकौर साहिब और बहादुर जैसे दो सीटों से चुनाव हार गए थे. वैसे 2024 में वो जालंधर से लोकसभा के सांसद बने. अभी पिछले दिनों पंजाब में हुए स्थानीय निकाय के चुनाव में भी चन्नी ने अपने क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन किया. कांग्रेस अध्यक्ष खरगे की भी वो पसंद हैं और राहुल गांधी के भी, मगर उनके साथ 2022 का चुनाव में हार का मामला भी जुड़ा हुआ है. 

सिख, दलित सिख और हिंदू को कैसे साधेंगे?

कांग्रेस को दरअसल पंजाब में सिख, दलित सिख और हिंदू वोटरों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है. साथ ही पंजाब के तीनों खित्ते माझा, दोआब और मालवा के नेताओं में भी संतुलन बनाना भी बेहद जरूरी है. पंजाब के मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष राजा वाडिंग के इलाके में कांग्रेस ने स्थानीय निकाय के चुनाव में अच्छा प्रदर्शन नहीं किया. कांग्रेस में इन पांच बड़े नेताओं के बीच गुटबाजी और मतभेद के किस्से आम हैं. यही वजह है कि राहुल गांधी इन सबको बार-बार दिल्ली बुलाकर एकजुट रहने की बात कह रहे हैं. राहुल गांधी के पास दिक्कत ये है कि यदि उन्होंने एक को हटाकर किसी दूसरे के लाने की कोशिश की तो सब को बदलना पड़ेगा.

किस नेता पर कांग्रेस लगाएगी दांव?

एक नाम सुखजिंदर सिंह रंधावा का भी है. वो फिलहाल गुरदासपुर से सांसद हैं और पंजाब के उपमुख्यमंत्री भी रह चुके हैं. अभी राजस्थान के प्रभारी हैं. यदि उनको आगे लाया जाता है तो पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा को बदलना पड़ेगा, क्योंकि वो भी गुरदासपुर या कहें माझा से आते हैं. पंजाब कांग्रेस में आजकल विजय इंदर सिंगला का नाम भी चल रहा है. वो पहले संगरूर से सांसद रह चुके हैं और 10 जनपथ के करीबी बताए जाते हैं. वो हिंदू हैं. एक और हिंदू नेता राणा केपी सिंह के नाम की भी चर्चा है. यदि कांग्रेस जट्ट सिख समुदाय से किसी को बनाना चाहती है तो सुखजिंदर सिंह रंधावा तो हैं ही, कुछ लोग विधायक प्रगट सिंह का भी नाम चला रहे हैं.

दलित सिख बनाना है तो चरणजीत सिंह चन्नी हैं ही. अब यह कहा जा रहा है कि प्रताप सिंह बाजवा को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहने दिया जाए, वो माझा से आते हैं, चरणजीत सिंह चन्नी को कैंपेन कमेटी की जिम्मेदारी दी जाए, जो दोआब से आते हैं, विजय इंदर सिंगला को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया जाए, जो मालवा क्षेत्र से आते हैं और किसी को भी मुख्यमंत्री का चेहरा ना घोषित किया जाए.

मौजूदा पंजाब की राजनीतिक हालात के बारे में कहा जा रहा है कि इस बार पंजाब में चुनाव धार्मिक मुद्दा जैसे बेअदबी, नशा और गैंगवार पर लड़ा जाएगा. यह भी कहा जा रहा है कि अकाली बंटी हुई है. मौजूदा सरकार के खिलाफ ऐंटी इंकम्बेंसी है. बीजेपी ने सिख अध्यक्ष बनाकर 18 फीसदी वोट को पार करना चाहती है. बची कांग्रेस तो यहां आपस में ही सिर फुटव्वल है. ऐसे में राहुल गांधी को जल्दी फैसला लेना है. माना जा रहा है कि इसी रविवार को राहुल गांधी विदेश दौरे पर जाएंगे और उसके पहले पंजाब का मसला सुलझा लिया जाएगा.

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