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पंजाब में अब निजी स्कूल नहीं कर सकेंगे मनमानी फीस बढ़ोतरी, मान सरकार ने कानून बनाकर कसा शिकंजा

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अध्यक्षता में पंजाब कैबिनेट ने निजी स्कूलों की मनमानी फीस बढ़ोतरी पर शिकंजा कसते हुए सालाना वृद्धि को 5% पर सीमित कर दिया है. इसके साथ ही औद्योगिक विकास को रफ्तार देने, डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत करने और प्रशासनिक कामकाज को आसान बनाने के लिए कई अन्य बड़े फैसलों को मंजूरी दी गई है.

पंजाब में अब निजी स्कूल नहीं कर सकेंगे मनमानी फीस बढ़ोतरी, मान सरकार ने कानून बनाकर कसा शिकंजा

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में सोमवार को हुई पंजाब कैबिनेट की बैठक में जनता और छात्रों के हित में कई ऐतिहासिक फैसले लिए गए. इस बैठक में जहां एक तरफ निजी स्कूलों की मनमानी फीस बढ़ोतरी पर लगाम लगाने के लिए अध्यादेश को मंजूरी दी गई. वहीं, दूसरी तरफ राज्य में औद्योगिक विकास, डिजिटल गवर्नेंस और प्रशासनिक सुधारों को गति देने के लिए कई महत्वपूर्ण नीतिगत बदलावों को हरी झंडी दिखाई गई.

मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) से मिली जानकारी के मुताबिक, प्राइवेट अनएडेड स्कूलों की अनुचित फीस बढ़ोतरी को नियंत्रित करने के लिए कैबिनेट ने 'पंजाब रेगुलेशन ऑफ फी ऑफ अनएडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस (संशोधन) अध्यादेश, 2026' को मंजूरी दे दी है. यह कदम पंजाब रेगुलेशन ऑफ फी ऑफ अनएडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस एक्ट, 2016 में संशोधन करके उठाया गया है.

क्यों लिया गया यह फैसला?

इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य फीस ढांचे में पारदर्शिता और जवाबदेही लाना है, ताकि छात्रों और अभिभावकों को स्कूलों की मनमानी से बचाया जा सके. नए नियमों के तहत अब कोई भी प्राइवेट स्कूल सालाना 5% से अधिक फीस नहीं बढ़ा सकेगा. अगर कोई स्कूल इससे ज्यादा बढ़ोतरी करना चाहता है, तो उसे रेगुलेटरी बॉडी से पहले मंजूरी लेनी होगी.

कैपिटल सब्सिडी के नियमों में सुधार

राज्य में उद्योगों को बढ़ावा देने और निवेश को आकर्षित करने के लिए कैबिनेट ने एक और बड़ा फैसला लिया है. पंजाब सरकार की औद्योगिक नीतियों के तहत कैपिटल सब्सिडी और निवेश प्रोत्साहनों के वितरण के लिए 13 नवंबर 2019 को जारी गाइडलाइंस में संशोधन को मंजूरी दे दी गई है. इन बदलावों का उद्देश्य सब्सिडी वितरण की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और तेज बनाना है. गाइडलाइंस के क्लॉज 1.1 और 1.2 को हटाने के बाद जो भी औद्योगिक इकाइयां इसके दायरे में आएंगी, उन्हें जरूरी दस्तावेजों के वेरिफिकेशन और तय शर्तों को पूरा करने के बाद तुरंत कैपिटल सब्सिडी जारी कर दी जाएगी. इससे प्रशासनिक देरी खत्म होगी और सभी पात्र उद्योगों को समान रूप से लाभ मिल सकेगा.

लागू होगा स्टेट डाटा इंटीग्रेशन प्लेटफॉर्म 

वहीं, राज्य में डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत करने और सरकारी कामकाज को पेपरलेस व सुचारू बनाने के लिए कैबिनेट ने 'स्टेट डाटा इंटीग्रेशन प्लेटफॉर्म' (SDIP) को राज्य में लागू करने की सहमति दे दी है. इस प्लेटफॉर्म के जरिए राज्य के अलग-अलग विभागों के डेटाबेस को एक जगह जोड़ा जाएगा, जिससे डेटा की डुप्लिकेसी रुकेगी और सरकारी योजनाओं का लाभ सही लाभार्थियों तक तेजी से पहुंचेगा. इस प्रोजेक्ट को बिना किसी बाधा के लागू करने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक तीन स्तरीय स्टीयरिंग कमेटी का गठन किया जाएगा. जिसके अध्यक्ष पंजाब के मुख्य सचिव होंगे, इसके अलावा,प्रशासनिक सचिव सदस्य संयोजक होंगे. इसके अलावा, अन्य संबंधित विभागों के प्रशासनिक सचिव को सदस्य बनाया जाएगा. 

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होशियारपुर जिले के दसूहा उपमंडल के लोगों को प्रशासनिक राहत देते हुए कैबिनेट ने वहां एडिशनल डिप्टी कमिश्नर यानी एडीसी (General) और उनके सहयोगी स्टाफ के नए पदों को सृजित करने की मंजूरी दे दी है. अब तक इस इलाके के लोगों को जिला स्तर के प्रशासनिक काम, सरकारी मंजूरियों, राजस्व और अपनी शिकायतों के निवारण के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी. इससे उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद होता था. जनता की इसी परेशानी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने दसूहा में एडीसी (General) सहित कुल पांच नए पदों को मंजूरी दी है, जिससे स्थानीय स्तर पर ही लोगों की समस्याओं का निपटारा तेजी से हो सकेगा.

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