- संसद के मानसून सत्र का सत्रावसान अभी तक नहीं हुआ है और सत्र तकनीकी रूप से जारी माना जा रहा है.
- सरकार और विपक्ष के बीच महिला आरक्षण और परिसीमन बिल को लेकर मतभेद के कारण सत्र समाप्त नहीं किया गया है.
- मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार को तीन सवाल लिखकर बिल के नए प्रस्ताव और सर्वदलीय बैठक की मांग की है.
संसद के मानसून सत्र खत्म नहीं किए जाने और विशेष सत्र बुलाए जाने को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तनातनी बनी हुई है. मामला परिसीमन और महिला आरक्षण बिल को लेकर है, जिसे सरकार ने अप्रैल में पास कराने की कोशिश की थी. चूंकि यह संविधान संशोधन विधेयक है, इसलिए इसे पास कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होती है, लेकिन उस वक्त सरकार यह बहुमत नहीं जुटा पाई थी और बिल पास नहीं हो सका था.
संसद के मानसून सत्र का सत्रावसान नहीं किए जाने और परिसीमन बिल को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे लगातार सरकार को चिट्ठी लिख रहे हैं. खरगे ने सबसे ताजा चिट्ठी 16 अक्टूबर को प्रधानमंत्री को लिखी थी, जिसका जवाब संसदीय कार्य मंत्री की तरफ से आया. रिजिजू ने लिखा है कि केंद्रीय गृह मंत्री ने मार्च 2026 में राजनीतिक दलों के साथ सलाह-मशविरा किया था.
अब कांग्रेस सरकार से सवाल पूछ रही है कि क्या उस वक्त उन राजनीतिक दलों से कोई वादा किया गया था, जिसका जिक्र 16 अप्रैल वाले बिल में नहीं है. कांग्रेस ने सरकार से तीन सवाल पूछे हैं.
सरकार से कांग्रेस के 3 सवाल
पहला सवाल : क्या सरकार बिल में कोई नया प्रस्ताव लेकर आ रही है और क्या इस बारे में किसी से चर्चा हुई है?
- दूसरा सवाल : सरकार सर्वदलीय बैठक के लिए राजी क्यों नहीं हो रही है? अगर सरकार बिल में कोई नया प्रस्ताव लेकर आ रही है, तो उस पर सर्वदलीय बैठक में चर्चा होनी चाहिए. इस बारे में खरगे सरकार को छह बार चिट्ठी लिख चुके हैं. इनमें चार चिट्ठियां प्रधानमंत्री को और दो चिट्ठियां संसदीय कार्य मंत्री रिजिजू को लिखी गई हैं.
- तीसरा सवाल : क्या सरकार फिर से परिसीमन बिल लाना चाहती है और उसे पारित कराना चाहती है? अगर ऐसा होता है, तो एक बार फिर यह बिल पारित नहीं हो पाएगा.
उधर, संसदीय कार्य मंत्री का कहना है कि सरकार की तरफ से विपक्ष के साथ विचार-विमर्श करने की कई बार कोशिश की गई. लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद कांग्रेस पार्टी ने चर्चा के लिए समय नहीं दिया. इसके बाद ही सरकार ने दूसरे दलों से संपर्क करना शुरू किया. रिजिजू का कहना है कि जहां तक मानसून सत्र के सत्रावसान की बात है, संविधान में इसके लिए कोई समयसीमा तय नहीं की गई है.
5 दिन हो चुके हैं और सत्र अभी भी जारी
गौरतलब है कि मानसून सत्र की आखिरी बैठक 13 अगस्त को हुई थी. लेकिन उसे हुए अब 65 दिन हो चुके हैं और तकनीकी तौर पर वह सत्र अभी भी जारी है. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकार के रुख का क्या मतलब है. सूत्रों की मानें तो सरकार मानसून सत्र के सत्रावसान को लेकर जल्दबाजी में नहीं है. वह तब तक कोशिश करती रहेगी, जब तक डीएमके परिसीमन बिल के लिए राजी नहीं हो जाती. उधर, डीएमके का आधिकारिक तौर पर कहना है कि जब तक सरकार नए बिल का ड्राफ्ट या प्रारूप नहीं दिखाती, तब तक वह इस पर कुछ नहीं कह सकती. वहीं, वाईएसआर कांग्रेस के रुख के बाद परिसीमन बिल पर सरकार का समर्थन घटता हुआ दिखाई दे रहा है.
दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि सरकार परिसीमन बिल को पास कराने के लिए उत्तर प्रदेश चुनाव तक भी इंतजार कर सकती है. यानी बजट सत्र के बाद भी सरकार यह बिल ला सकती है. उत्तर प्रदेश चुनाव के नतीजों के बाद जब यह तय हो जाएगा कि किसकी सरकार बनती है और उसके बाद नई राजनीतिक उथल-पुथल शुरू होती है, तब सरकार इस पर कोई फैसला कर सकती है. यानी फिलहाल परिसीमन बिल ‘हां' और ‘ना' के बीच झूलता हुआ नजर आ रहा है.
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