- कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर देशभर में सड़कों पर प्रदर्शन किया
- पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने ज्ञानेश कुमार को फांसी देने की मांग करते हुए उनपर लोकतंत्र की हत्या का आरोप लगाया
- सांसद ने बिहार, असम और बंगाल में चुनाव रद्द करने और विपक्ष को चुनावों का बहिष्कार करने की भी अपील की है
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाए जाने की मांग को लेकर कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता आज देश भर में सड़कों पर उतरे. उन्होंने SIR और चुनावों में धांधली का दावा करते हुए ज्ञानेश कुमार पर मोदी सरकार के इशारों पर काम करने का आरोप लगाया. वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) को लेकर चल रहे इस विवाद के बीच, पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को फांसी दी जानी चाहिए.
पप्पू यादव ने कहा, "ज्ञानेश कुमार को फांसी होनी चाहिए. उन्हें बिजली के खंभे से लटकाकर फांसी दी जानी चाहिए ताकि जो लोग गरीबों, दलितों, कमजोर और वंचित वर्गों के अधिकारों और वोटों की चोरी करते हैं, उन्हें सबक मिल सके."
उन्होंने कहा, "ज्ञानेश ने बहुत बड़ा अपराध किया है और संविधान का गला घोंटा है. उन्होंने लोकतंत्र की हत्या की है. ज्ञानेश किसी आतंकवादी या चरमपंथी से भी बड़े आतंकवादी हैं."

पूर्णिया के सांसद ने आगे कहा, "उन्होंने बंगाल, बिहार और असम में 13 करोड़ लोगों के साथ अन्याय किया है. उन्हें ऐसे ही कैसे जाने दिया जा सकता है?"
पप्पू यादव ने कहा, "राहुल गांधी और मैं बचपन से ही लड़ रहे हैं. हर किसी को लड़ने और बोलने का अधिकार है, और सभी का स्वागत है. हम उन सभी का स्वागत करते हैं जो ज्ञानेश के खिलाफ आगे आते हैं, जिन्हें मैं लोकतंत्र का हत्यारा कहता हूं. सभी को एक मंच पर आना चाहिए और ज्ञानेश जैसे व्यक्ति के खिलाफ मौत की सजा और देशद्रोह का मुकदमा चलाने के लिए लड़ना चाहिए."

यादव की यह टिप्पणी विकासशील इंसान पार्टी के प्रमुख मुकेश सहनी के CEC ज्ञानेंद्र कुमार के खिलाफ दिए गए उस विवादित बयान के एक दिन बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर उन्हें एक हत्या करने की छूट होती, तो वे उन्हें गोली मार देते.
गौरतलब है कि एक प्रमुख भारतीय अखबार की रिपोर्ट में बताया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने हाल के महीनों में भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के फैसलों और प्रक्रियाओं पर आंतरिक रूप से आलोचना की थी. ECI में तीन चुनाव आयुक्त होते हैं, जिनमें CEC सबसे वरिष्ठ होने के बजाय 'बराबर वालों में पहला' (First Among Equals) होता है. जहां तक संभव हो, तीनों को सर्वसम्मति से फैसले लेने होते हैं.
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