कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने बुधवार को कहा कि वोट चोरी संविधान पर सीधा हमला है और इसे अंजाम देने वाले BJP, RSS और चुनाव आयोग ने देशद्रोह किया है. लेकिन न्याय जरूर होगा. लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी की ये प्रतिक्रिया उस खबर के बाद आई है, जिसमें दावा किया गया है कि चुनाव आयोग में SIR से जुड़े मुद्दों पर तीन में से दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने बार-बार सवाल उठाए थे.
संविधान पर सीधा हमला- राहुल गांधी
SIR का पूरे देश में लागू करने का काम तीनों चुनाव आयुक्त की देखरेख में हो रहा था, लेकिन संधू और जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार (एक ही दिन में चार बार) आयोग के फैसलों और आदेशों पर औपचारिक तौर पर आपत्ति जताई थी, जो उनके अनुसार उनकी जानकारी के बिना लिए या जारी किए गए थे. गांधी ने कहा, वोट चोरी भारत के लोगों के खिलाफ अपराध है और हमारे संविधान पर सीधा हमला है. इससे पहले भी राहुल गांधी ने EC अधिकारियों को चेतावनी दी थी कि वे जो कर रहे हैं वह देशद्रोह है और उन्हें बख्शा नहीं जाएगा.
कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने भी कहा, बीजेपी ने लोकतंत्र की हत्या का कार्यालय खोला है. एक तरफ चुनाव आयोग को लगाया है तो दूसरी तरफ गृह मंत्रालय को. 1995 में ही सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया था कि चुनाव आयोग बहुमत की संस्था है. CEC ने केवल देश को भ्रमित नहीं किया बल्कि अपने सहयोगियों को भी. उन्होंने चुनाव आयोग और चुनाव आयुक्तों को हाईजैक कर लिया है.दोनों चुनाव आयुक्तों ने दस महीनों में 14 बार अपनी आपत्ति जताई. फॉर्म 6 में बदलावों पर विरोध किया.
ERO को IT विभाग द्वारा अधिकार नहीं देने का विरोध किया. बंगाल में 16 लाख वोटरों को हटाने की अपील को लेकर सवाल उठाए, लेकिन सारे सवालों पर चुप्पी साध ली गई. पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने पहले सवाल उठाया था कि क्या हम महज सजावट के लिए हैं ? चुनाव आयोग ने खुद को ऐसी संस्था बना दी है, जहां एक ही व्यक्ति के मत का महत्व है, सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को रद्दी में फेंक दिया गया है.
सिंघवी ने कहा, चुनाव आयोग ने फॉर्म 6 में बदलाव किया. इसको लेकर चुनाव आयुक्तों ने कहा कि ये केवल सरकार कर सकती है. इन बदलावों से नए वोटरों को दिक्कत होगी. 13 करोड़ लोग वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं. ऐसे में इनमें से कुछ करोड़ लोगों की अगली पीढ़ी वोटर नहीं बन पाएगी.वोटर लिस्ट में बदलाव केवल ERO कर सकता है. दोनों चुनाव आयुक्तों ने सवाल उठाए हैं कि हज़ारों ERO की शिकायत है कि ECI पोर्टल के जरिए उनके अधिकार सीमित कर दिए गए हैं.
बंगाल में 16 लाख वोटरों को हटाने से जुड़ी अपील चुनाव आयोग ने की. लेकिन चुनाव आयुक्तों ने पूछा कि इसकी अनुमति किसने दी? SIR के फेज 1 और 2 में 7.8 करोड़ यानी 13% वोटरों के नाम कट गए. तीसरे फेज में अब तक 6 करोड़ कट चुके हैं. कुल मिलाकर अब तक 13 करोड़ यानी 17% वोटरों के नाम कट चुके हैं. इसके अलावा 5 करोड़ लोगों को नोटिस दिए गए हैं. CEC ज्ञानेश कुमार को त्यागपत्र देना चाहिए.
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