- दुनिया का अधिकांश एडवांस सेमीकंडक्टर उत्पादन ताइवान में होता है
- भारत सरकार ने सेमिकॉन 2.0 योजना के तहत 1.27 लाख करोड़ रुपये के निवेश का निर्णय लिया
- सेमिकॉन 2.0 के अंतर्गत भारत 2028 तक पहली घरेलू सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन इकाई शुरू करने का लक्ष्य है
सेमीकंडक्टर चिप आज दुनिया की लाइफलाइन है. इसी से मोबाइल से लेकर प्लेन और कार से लेकर तोप तक चल रही है. दुनिया का 90 फीसदी से ज्यादा एडवांस सेमीकंडक्टर ताइवान में बनता है. इसी के बूते ये छोटा सा देश चीन से अपनी लड़ाई लड़ रहा है. पूरी दुनिया उसके पक्ष में है और हर मुमकिन मदद करना चाहती है कि ताइवान पर चीन का कब्जा न हो. कोरोना के दौरान चिप की अहमियत सबसे ज्यादा पता चली. जब कई कंपनियों को प्रोडक्शन रोकना पड़ा और कई महीनों तक कारों की डिलिवरी लेट हुई.
'सेमिकॉन 2.0' क्या है
तब दुनिया को एहसास हुआ कि अगर चिप की सप्लाई रुकी तो पूरी दुनिया थम जाएगी. इसके बाद अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया और यूरोपियन यूनियन, से लेकर भारत ने चिप बनाने वाली कंपनियों को आकर्षित करने के लिए अरबों डॉलर के प्रोग्राम शुरू किए. पिछले हफ्ते, भारत सरकार ने 'सेमिकॉन 2.0' नाम से 1.27 लाख करोड़ रुपये के सेमीकंडक्टर प्रोग्राम को मंजूरी दी. यह प्रोजेक्ट 2021 में शुरू किए गए 9 अरब डॉलर के 'इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन' को आगे बढ़ाता है. इसका मकसद चिप का पूरा इकोसिस्टम तैयार करना है, जिसमें चिप डिजाइन और फैब्रिकेशन से लेकर एडवांस्ड पैकेजिंग, खास मटीरियल, इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग और वर्कफोर्स की ट्रेनिंग शामिल है.
'सेमिकॉन 2.0' से क्या होगा
इस बात की घोषणा करते हुए इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘इस कार्यक्रम के अंत तक हम स्वदेशी चिप के उत्पादन में आत्मनिर्भर हो जाएंगे.'' सरकार को उम्मीद है कि नई योजना से लगभग चार लाख करोड़ रुपये का निवेश आएगा और योजना अवधि के दौरान दो लाख करोड़ रुपये मूल्य का सेमीकंडक्टर उत्पादन होगा. उम्मीद है कि देश की पहली सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन इकाई 2028 में काम करना शुरू कर देगी. इस पर भारतीय उद्योग जगत ने भी काफी उत्साहित होकर प्रतिक्रिया दी. उद्योग जगत का कहना है कि 'सेमिकॉन 2.0' अगले पांच वर्षों में 1.5 लाख से 2 लाख तक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित कर सकती है. यह योजना भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को केवल असेंबली आधारित मैन्युफैक्चरिंग से आगे बढ़ाकर चिप डिजाइन, इंजीनियरिंग और इनोवेशन के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.
भारत के इंजीनियर्स की मांग बढ़ेगी
एनएलबी सर्विसेज के विश्लेषण के अनुसार, सेमीकंडक्टर मिशन का अगला चरण केवल मैन्युफैक्चरिंग तक सीमित नहीं रहेगा. इसका फोकस चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर वेरिफिकेशन, एम्बेडेड सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन (ईडीए), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित मैन्युफैक्चरिंग, एडवांस्ड पैकेजिंग और इंटेलिजेंट सप्लाई चेन ऑपरेशंस जैसे क्षेत्रों को शामिल करते हुए एक समग्र इकोसिस्टम विकसित करने पर होगा. एनएलबी सर्विसेज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सचिन अलुग ने कहा कि वर्ष 2030 तक सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम से जुड़े लगभग 70 प्रतिशत पदों की प्रकृति बदल जाएगी, जिसके चलते उच्च कौशल वाले इंजीनियरिंग पेशेवरों की मांग में तेज बढ़ोतरी देखने को मिलेगी.
IIT मद्रास के डायरेक्टर से समझिए
Nvidia, AMD, Qualcomm और Texas Instruments जैसी कंपनियों के लिए काम करने वाले हजारों इंजीनियर पहले से ही बेंगलुरु, हैदराबाद और नोएडा जैसे भारतीय शहरों में बने रिसर्च सेंटरों से दुनिया के कुछ सबसे एडवांस्ड चिप्स डिजाइन कर रहे हैं. लेकिन एनालिस्ट्स का कहना है कि बड़े पैमाने पर मैन्युफैक्चरिंग के मामले में भारत पीछे रहा है. IIT मद्रास के डायरेक्टर वी. कामाकोटी ने कहा, "भारत के पास पहले से ही एडवांस्ड सेमीकंडक्टर चिप्स डिजाइन करने की विशेषज्ञता है. घरेलू कंपनियों और मल्टीनेशनल फर्मों के लिए काम करने वाले भारतीय इंजीनियरों ने सफलतापूर्वक जटिल चिप्स डिजाइन और डिलीवर किए हैं. बड़ी चुनौती उनकी मैन्युफैक्चरिंग है." अब तक, भारत की तरक्की मुख्य रूप से चिप की पैकेजिंग और टेस्टिंग तक ही सीमित रही है, न कि खुद चिप बनाने तक. कामाकोटी ने कहा कि अगला कदम एक ऐसा घरेलू फैब्रिकेशन इकोसिस्टम बनाना है जो डिजाइन की इन खूबियों को बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन में बदल सके.
अभी घरेलू मांग पर रहेगा फोकस
अमेरिका की मेमोरी चिप बनाने वाली कंपनी माइक्रोन टेक्नोलॉजी और भारत की दो सेमीकंडक्टर असेंबली और पैकेजिंग कंपनियां केन्स सेमीकॉन और सीजी सेमी ने भारत के सेमीकंडक्टर प्रोग्राम के पहले चरण के तहत कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू कर दिया है. भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव का कहना है कि अगले चरण का मकसद सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन के ज्यादा से ज्यादा हिस्से को भारत में लाना है. कामाकोटी का कहना है कि हाई-एंड स्मार्टफोन और AI सिस्टम में इस्तेमाल होने वाले सबसे एडवांस्ड 3 nm प्रोसेसर बनाने की कोशिश करने से पहले, भारत को यह साबित करना चाहिए कि वह भरोसेमंद तरीके से और बड़े पैमाने पर 28-नैनोमीटर (28 nm) चिप्स बना सकता है. उन्होंने कहा, "28 nm [चिप्स] से भारत की ज्यादातर जरूरतें पूरी हो जाएंगी. एक बार जब इसमें सफलता मिल जाएगी, तो हम धीरे-धीरे ज्यादा एडवांस्ड टेक्नोलॉजी की ओर बढ़ सकते हैं." मतलब साफ है कि भारत सही रास्ते पर बढ़ चुका है और 2030 तक वो बड़े पैमाने पर चिप प्रोडक्शन शुरू कर सकता है. उसके बाद भारत का फोकस अंतरराष्ट्रीय मांग पर शुरू होगा.
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