शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को लेकर लंबे समय से चर्चा चल रही है. इस बीच केंद्र सरकार ने संसद में स्पष्ट किया है कि शिक्षकों के लिए TET की अनिवार्यता से छूट देने की फिलहाल सरकार की कोई योजना नहीं है. सरकार ने यह भी कहा कि शिक्षक पात्रता परीक्षा से जुड़े नियम राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) द्वारा निर्धारित न्यूनतम योग्यता के अनुरूप लागू रहेंगे. केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने संसद में बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) शिक्षकों की नियुक्ति के साथ-साथ पात्र मामलों में पदोन्नति (Promotion) के लिए भी अनिवार्य है. इसलिए वर्तमान में TET की अनिवार्यता समाप्त करने या उससे छूट देने का कोई प्रस्ताव नहीं है.
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बढ़ी थी चर्चा
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा था कि शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत स्कूलों में कार्यरत ऐसे शिक्षक, जिन्होंने अभी तक TET पास नहीं किया है और जिनकी सेवानिवृत्ति में पांच वर्ष से अधिक समय शेष है, उन्हें निर्धारित समय सीमा के भीतर TET उत्तीर्ण करना होगा. बाद में समीक्षा याचिका (Review Petition) पर सुनवाई के दौरान अदालत ने शिक्षकों को राहत देते हुए TET पास करने की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2027 से बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 कर दी. साथ ही राज्यों को वर्ष में कम से कम दो बार TET आयोजित करने का प्रयास करने का निर्देश भी दिया.
सरकार ने क्या कहा
संसद में सरकार से पूछा गया था कि क्या लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से राहत देने पर विचार किया जा रहा है? इसके जवाब में सरकार ने स्पष्ट किया कि ऐसी कोई योजना फिलहाल नहीं है. यानी वर्तमान नियमों के अनुसार जिन शिक्षकों पर TET अनिवार्य है, उन्हें निर्धारित समय सीमा के भीतर परीक्षा पास करनी होगी.
TET क्यों है जरूरी
सरकार के अनुसार, शिक्षक पात्रता परीक्षा का उद्देश्य स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना है. राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) ने शिक्षकों की न्यूनतम योग्यता के रूप में TET को निर्धारित किया है, ताकि विद्यालयों में योग्य और प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति हो सके.
किन शिक्षकों पर लागू होगा नियम
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, यह व्यवस्था मुख्य रूप से उन सेवारत शिक्षकों (In-service Teachers) पर लागू होती है जो RTE व्यवस्था लागू होने से पहले नियुक्त हुए थे और जिनकी सेवा में अभी पांच वर्ष से अधिक समय शेष है. जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में पांच वर्ष या उससे कम समय बचा है, उन्हें इस अनिवार्यता से छूट दी गई है.
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के बीच उत्तराखंड में हो गया पेपर लीक, दो एग्जाम हुए रद्द
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं