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महाराष्ट्र में ऑटो-टैक्सी चालकों को बड़ी राहत: मराठी सीखने के लिए 15 अगस्त तक मिली मोहलत

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि 1 मई से 15 अगस्त तक आरटीओ और संबंधित संस्थाओं के माध्यम से चालकों को मराठी सिखाने की व्यवस्था की जाएगी.

महाराष्ट्र में ऑटो-टैक्सी चालकों को बड़ी राहत: मराठी सीखने के लिए 15 अगस्त तक मिली मोहलत
  • महाराष्ट्र सरकार ने ऑटो और टैक्सी चालकों को मराठी भाषा सीखने के लिए पंद्रह अगस्त तक की मोहलत दी है.
  • इस अवधि में मराठी भाषा न जानने वाले चालकों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी.
  • एक मई से पंद्रह अगस्त तक राज्यभर में चालकों का मराठी भाषा वेरिफिकेशन अभियान चलाया जाएगा.
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महाराष्ट्र में ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्यता के मुद्दे पर राज्य सरकार ने फिलहाल राहत देने का फैसला किया है. परिवहन मंत्री ने घोषणा की है कि गैर- मराठी चालकों को मराठी सीखने के लिए 15 अगस्त तक की मोहलत दी गई है. परिवहन विभाग की बैठक में मंत्री और आरटीओ अधिकारियों के बीच विस्तृत चर्चा हुई. इसके बाद उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि 1 मई से 15 अगस्त तक राज्यभर में विशेष अभियान चलाया जाएगा. इस दौरान ऑटो और टैक्सी चालकों का लगातार वेरिफिकेशन किया जाएगा.

सरकार ने साफ किया है कि इस अवधि में मराठी भाषा न जानने वाले चालकों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी. हालांकि, अन्य नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी. मंत्री ने कहा कि वेरिफिकेशन अभियान के दौरान जिन चालकों के दस्तावेज़, लाइसेंस या परमिट में किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाएगी, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. जरूरत पड़ने पर परमिट, लाइसेंस या बैज भी रद्द किया जा सकता है.

मराठी सिखाने की व्यवस्था
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि 1 मई से 15 अगस्त तक आरटीओ और संबंधित संस्थाओं के माध्यम से चालकों को मराठी सिखाने की व्यवस्था की जाएगी. इसका उद्देश्य भाषा को बढ़ावा देना है, न कि दंडात्मक कार्रवाई करना. परिवहन मंत्री ने कहा कि 15 अगस्त तक की स्थिति का आकलन किया जाएगा. इसके बाद यह निर्णय लिया जाएगा कि मोहलत को आगे बढ़ाया जाए या नहीं.

अवैध परमिट पर कड़ा रुख
बैठक में अवैध परमिट का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा. मंत्री ने बताया कि विभाग को करीब 30 शिकायतें मिली हैं, जिनमें आरोप है कि कुछ बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों ने अवैध रूप से परमिट हासिल किए हैं. इस पर सख्त रुख अपनाते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों की गहन जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने पर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी. राज्य सरकार के इस फैसले से हजारों ऑटो और टैक्सी चालकों को अस्थायी राहत मिली है. जहां एक ओर मराठी भाषा को बढ़ावा देने की पहल जारी रहेगी, वहीं नियमों के उल्लंघन और अवैध गतिविधियों पर सख्ती बरकरार रहेगी. अब 15 अगस्त के बाद सरकार के अगले कदम पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी.

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