असम के जोरहाट से शनिवार को आई एक मनहूस खबर ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है. वायुसेना के AN-32 विमान हादसे में जहानाबाद के हुलासगंज का एक जांबाज बेटा, फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार देश के लिए शहीद हो गया. आज जैसे ही शहीद शुभम का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव बनवरिया पहुंचा तो हर आंख नम हो गई और पूरा इलाका रो पड़ा. हजारों की संख्या में पहुंचे युवाओं ने नम आंखों से अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई दी. शुभम कुमार की अंतिम यात्रा के दौरान केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी, सांसद सुरेंद्र यादव, मंत्री प्रमोद कुमार चंद्रवंशी शामिल हुए. तिरंगे में लिपटा शुभम का पार्थिव शरीर जैसे ही उनके घर के आंगन में उतारा गया, परिजनों के सब्र का बांध टूट गया और चीख-पुकार मच गई.
बेटे के पार्थिर शरीर देख सदमे में गई मां
जिस बेटे की शादी के सपने परिवार देख रहा था, उसे इस हाल में देखकर मां गहरे सदमे में चली गईं और बार-बार बेटे के चेहरे देखने को लेकर बिलखती लगीं. वहीं छोटे भाई सत्यम की स्थिति ऐसी थी कि वह काठ मार गया हो, उसकी आंखों के आंसू सूख चुके थे और वह कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं था.

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घर के इकलौते कमाने वाले सदस्य की मौत ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया है. परिजनों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. उम्र के आखिरी पड़ाव पर खड़े शुभम के दादा की आंखें पथरा गई हैं. भारी मन और सीने में गर्व लिए दादा ने कहा कि वे अपने पोते के सिर पर सेहरा सजाने का ख्वाब देख रहे थे, लेकिन इस अनहोनी ने उनके सारे अरमानों पर पानी फेर दिया.
दादी की मौत पर 15 दिन पहले आया था घर
देश सेवा में जाने के बाद उन्होंने सबसे पहले अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुधारा. गांव के पुराने जीर्ण-शीर्ण मकान को छोड़कर उन्होंने एक सुंदर नया घर बनवाया था, जिसका गृह प्रवेश भी अभी तक नही हुआ है. मां के अनुसार, उत्तर प्रदेश के एक परिवार से शादी की बात लगभग फाइनल हो चुकी थी.

महज 15 दिन पहले ही अपनी दादी के अचानक निधन पर शुभम 10 दिनों की छुट्टी लेकर घर आए थे और श्राद्ध कर्म संपन्न कराकर वापस ड्यूटी पर लौटे थे. किसी को अंदाजा नहीं था कि वह अपने परिवार से आखिरी बार मिल रहे हैं. शनिवार की सुबह शुभम ने हमेशा की तरह वीडियो कॉल के माध्यम से अपनी मां से बात की थी. उस समय शुभम ने अपनी मां से कहा था कि अभी वह थोड़ा जल्दी में हैं और 2 घंटे बाद दोबारा फोन करेंगे, लेकिन किसे पता था कि यह शुभम की आखिरी आवाज थी. ठीक 11 बजे वायुसेना मुख्यालय से आए एक मनहूस फोन कॉल ने परिवार की सारी खुशियां हमेशा के लिए छीन लीं.
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