यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू और बीजेपी नेता अपर्णा यादव को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं. सैफई में मीडिया से बातचीत के दौरान अपर्णा यादव ने चुनाव लड़ने के संकेत देते हुए कहा कि उनकी पूरी तैयारी है. हालांकि, वह किस विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेंगी, इसका फैसला बीजेपी नेतृत्व करेगा. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी मैनपुरी से चुनाव लड़ने की कोई इच्छा नहीं है.
अपर्णा यादव 19 जनवरी 2022 को समाजवादी पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हुई थी. उस समय उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और नीतियों से प्रभावित होने की बात कही थी. भाजपा में शामिल होने के बाद विधानसभा चुनाव, मैनपुरी लोकसभा उपचुनाव और 2024 लोकसभा चुनाव में उनके नाम की चर्चा जरूर हुई. लेकिन पार्टी ने उन्हें उम्मीदवार नहीं बनाया.
बीजेपी का क्या है प्लान?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव में अपर्णा यादव को मैदान में उतार सकती है. उनकी उम्मीदवारी महिला वोटरों और यादव समुदाय के बीच पार्टी की पकड़ मजबूत करने में मददगार साबित हो सकती है. भाजपा सूत्रों के मुताबिक, लखनऊ की कुछ सीटों पर उनकी दावेदारी मजबूत मानी जा रही है. वहीं, पार्टी उन्हें किसी यादव बहुल सीट से उतारकर समाजवादी पार्टी के पारंपरिक वोटबैंक में सेंध लगाने की रणनीति भी अपना सकती है. ऐसी सीटें इटावा, कन्नौज और मैनपुरी के आसपास हो सकती हैं.
अपर्णा यादव वर्तमान में उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष हैं और हाल ही में उनका कार्यकाल एक वर्ष के लिए बढ़ाया गया है. महिला आयोग की जिम्मेदारी संभालने के बाद वह लखनऊ में काफी सक्रिय रही हैं. इसी वजह से राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी है कि भाजपा उन्हें राजधानी की किसी सीट से चुनावी मैदान में उतार सकती है.
यादव मतदाताओं में पहुंच
अपर्णा लंबे समय से परिवार के साथ पार्टी से जुड़ी थीं. 2015-16 के आसपास सपा की रैलियों के जरिए सक्रिय राजनीति में कदम रखा. भाजपा के कुछ पदाधिकारियों का मानना है कि सपा छोड़ने के बाद भी यादव मतदाताओं के बीच उनकी पहुंच बनी हुई है. वो भाजपा के लिए यादव मतदाताओं को लामबंद कर सकती हैं.
पति प्रतीक की अचानक मौत से सहानुभूति
इसी साल मई में अपर्णा के पति प्रतीक यादव की 38 साल की उम्र में अचानक मौत हो गई थी. भाजपा के सभी बड़े नेता अपर्णा को सांत्वना देना पहुंचे थे. सीएम योगी भी घर जाकर परिवार से मिले थे. पति की अचानक मौत से उनके लिए पब्लिक में भी सहानुभूति का माहौल बना हुआ है.
वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन त्रिपाठी ने कहा कि लखनऊ में भाजपा के पास नेताओं की कोई कमी नहीं है. यहां की हर सीट पर 10-10 दावेदार पहले से हैं. कह सकते हैं कि यहां से अपर्णा को टिकट मिलना मुश्किल है. अपर्णा जब भाजपा में शामिल हुई थीं, तो कहा गया कि वह मुलायम परिवार को टारगेट करेंगी. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. अभी मैनपुरी से चुनाव नहीं लड़ने की बात कही, यानी वह परिवार के खिलाफ नहीं जाएंगी.
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