गुजरात के नर्मदा जिले में अवैध निर्माण पर प्रशासन का बुलडोजर चला है. ये कार्रवाई स्टैच्यु ऑफ यूनिटी के पास हुई है. जिन अवैध निर्माणों पर एक्शन किया गया है वो वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के बताए जा रहे हैं. प्रशासन का ये एक्शन गरुडेश्वर में हुआ है. आरोप है कि इन अधिकारियों ने अपने लिए आवंटित आवासीय भूखंडों पर कथित रूप से नियमों की अनदेखी करके अपने लिए निर्माण कराए. आपको बता दें कि यह बड़े पैमाने पर तोड़-फोड़ का अभियान, जो पिछले चार-पांच दिनों से चल रहा है, 'स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी' से कुछ ही किलोमीटर दूर प्रमुख ज़मीनों पर कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच चलाया गया. यह सख़्त कार्रवाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वैश्विक ड्रीम प्रोजेक्ट के आस-पास के महत्वपूर्ण पर्यटन क्षेत्र में संस्थागत भ्रष्टाचार के प्रति 'ज़ीरो-टॉलरेंस' (बिल्कुल बर्दाश्त न करने) का कड़ा रुख दिखाती है, जिससे देश के प्रमुख स्थलों की गरिमा बनी रहे.

इस एक्शन पर बीजेपी विधायक दर्शना देशमुख वसावा ने कहा कि 2022 में मुझे न्यूज़ रिपोर्ट से ऐसी घटना के बारे में पता चला. मैंने सदन में इस मामले पर सवाल उठाया था और मुझे बताया गया कि अधिकारियों को बहुत कम दरों पर 13 प्लॉट दिए गए थे. भूपेंद्र पटेल सरकार निष्पक्ष है और सभी को न्याय देती है, इसलिए आज हम यह तोड़-फोड़ की कार्रवाई देख रहे हैं. पंचायत के ज़रिए भी प्लॉट मालिकों को कई नोटिस दिए गए थे. भूपेंद्र पटेल सरकार की यह कार्रवाई सभी के लिए एक मिसाल बनेगी. हैरानी की बात है कि अधिकारी इसी जगह पर प्लॉट क्यों चाहते थे. एक प्लॉट टाउन प्लानिंग ऑफिसर का भी है.
यह विवाद 2019 से जुड़ा हुआ है
खास बात ये है कि यह विवाद 2019 का है, जब तत्कालीन ज़िला कलेक्टर आर. एस. निनामा के कार्यकाल में कुल 13 प्लॉट आवंटित किए गए थे. बहुत कीमती ज़मीनें क्लास 1 और क्लास 2 के अधिकारियों को भारी छूट पर दी गई थीं; इनमें से कुछ अधिकारी रिटायर हो चुके हैं, जबकि कुछ अभी भी एडिशनल कलेक्टर जैसे सीनियर पदों पर काम कर रहे हैं. हालाँकि, लगभग तुरंत ही गड़बड़ियां सामने आईं, जिसके बाद सरकार ने उसी साल छह प्लॉट वापस ले लिए। बाकी बचे सात प्लॉट, जहां विकास कार्य जारी था, उनमें से पांच को मौजूदा सफ़ाई अभियान में पूरी तरह से निशाना बनाया गया है. सूत्रों के अनुसार, वहां 15 से ज़्यादा बेडरूम वाले आलीशान रिज़ॉर्ट और कमर्शियल होटल बनाए जा रहे थे.

सूचना के अधिकार के तहत मामला आया सामने
सूचना के अधिकार के तहत की गई पूछताछ और औपचारिक शिकायतों से आवंटन की शर्तों का व्यापक उल्लंघन उजागर हुआ है. इससे पता चला कि इन वरिष्ठ अधिकारियों ने नगर नियोजन नियमों की पूरी तरह अनदेखी की. अनिवार्य दो साल की समय सीमा के भीतर साधारण पारिवारिक मकान बनाने के बजाय, इन बड़े नौकरशाहों ने अपने पदों का दुरुपयोग करते हुए केवडिया स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के फलते-फूलते स्थानीय पर्यटन बाजार का लाभ उठाने के लिए बहुमंजिला, व्यावसायिक विलासितापूर्ण बंगलों का निर्माण किया. संपत्तियों की आधिकारिक जांच से पता चलता है कि ये वैध सरकारी कर्मचारी आवासों के बजाय व्यावसायिक होमस्टे संचालन के स्पष्ट संकेत थे, जिनमें कई शयनकक्ष और व्यावसायिक किराए के लिए अनुकूलित अलग-अलग लेआउट थे.
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