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कश्मीर में मटन की कमी, पंजाब कैसे हो गया जिम्मेदार? शादियों के सीजन के बीच घाटी में बड़ा संकट

हैदरपोरा के रहने वाले अब्दुल मजीद भट मटन की कमी को देखते हुए अपने बेटे की शादी टालने के बारे में सोच रहे हैं. उनका कहना है, 'मेरे बेटे की शादी 25 जुलाई को होनी है. मैं तय नहीं कर पा रहा हूं कि शादी की दावत का आयोजन करूं या नहीं. हो सकता है कि हमें इसे टालना पड़े.'

कश्मीर में मटन की कमी, पंजाब कैसे हो गया जिम्मेदार? शादियों के सीजन के बीच घाटी में बड़ा संकट
कश्मीर में मटन की कमी के कारण शादियों का जश्न फीका पड़ रहा है.
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Srinagar News: कश्मीर घाटी में इन दिनों शादियों का सीजन अपने पूरे शबाब पर है, लेकिन 'वाजवान' के बिना अधूरा रहने वाला यह जश्न इस बार एक गंभीर संकट के साये में है. पिछले 9 दिनों से कश्मीर में मटन की भारी किल्लत है और यह संकट अब इतना गहरा गया है कि व्यापारियों ने परिवारों से अपनी शादी की तारीखें आगे बढ़ाने की अपील तक कर दी है.

क्यों हुई मटन की किल्लत?

इस किल्लत के पीछे ऑल कश्मीर होलसेल एंड रिटेल मटन डीलर्स की हड़ताल है, जो 23 जून 2026 से जारी है. ऑल कश्मीर होलसेल एंड रिटेल मटन डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष खाजिर मोहम्मद रेगू ने बताया, 'कश्मीर घाटी अपनी मटन की खपत का एक बड़ा हिस्सा दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा और पंजाब की मंडियों से इंपोर्ट करके पूरा करती है. इन सभी राज्यों से भेड़-बकरियां लेकर आने वाले ट्रकों के लिए पंजाब का नेशनल हाईवे ही इकलौता ट्रांजिट रूट है.'

पंजाब में अवैध वसूली का आरोप

रेगू का आरोप लगाते हुए कहा, 'जब उनके ट्रक पंजाब के शंभू बॉर्डर और माधोपुर चेकपोस्ट से गुजरते हैं, तो वहां के ठेकेदार और स्थानीय अधिकारी उनसे 20 से 25 हजार रुपये प्रति ट्रक की अवैध करते हैं. जब वे इसका विरोध करते हैं तो ड्राइवरों के साथ मारपीट की जाती है और गाड़ियों को घंटों के लिए रोक दिया जाता है, जिससे दम घुटने के कारण ट्रकों में ही सैकड़ों भेड़-बकरियां मर जाती है.' एसोसिएशन ने इसे 'गुंडा टैक्स' करार देते हुए कहा कि पंजाब सरकार द्वारा कोई भी टैक्स लगाना सही नहीं है, क्योंकि पशु राजस्थान या दिल्ली से खरीदे जाते हैं.

एसोसिएशन ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक सरकार इस मुद्दे पर ठोस कदम नहीं उठाती, तब तक किसी भी मंडी से मटन का कोई भी ट्रक जम्मू-कश्मीर के लिए रवाना नहीं होगा.

सीएम उमर अब्दुल्ला ने लिया एक्शन

बढ़ते जन आक्रोश और शादियों के सीजन को देखते हुए जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मामले में दखल दिया है. उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को पत्र लिखकर इन समस्याओं से अवगत कराया है. मुख्यमंत्री ने पंजाब सरकार से आग्रह किया है कि वे इस अनधिकृत लेवी पर तत्काल रोक लगाएं और ट्रांसपोर्ट वाहनों की आवाजाही को बिना किसी बाधा के सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाएं. उन्होंने साफ कहा है कि यदि पंजाब सरकार ने जल्द सख्त कदम नहीं उठाए, तो वे इस मामले को उत्तरी क्षेत्रीय परिषद के समक्ष उठाएंगे.

कश्मीर की शादियों में मटन का खास महत्व है. एक औसत कश्मीरी शादी में लगभग 500 किलोग्राम से लेकर एक टन तक मटन की खपत होती है. 

व्यापारियों ने खड़े किए हाथ

व्यापारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे बाजार में मटन की कीमतें बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं. उन्होंने कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य केवल सरकार से इंसाफ और सुरक्षित रास्ता मांगना है. सप्लाई बंद होने से उन्हीं का ज्यादा नुकसान हो रहा है. बडगाम के मटन कारोबारी अल्ताफ गनई ने बताया, 'पंजाब सरकार की वजह से पैदा हुई दिक्कतों के कारण हमें मटन की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है. अगर यही हालात बने रहे, तो मैं शादी के इस मौसम में अपने ग्राहकों को पशुओं की आपूर्ति नहीं कर पाऊंगा. अगर अगले 15 दिनों में गतिरोध दूर नहीं हुआ, तो लाखों रुपये का नुकसान हो जाएगा.

फिलहाल, कश्मीर की मटन मंडियां 'शटडाउन' पर हैं और जब तक प्रशासन स्तर पर कोई ठोस समाधान नहीं निकलता, तब तक ट्रकों का संचालन शुरू करना संभव नहीं है. एसोसिएशन अब सरकार की ओर से एक डेलिगेशन और त्वरित प्रशासनिक कार्रवाई की उम्मीद कर रही है.

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