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ना पत्नी का नाम सही, न जहाज का....नाविक राकेश चौहान का शव रिसीव करने में भी हुई धांधली

वेनेजुएला में भारतीय नाविक राकेश चौहान की मौत का मामला उलझता ही जा रहा है.फेडरेशन ऑफ सीफेरर्स यूनियंस ऑफ इंडिया ने इस मामले में कई अनियमितताओं की ओर इशारा करते हुए भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय से मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है.

ना पत्नी का नाम सही, न जहाज का....नाविक राकेश चौहान का शव रिसीव करने में भी हुई धांधली
नई दिल्ली:

उत्तर प्रदेश के देवरिया निवासी नाविक राकेश चौहान की मौत की गुत्थी सुलझने की नाम नहीं ले रही है. कुछ दिन पहले उनका वेनेजुएला में निधन हो गया था. वहां से उनका शव जब देवरिया पहुंचा तो परिजनों ने जिला प्रशासन से उसका दोबारा पोस्टमार्टम करवाने का अनुरोध किया. दोबारा पोस्टमार्टम में पता चला कि शव से ब्रेन, हार्ट, दोनों फेफड़े, लिवर और किडनी जैसे अंग गायब हैं. यह देखकर परिजन हैरान रह गए. उन्होंने सरकार से इस मामले की विस्तृत जांच कराने की मांग की है. इस बीच मर्चेंट नेवी में काम करने वाले लोगों के संगठन फेडरेशन ऑफ सीफेरर्स यूनियंस ऑफ इंडिया इस मामले में कई अनियमितताएं पाई हैं. संगठन ने वेनेजुएला स्थित भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय से मांग की है कि वेनेजुएला से विस्तृत पोस्टमार्टम रिपोर्ट मंगवाएं और इस मामले की स्वतंत्र जांच करवाएं.

फेडरेशन ऑफ सीफेरर्स यूनियंस ऑफ इंडिया ने क्या मांग की है

फेडरेशन ऑफ सीफेरर्स यूनियंस ऑफ इंडिया ने राकेश चौहान के मामले में कई ट्वीट किए हैं. बुधवार को किए एक ट्वीट में संगठन ने कहा है कि मृतक राकेश चौहान के परिवार ने इस मामले की विस्तार से जांच कराने की मांग की है.संगठन का कहना है कि वेनेजुएला में इस मामले में कई गंभीर अनियमितताएं हुई हैं. संगठन का कहना है कि ऐसे कई सवाल उठ रहे हैं,जिनके जवाब आने अभी बाकी हैं. संगठन ने कुछ सवाल उठाए हैं.

  • मृतक के परिवार की सहमति या उन्हें सूचना दिए बिना शव से कई महत्वपूर्ण अंग गायब क्यों हैं. 
  • मृतक के परिवार को ओर से दूसरी बार पोस्टमार्टम कराने से पहले तक परिवार को शव की स्थिति को लेकर अंधेरे में क्यों रखा गया. 
  • शव की रीसीट फर्जी तरीके से तैयार की गई है. उस पर उनकी पत्नी रंजना चौहान की जगह अंजना चौहान के नाम से हस्ताक्षर किए गए हैं.
  • नौकरी के कॉन्टैक्ट में जिस जहाज का नाम दर्ज है, वह उस जहाज से मेल नहीं खाता जिस पर राकेश चौहान को तैनात किया गया था.

संगठन का कहना है कि ये गंभीर विसंगतिया हैं, जो इस मामले की संदिग्ध परिस्थितियों और संभावित साजिश या मामले को दबाने की आशंका को जन्म देती हैं. संगठन ने जानना चाहा है कि आखिर क्या छिपाया जा रहा है?

संगठन ने वेनेजुएला में भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है. उसका कहना है कि वेनेज़ुएला के अधिकारियों से पूरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट लेकर उसे जारी किया जाए. इसके साथ ही किन परिस्थितियों में मौत हुई और शव के साथ की गई प्रक्रिया की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए.संगठन की मांग है कि रोकेश चौहान के परिवार को न्याय दिलाया जाए और दोषियों की जवाबदेही सुनिश्चित की जाए. इसके साथ ही पीड़ित परिवार के लिए उचित मुआवजे की मांग की गई है. 

कहां के रहने वाले थे राकेश चौहान

उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के लंगड़ा बाजार टोला निवासी राकेश चौहान नवंबर 2025 में मर्चेंट नेवी में नौकरी करने के लिए वेनेजुएला गए थे. परिवार वालों ने बताया कि राकेश की मौत की खबर उनके ऑफिस से आई थी. उनसे कहा गया था कि 60 दिन में शव मिल जाएगा. परिवार का कहना है कि ऑफिस से जानकारी मिली थी कि राकेश जहाज पर गिर गए हैं और उन्हें चोट लगी है और उनका इलाज चल रहा है.इसके बाद दूसरे दिन बताया गया कि उनके जिंदा रहने की संभावना 95 फीसदी कम हो गई है. उसी दिन शाम को राकेश चौहान की मौत की खबर उनके परिजनों की दी गई. काफी मुश्किलों के बाद राकेश का शव भारत लाया गया है. 

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वहीं वेनेजुएला के काराकस स्थित भारतीय दूतावास की ओर से जारी पत्र के मुताबिक राकेश रामदेव चौहान की मौत पांच मई को हुई थी. वो फाल्कन स्टेट के क्रूंस मरीन एजेंसी सीए के लिए काम करते थे. काराकस से उनका शव भारत भेजने के प्रक्रिया 27 मई को शुरू हुई थी. उनका शव काराकस से मैड्रिड, इस्तांबुल से होते हुए नई दिल्ली पहुंचा था. उनके शव को दिल्ली में उनकी पत्नी ने चार जून को रिसीव किया था. 
 

राकेश के शव से कौन कौन से अंग गायब थे

परिजनों की मांग पर देवरिया जिला प्रशासन ने राकेश के शव का दोबारा पोस्टमार्टम कराया. फेडरेशन ऑफ सीफेरर्स यूनियंस ऑफ इंडिया ने मंगलवार को ट्विटर पर लिखा था,''भारत में किए गए ऑफिशियल पोस्ट-मॉर्टम की रिपोर्ट से एक डरावनी सच्चाई सामने आई. शव में एक भी ऑर्गन नहीं मिला. ब्रेन, हार्ट, दोनों फेफड़े, लिवर, किडनी, स्प्लीन, पैंक्रियास, पेट, इंटेस्टाइन, थायरॉइड, हायोइड, लैरिंक्स और ट्रैकिया सब गायब थे. शरीर पर पहले से बहुत अधिक टांके लगे थे (गर्दन से प्यूबिक सिम्फिसिस तक 22 टांके  और कान से कान तक 21 टांके). मौत से पहले का कोई चोट शरीर पर नहीं मिला. शरीर को लगभग एक महीने तक डीप फ्रीजर में रखा गया. यह मंजूर नहीं है. नाविक बलि का बकरा बन रहे हैं.''

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