- सुप्रीम कोर्ट में डेटा प्रोटेक्शन कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर गुरुवार को सुनवाई हुई
- चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि डेटा तेजी से करंसी का नया रूप बनता जा रहा है और यह वैश्विक मुद्दा है
- याचिकाकर्ताओं ने कहा कि नए कानून में निजी और व्यक्तिगत डेटा की स्पष्ट परिभाषा नहीं दी गई है
डेटा प्रोटेक्शन कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कई अहम टिप्पणियां कीं. अदालत ने कहा कि यह बहुत जरूरी मुद्दा है और दुनियाभर में इसे लेकर चिंताएं हैं. चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि डेटा तेजी से करंसी का नया रूप लेता जा रहा है.
इस कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि डेटा सुरक्षा से जुड़ा एक वैश्विक मुद्दा है. देश का सारा डेटा विदेश जा रहा है. यह एक बेहद जरूरी मुद्दा है जिसे प्राथमिकता दी जानी चाहिए.
कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं को चीफ जस्टिस के सामने उठाते हुए सीनियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह ने कहा कि इस कानून में 'निजी और व्यक्तिगत डेटा' की कोई परिभाषा नहीं दी गई है. उन्होंने कहा कि आईटी एक्ट के तहत लोगों को डेटा प्राइवेसी के उल्लंघन के लिए मुआवजा मांगने का अधिकार था. लेकिन अब यह नया एक्ट कहता है कि मुआवजा राज्य को या डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड को दिया जाएगा. ऐसे में यहां डेटा प्रोटेक्शन की निगरानी के लिए कोई ट्रिब्यूनल नहीं है. इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि इसकी निगरानी की जाएगी. एक अर्ध-न्यायिक बोर्ड होगा और वह न्यायिक समीक्षा के अधीन होगा.
सीनियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह ने कहा कि डेटा की संप्रभुता के लिए इस पर भी विचार करना होगा कि क्या डेटा विदेश जा रहा है और उसे कैसे सुरक्षित रखा जा रहा है? उन्होंने कहा कि डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड की भूमिका और डेटा प्राइवेसी के उल्लंघन पर मुआवजे के मुद्दे पर भी विचार करा चाहिए. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें इन याचिकाओं पर सुनवाई करने का भरोसा दिया.
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