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ईरान-इजरायल युद्ध ने किसान-व्यापारियों को दे दी टेंशन, मुंबई के JNPT पोर्ट पर कंटेनरों की कतार

Iran-Israel War Update: करीब 1,000 से अधिक निर्यात कंटेनर JNPT पर फंसे हुए हैं. इनमें प्याज, अंगूर, केला, पपीता और अन्य फल-सब्जियां शामिल हैं.केवल प्याज के ही 150 से अधिक कंटेनर नासिक और महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों के निर्यातकों के हैं.

ईरान-इजरायल युद्ध ने किसान-व्यापारियों को दे दी टेंशन, मुंबई के JNPT पोर्ट पर कंटेनरों की कतार
  • मुंबई स्थित जवाहर लाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट पर मिडिल ईस्ट युद्ध के कारण निर्यात कंटेनरों की लंबी कतारें लगीं
  • करीब एक हजार निर्यात कंटेनर पोर्ट पर फंसे हैं जिनमें प्याज, अंगूर, केला और पपीता जैसे फल-सब्जियां शामिल
  • दुबई के बंद होने से खाड़ी देशों के लिए शिपमेंट प्रभावित हुए हैं और लगभग तीन सौ कंटेनर वहीं अटके हुए हैं
मुंबई:

मुंबई स्थित जवाहर लाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (JNPT) पर मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध जैसे हालात का गंभीर असर दिखाई दे रहा है.अमेरिका-इजरायल-ईरान तनाव के बीच समुद्री मार्गों और जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे बंदरगाह पर निर्यात कंटेनरों की लंबी कतार लग गई है.सोमवार के बाद से हालात और बिगड़े हैं क्योंकि पहले से रास्ते में रहे कंटेनर भी अब पोर्ट पर पहुंच चुके हैं, लेकिन उन्हें आगे भेजा नहीं जा रहा.

1000 से अधिक निर्यात कंटेनर कहां फंसे?

जानकारी के मुताबिक, करीब 1,000 से अधिक निर्यात कंटेनर JNPT पर फंसे हुए हैं. इनमें प्याज, अंगूर, केला, पपीता और अन्य फल-सब्जियां शामिल हैं.केवल प्याज के ही 150 से अधिक कंटेनर नासिक और महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों के निर्यातकों के हैं. प्रत्येक कंटेनर में औसतन 29–30 टन माल होता है. इस तरह सिर्फ प्याज की ही लगभग 5,400 टन उपज बंदरगाह पर अटकी हुई बताई जा रही है.

ये खेप मुख्य रूप से खाड़ी देशों के लिए भेजी जानी थी, जिनमें से अधिकांश शिपमेंट दुबई के रास्ते जाती हैं. मौजूदा युद्ध जैसे हालात के कारण दुबई का बाजार अस्थायी रूप से बंद है. बताया जा रहा है कि करीब 370 कंटेनर दुबई पहुंचने के बाद भी वहीं अटके हुए हैं. यही मार्ग यूरोपीय देशों के निर्यात के लिए भी इस्तेमाल होता है, जिससे वहां की आपूर्ति भी प्रभावित हुई है.

दो तीन दिनों में स्थिति साफ नहीं हुई तो...

नासवान माल के कारण निर्यातकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ रहा है. कंटेनरों को पोर्ट पर पार्क कर रेफ्रिजरेशन से जोड़े रखने के लिए प्रति कंटेनर लगभग 8,000 रुपये प्रतिदिन का अतिरिक्त खर्च आ रहा है. यदि स्थिति लंबी खिंचती है तो कंटेनर खाली कर माल उतारना पड़ेगा, जिससे प्रति कंटेनर 5,000–6,000 रुपये और खर्च बढ़ेगा. उद्योग से जुड़े लोग चेतावनी दे रहे हैं कि यदि दो-तीन दिनों में स्थिति स्पष्ट नहीं हुई तो माल खराब होने से बचाने के लिए खेप वापस मंगानी पड़ सकती है.

निर्यात बाधित होने का सीधा असर घरेलू बाजार पर भी दिखने लगा है.पहले से ही दबाव में चल रहे प्याज और अन्य फसलों के दामों में और गिरावट की आशंका जताई जा रही है. किसान इसे ‘दोहरी मार' बता रहे हैं,एक ओर उत्पादन लागत में बढ़ोतरी, दूसरी ओर निर्यात नीति को लेकर अनिश्चितता और अब पूरी तरह से ठप निर्यात पड़ गया है.

लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में भी अनिश्चितता बढ़ी है. समुद्री बीमा प्रीमियम में बढ़ोतरी, माल भाड़े में उछाल और भुगतान से जुड़ी दिक्कतों की शिकायतें सामने आ रही हैं. कुछ निर्यातकों ने यह भी दावा किया है कि बाजार में कुछ बिचौलिये ‘वैकल्पिक मार्ग' या ‘तुरंत क्लीयरेंस' के नाम पर भ्रामक प्रस्ताव दे रहे हैं, जिनसे सतर्क रहने की सलाह दी गई है.

केंद्र सरकार से मदद की आस 

इस बीच Horticulture Produce Exporters Association ने Agriculture and Processed Food Products Export Development Authority (APEDA) से मांग की है कि पोर्ट पर फंसे कंटेनरों की पार्किंग और प्लगिंग का अतिरिक्त खर्च सरकार वहन करे. साथ ही केंद्र सरकार से वैकल्पिक व्यापार मार्ग तलाशने और विशेष आर्थिक राहत पैकेज की घोषणा करने की मांग भी उठाई गई है.फिलहाल निर्यातक अगले 48 से 72 घंटों में स्थिति साफ होने की उम्मीद कर रहे हैं, हालांकि यदि पश्चिम एशिया में हालात नहीं सुधरे तो JNPT पर खड़ी हजारों टन कृषि उपज और उससे जुड़े किसान-व्यापारी गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर सकते हैं.

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