
गौरतलब है कि असम में एनआरसी के मुद्दे पर बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी के बीच जमकर बहस हो चुकी है. ममता बनर्जी का कहना है कि चुनाव से पहले बीजेपी ऐसे हथकंडे अपना रही है. ममता ने आरोप लगाया, 'हर राज्य में बाहर से आये लोग रहते हैं. असम में संवाद की सभी सेवाएं बंद कर दी गई हैं. महिलाओं और बच्चों को जेल भेज दिया गया है. यह एक चुनावी राजनीति है'. NRC is the only option to save Bengali Hindus from annihilation from West Bengal. Bangladeshi Hindus who have faced several atrocities are coming here & Citizenship Amendment Bill would be helpful for them: RSS West Bengal secretary Jishnu Basu pic.twitter.com/ShRzid1Dt3
— ANI (@ANI) September 18, 2018
On the other hand, if we allow Bangladeshi Muslims to come to West Bengal, then in several districts Hindus are becoming minority. If we don't have NRC, we will not be able to assess the no. of infiltrators: RSS West Bengal secretary Jishnu Basu
— ANI (@ANI) September 18, 2018
BLOG : एनआरसी, बात निकली तो बहुत आगे जाती दिखने लगी...
सीएम ममता बनर्जी ने बीजेपी से सवाल किया कि क्या हिलसा मछली, जामदानी साड़ी, संदेश और मिष्टी दोई, जो मूल रूप से बांग्लादेश के हैं, को भी घुसपैठिया या शरणार्थी करार दिया जाएगा? गौरतलब है कि संदेश और मिष्टी दोई मशहूर बंगाली मिठाइयां हैं. वहीं आरएसएस से बीजेपी में आए पार्टी के महासचिव राम माधव का कहना है असम में राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण (एनआरसी) की अंतिम सूची में शामिल नहीं किए जाने वाले लोगों का मताधिकार छीन लिया जाएगा और उन्हें वापस उनके देश भेज दिया जाएगा. वहीं असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने कहा कि एनआरसी को पूरे भारत में लागू किया जाए.
Bordering districts in West Bengal are most affected areas. We are trying to make small groups to help propagate facts about NRC and Citizenship Amendment Bill. We are a social organisation, we can only make people aware of facts: RSS West Bengal secy Jishnu Basu pic.twitter.com/lWYTZITEcG
— ANI (@ANI) September 18, 2018
NRC में शामिल नहीं किए जाने वाले लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाएंगे : राम माधव
इन सबके बीच बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह भी इस मुद्दे को लेकर काफी सक्रिय हैं. उन्होंने उत्तर प्रदेश में एक सभा को संबोधित करते हुये कहा, 'सपा, बसपा और कांग्रेस पार्टी जवाब दें कि वो बांग्लादेशी घुसपैठियों को देश से निकालना चाहते हैं कि नहीं.' इससे पहले उन्होंने इस मुद्दे पर संसद में बहस के दौरान अमित शाह ने कहा था कि, 14 अगस्त 1985 को गांधी ने असम समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद 15 अगस्त को लाल किले से इसकी घोषणा की थी. उन्होंने कहा ‘‘समझौते में कहा गया है कि अवैध घुसपैठियों की पहचान कर, उनको हमारे नागरिक रजिस्टर से अलग कर एक शुद्ध नेशनल सिटीजन रजिस्टर बनाया जायेगा.’
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शाह ने कहा कि एनआरसी बनाने की यह पहल पूर्व प्रधानमंत्री के फैसले के अनुपालन में ही की गयी है. उन्होंने कांग्रेस पर इसे लागू करने की हिम्मत नहीं दिखाने का आरोप लगाते हुये कहा कि एनआरसी को लागू करने की प्रक्रिया पूरी तरह से सुप्रीम कोर्ट के आदेश से बंधी हुयी है. शाह ने एनआरसी से 40 लाख लोगों का नाम हटाये जाने के विपक्ष के आरोप पर पलटवार करते हुये कहा ‘ये 40 लाख लोग कौन हैं. इनमें बांग्लादेशी घुसपैठिये कितने हैं. मैं पूछना चाहता हूं कि क्या आप बांग्लादेशी घुसपैठियों को बचाना चाहते हैं.’
VIDEO : शरणार्थी-घुसपैठिए की सियासत
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