महिला और उसकी नाबालिग बेटी के साथ सामूहिक दुष्कर्म (Gang Rape) के मामले के आरोपी उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति (Gayatri Prajapati) को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से राहत नहीं मिली. अदालत ने उन्हें इलाज के लिए अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया. गायत्री प्रजापति ने बीमारियों का हवाला देकर तीन महीने के लिए अंतरिम जमानत देने की मांग की थी. प्रजापति का कहना था कि लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज में उसकी परेशानी का सही इलाज उपलब्ध नहीं है. लिहाजा उसे दिल्ली के एम्स या भैलौर में इलाजे कराने के लिए तीन महीने के लिए अंतरिम जमानत दी जाए. लेकिन पीठ ने इनकार कर दिया. कोर्ट ने प्रजापति से कहा कि वे इलाहाबाद हाईकोर्ट जा सकते हैं.
इससे पहले सितंबर 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के पूर्व खनन मंत्री और गैंगरेप मामले के आरोपी गायत्री प्रजापति को मेडिकल ग्राउंड पर दो महीने की अंतरिम जमानत देने का इलाहाबाद हाई कोर्ट का आदेश रद्द कर दिया था. जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस आर सुभाष रेड्डी और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने यूपी सरकार की अपील पर फैसला सुनाते हुए कहा था कि हाई कोर्ट का तीन सितंबर 2020 का आदेश संतोषजनक नहीं है.
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प्रजापति समाजवादी पार्टी सरकार में मंत्री थे. उन पर अन्य लोगों के साथ एक महिला का रेप करने और उसकी नाबालिग बेटी से छेड़छाड़ करने के प्रयास के आरोप हैं.
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने अपने आदेश में कहा कि हाई कोर्ट ने प्रजापति को मिल रहा इलाज अपर्याप्त होने और उन्हें किसी खास मेडिकल कॉलेज से आगे इलाज की जरूरत के लिए मेडिकल ग्राउंड पर अंतरिम राहत देने के बारे में अपनी संतुष्टि दर्ज नहीं की है. बेंच ने कहा कि हाई कोर्ट ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध सारी सामग्री पर विचार किए बगैर ही तीन सितंबर, 2020 का आदेश पारित कर दिया, इसलिए हम अपील स्वीकार करते हैं और तीन सितंबर का आदेश रद्द करते हैं.
बेंच ने प्रजापति के वकील की इस दलील पर भी विचार किया कि हर किसी को, भले ही वह किसी गंभीर अपराध में आरोपी ही हो, जेल प्राधिकारियों की ओर से मानवीय तरीके से पेश आने की अपेक्षा की जाती है. बेंच ने कहा कि इस बारे में कोई दो राय नहीं हो सकती. कानून के तहत आरोपी सहित सभी के साथ मानवीय व्यवहार होना चाहिए. यही नहीं, गंभीर बीमारी से ग्रस्त मरीज को जेल में उचित इलाज उपलब्ध कराया जाना चाहिए.
इस मामले में सुनवाई के दौरान यूपी सरकार ने शीर्ष अदालत को बताया कि प्रजापति को हर तरह की मेडिकल सुविधा और इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है.
शीर्ष अदालत ने 21 सितंबर 2020 को प्रजापति को उच्च न्यायालय द्वारा तीन सितंबर को दी गई दो महीने की अंतरिम जमानत पर रोक लगा दी थी. प्रजापति के खिलाफ गौतमपल्ली थाने में 2017 में सामूहिक बलात्कार का मामला दर्ज किया गया था और उन्हें 15 मार्च 2017 को गिरफ्तार कर लिया गया था.
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