नई दिल्ली:
देश के अब तक के सबसे बड़े रक्षा ठेके में फ्रांसीसी विमानन कम्पनी दसॉ राफेल ने चार साल से अधिक समय तक चली प्रतिस्पर्धा में जीत हासिल कर ली। दसॉ ने भारतीय वायु सेना को 52 हजार करोड़ रुपये (10.4 अरब डॉलर) में 126 लड़ाकू विमानों की आपूर्ति करने का ठेका हासिल किया।
इस ठेके के लिए बोली की अंतिम प्रक्रिया में दसॉ के मुकाबले यूरोपीय कम्पनी ईएडीएस कासेडियन यूरोफाइटर रह गई थी, लेकिन कम राशि की बोली के बल पर दसॉ के रफाल लड़ाकू विमान ने यूरोफाइटर के टाइफून को पछाड़ दिया।
रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने दसॉ द्वारा लगाई गई सबसे कम बोली का हवाला देते हुए कहा, "दसॉ को बता दिया गया है कि वह 126 बहुउद्देश्यीय विमानों की आपूर्ति का ठेका जीत चुका है।"
अधिकारी ने हालांकि कहा कि इस सौदे पर अगले कारोबारी साल में ही हस्ताक्षर हो सकेगा।
दो इंजनों वाले रफाल विमान में डेल्टा आकार के डैने हैं। इसका निर्माण वर्ष 2000 में हुआ था। इसके बाद से इसका उत्पादन फ्रांस की वायु सेना और नौ सेना के लिए होता रहा है। कम्पनी हालांकि इस विमान का निर्यात करने के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए अभी तक कोई विदेशी ठेका नहीं मिला।
ठेके के प्रावधान के मुताबिक इसे हासिल करने वाली कम्पनी को कुल राशि का आधा वापस भारतीय रक्षा उद्योग में निवेश करना है।
ठेके की शर्तों के मुताबिक 18 विमानों को तैयार अवस्था में उड़ाकर देश लाया जाएगा, जबकि 108 विमानों का निर्माण प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौते के तहत हिंदुस्तान एरॉनॉटिक्स लिमिटेड द्वारा किया जाएगा।
पहले 18 विमानों की आपूर्ति 36 महीनों में की जाएगी। ठेके की शर्तो के तहत विमानों की संख्या को बढ़ाकर 200 तक किया जा सकता है और इसके लिए कीमत बढ़ाई नहीं जाएगी।
अब अगले 10 से 15 दिनों में कम्पनी के साथ कीमत पर फैसला किया जाएगा।
जानकार सूत्रों के मुताबिक महंगाई के असर के कारण कीमत बढ़कर 15 अबर डॉलर तक पहुंच सकती है। इसमें प्रशिक्षण तथा रखरखाव का खर्च भी शामिल है।
ठेके के लिए प्रतियोगिता कर रही चार अन्य कम्पनियों के विमानों में अमेरिकी कम्पनी लॉकहीड मार्टीन का एफ-16, बोइंग का एफ/ए-18, रूसी युनाईटेड एयरक्राफ्ट कारपोरेशन का मिग-35 और स्वीडन की कम्पनी साब का ग्रिपेन शामिल हैं।
इसके अलावा दसॉ ने वायु सेना के फ्रांस में निर्मित मिराज-2000 लड़ाकू विमान के बेड़े के आधुनिकीकरण का ठेका भी जीत लिया है। यह ठेका 1.4 अरब डॉलर का है।
इस ठेके के लिए बोली की अंतिम प्रक्रिया में दसॉ के मुकाबले यूरोपीय कम्पनी ईएडीएस कासेडियन यूरोफाइटर रह गई थी, लेकिन कम राशि की बोली के बल पर दसॉ के रफाल लड़ाकू विमान ने यूरोफाइटर के टाइफून को पछाड़ दिया।
रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने दसॉ द्वारा लगाई गई सबसे कम बोली का हवाला देते हुए कहा, "दसॉ को बता दिया गया है कि वह 126 बहुउद्देश्यीय विमानों की आपूर्ति का ठेका जीत चुका है।"
अधिकारी ने हालांकि कहा कि इस सौदे पर अगले कारोबारी साल में ही हस्ताक्षर हो सकेगा।
दो इंजनों वाले रफाल विमान में डेल्टा आकार के डैने हैं। इसका निर्माण वर्ष 2000 में हुआ था। इसके बाद से इसका उत्पादन फ्रांस की वायु सेना और नौ सेना के लिए होता रहा है। कम्पनी हालांकि इस विमान का निर्यात करने के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए अभी तक कोई विदेशी ठेका नहीं मिला।
ठेके के प्रावधान के मुताबिक इसे हासिल करने वाली कम्पनी को कुल राशि का आधा वापस भारतीय रक्षा उद्योग में निवेश करना है।
ठेके की शर्तों के मुताबिक 18 विमानों को तैयार अवस्था में उड़ाकर देश लाया जाएगा, जबकि 108 विमानों का निर्माण प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौते के तहत हिंदुस्तान एरॉनॉटिक्स लिमिटेड द्वारा किया जाएगा।
पहले 18 विमानों की आपूर्ति 36 महीनों में की जाएगी। ठेके की शर्तो के तहत विमानों की संख्या को बढ़ाकर 200 तक किया जा सकता है और इसके लिए कीमत बढ़ाई नहीं जाएगी।
अब अगले 10 से 15 दिनों में कम्पनी के साथ कीमत पर फैसला किया जाएगा।
जानकार सूत्रों के मुताबिक महंगाई के असर के कारण कीमत बढ़कर 15 अबर डॉलर तक पहुंच सकती है। इसमें प्रशिक्षण तथा रखरखाव का खर्च भी शामिल है।
ठेके के लिए प्रतियोगिता कर रही चार अन्य कम्पनियों के विमानों में अमेरिकी कम्पनी लॉकहीड मार्टीन का एफ-16, बोइंग का एफ/ए-18, रूसी युनाईटेड एयरक्राफ्ट कारपोरेशन का मिग-35 और स्वीडन की कम्पनी साब का ग्रिपेन शामिल हैं।
इसके अलावा दसॉ ने वायु सेना के फ्रांस में निर्मित मिराज-2000 लड़ाकू विमान के बेड़े के आधुनिकीकरण का ठेका भी जीत लिया है। यह ठेका 1.4 अरब डॉलर का है।
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