नई दिल्ली:
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने केंद्रीय सतर्कता आयुक्त (सीवीसी) के पद पर पीजे थॉमस की नियुक्ति रद्द किए जाने के मामले को लेकर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर एक बार फिर निशाना साधते हुए कहा है कि उनकी सरकार की विश्वसनीयता गर्त में चली गई है। आडवाणी ने अपने ब्लॉग पर लिखा है, "किसी भी व्यक्ति अथवा संगठन के लिए विश्वसनीयता काफी महत्वपूर्ण होती है। मैं कहना चाहता हूं कि मनमोहन सिंह सरकार की विश्वसनीयता इस समय गर्त में चली गई है।" आडवाणी ने कहा कि राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील ने पिछले गुरुवार को सीवीसी थॉमस की नियुक्ति को आधिकारिक तौर पर रद्द कर दिया था। राष्ट्रपति ने ऐसा सम्भवत: इसलिए किया क्योंकि देश के सर्वोच्च न्यायालय ने सीवीसी की नियुक्ति को 'गैरकानूनी' ठहराया था। आडवाणी ने कहा कि पूर्व दूरसंचार मंत्री ए. राजा का मुद्दा हो या फिर थॉमस, हसन अली या राष्ट्रमंडल खेलों से जुड़े अधिकारियों का, सभी मामलों में सरकार की बजाय उच्च न्यायालय ने कदम उठाया है। उन्होंने कहा, "जिस तरह वर्ष 2010 को घोटालों का वर्ष करार दिया जा रहा है उसी प्रकार वर्ष 2011 को जिम्मेदारियों का वर्ष घोषित कर दिया जाना चाहिए।" आडवाणी ने कहा कि उन्होंने छह दिसम्बर, 1992 में विवादित बाबरी ढांचे को गिराए जाने को अपने जीवन का 'सबसे दुखद दिन' करार दिया था। बाद में मेरे इस बयान को लेकर मेरी आलोचना करते हुए पार्टी के कुछ सदस्यों ने इस पर कड़ी आपित्त जताई थी। बकौल आडवाणी, "मैंने उन्हें कहा था वास्तव में अयोध्या आंदोलन को लेकर मुझे अपनी पार्टी पर गर्व है लेकिन बाद में मुझे इस बात को लेकर बेहद दुख पहुंचा था कि छह दिसम्बर की घटना के बाद पार्टी की विश्वसनीयता को काफी धक्का पहुंचा था।"
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