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This Article is From Aug 31, 2025

गर्दन की मोटाई से लगा सकते हैं बड़ी बीमारियों का पता, स्टडी में चौंकाने वाला दावा

Medical Signs of Neck Shape: गर्दन का आकार भी हार्ट रोग, डायबिटीज और नींद संबंधी विकारों को लेकर आपको चेताता है. अध्ययन में एक चौंकाने वाला तथ्य भी सामने आया है.

गर्दन की मोटाई से लगा सकते हैं बड़ी बीमारियों का पता, स्टडी में चौंकाने वाला दावा
मोटी गर्दन हेल्दी बीएमआई वाले लोगों के लिए भी परेशानी का सबब बन सकती है.

वेस्ट लाइन ही नहीं अगर आप अच्छी सेहत चाहते हैं तो नेक साइज पर भी ध्यान देना जरूरी है. एक स्टडी इस पर मुहर लगाती है. जिसके, मुताबिक गर्दन का आकार भी हार्ट रोग, डायबिटीज और नींद संबंधी विकारों को लेकर आपको चेताता है. अध्ययन में एक चौंकाने वाला तथ्य भी सामने आया है. मोटी गर्दन हेल्दी बीएमआई (बॉडी मास इंडेक्स) वाले लोगों के लिए भी परेशानी का सबब बन सकती है. वजह बीएमआई की कुछ सीमाएं हैं. उदाहरण के लिए यह मांसपेशियों और फैट्स में अंतर नहीं कर सकता, न ही यह बताता है कि शरीर में फैट कहां जमा है.

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गर्दन की गोलाई कैसे देती है खराब हेल्थ का संकेत?

किंग्स्टन विश्वविद्यालय के डॉ. अहमद एल्बेदीवी और डॉ. नादिन वेहिदा ने 'द कन्वर्सेशन' में कई रिसर्च के आधार पर एक लेख लिखा है. उन्होंने लिखा, "एक कॉम्पिटेटिव बॉडीबिल्डर का बीएमआई हाई हो सकता है, लेकिन वह साफतौर से मोटापे से ग्रस्त नहीं है." गर्दन की गोलाई यानी गर्दन के चारों ओर की माप, जो आमतौर पर इंच या सेंटीमीटर में ली जाती है, शरीर में फैट के जमाव, खासतौर से ऊपरी शरीर में जमा फैट, का संकेत देती है. रिसर्च के मुताबिक मोटी गर्दन हार्ट रोग, नींद संबंधी बीमारियों और डायबिटिज का संकेत देती है.

शोध में पाया गया है कि जिन लोगों की गर्दन ज्यादा मोटी होती है, उनमें हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. शोधकर्ताओं ने ये भी कहा है कि हर व्यक्ति के लिए इसका माप अलग-अलग हो सकता है, लेकिन सामान्य रूप से पुरुषों के लिए 38 सेमी. से कम (लगभग 15 इंच) और महिलाओं के लिए 35 से.मी. या उससे कम (लगभग 13.8 इंच) होना चाहिए.

अगर आपकी गर्दन की माप इससे ज्यादा है, तो यह संकेत हो सकता है कि शरीर में फैट असंतुलित रूप से जमा हो रहा है. 2022 में शोधकर्ताओं ने मोटी गर्दन को एट्रियल फिब्रिलेशन से जोड़ा. यह एक ऐसी स्थिति है जो इर्रेगुलर हार्ट बीट का कारण होती है. इससे थकान बढ़ती है, स्ट्रोक का खतरा बढ़ता है, ब्लड क्लॉटिंग और हार्ट रेट रुकने से मौत भी हो सकती है.

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तो सवाल यही है कि इससे बचाव कैसे हो. तरीका सरल है. हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाएं और अच्छा खाएं. रेगुलर एक्सरसाइज करें, खासतौर से कार्डियो और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग पर ध्यान दें. स्लीप एप्निया या खर्राटों जैसी समस्याओं को नजरअंदाज न करें और गर्दन के आकार को मापते रहें, क्योंकि सेहत की कुंजी आपकी गर्दन में भी छुपी है.

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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