World Hemophilia Day 2026: हीमोफीलिया एक ऐसी गंभीर बीमारी है जिसके बारे में आमतौर पर लोगों को ज्यादा जानकारी नहीं होती. इस बीमारी में शरीर में खून को जमाने वाले जरूरी क्लॉटिंग फैक्टर की कमी हो जाती है, जिससे छोटी-सी चोट भी लंबे समय तक खून बहने का कारण बन सकती है. कई बार बिना किसी बाहरी चोट के भी शरीर के अंदर ब्लीडिंग शुरू हो जाती है, जो धीरे-धीरे जानलेवा स्थिति बना सकती है. यही वजह है कि इसके शुरुआती लक्षणों को पहचानना बहुत जरूरी है. हर साल 17 अप्रैल को वर्ल्ड हीमोफीलिया डे मनाया जाता है, ताकि लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक किया जा सके और समय पर टेस्ट और इलाज की इंपोर्टेंस को समझाया जा सके.
क्या है हीमोफीलिया? | What is Hemophilia?
हीमोफीलिया एक जेनेटिक ब्लीडिंग डिसऑर्डर है, जिसमें शरीर में खून के थक्के (Clot) बनने की प्रक्रिया सही तरीके से नहीं हो पाती. इसका मतलब यह है कि जब भी शरीर को चोट लगती है, तो खून सामान्य से ज्यादा समय तक बहता रहता है. यह समस्या ज्यादातर पुरुषों में देखी जाती है, जबकि महिलाएं इसके जीन की वाहक (Carrier) होती हैं.

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हीमोफीलिया के इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें | Do Not Ignore These Symptoms of Hemophilia
1. बार-बार नीले निशान पड़ना
अगर बिना किसी खास चोट के शरीर पर बार-बार नीले या काले निशान दिखने लगें, तो यह सामान्य नहीं है. खासकर बच्चों में यह हीमोफीलिया का शुरुआती संकेत हो सकता है.
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2. छोटी चोट में भी ज्यादा खून बहना
अगर मामूली कट या चोट के बाद खून जल्दी बंद नहीं होता और लंबे समय तक बहता रहता है, तो यह एक चेतावनी संकेत है जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
3. नाक और मसूड़ों से खून आना
बार-बार नाक से खून निकलना या ब्रश करते समय मसूड़ों से खून आना भी इस बीमारी की ओर इशारा कर सकता है.
4. इंजेक्शन या वैक्सीनेशन के बाद ब्लीडिंग
अगर इंजेक्शन लगने के बाद लंबे समय तक खून बहता रहे, तो यह सामान्य नहीं है और तुरंत जांच करानी चाहिए.
5. जोड़ों में दर्द और सूजन
घुटनों, कोहनियों या टखनों में बिना वजह दर्द और सूजन होना अंदरूनी ब्लीडिंग का संकेत हो सकता है. यह कंडीशन लंबे समय तक रहने पर जोड़ों को परमानेंट नुकसान पहुंचा सकती है.
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6. पेशाब या मल में खून आना
यह एक गंभीर संकेत है जो शरीर के अंदर हो रही ब्लीडिंग को दर्शाता है. ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है.

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बच्चों में क्यों ज्यादा दिखती है समस्या?
जब बच्चे रेंगना या चलना शुरू करते हैं, तब उनके शरीर पर चोट लगना सामान्य बात है. लेकिन, अगर हर छोटी-सी एक्टिविटी के बाद शरीर पर निशान पड़ने लगें या खून ज्यादा बहने लगे, तो यह सामान्य नहीं है. ऐसे संकेतों को समय रहते पहचानना बेहद जरूरी है.
जेनेटिक कारण और रिस्क
हीमोफीलिया ज्यादातर मामलों में जेनेटिक होता है, यानी यह परिवार में पीढ़ी दर पीढ़ी चलता है. अगर परिवार में किसी को यह बीमारी है, तो बच्चों में इसके होने की संभावना बढ़ जाती है. हालांकि, कुछ मामलों में बिना फैमिली हिस्ट्री के भी यह समस्या सामने आ सकती है.
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समय पर जांच क्यों है जरूरी?
हीमोफीलिया की पहचान के लिए नॉर्मल ब्लड टेस्ट ही काफी होता है. डॉक्टर यह टेस्ट करते हैं कि खून जमने में कितना समय लग रहा है और क्लॉटिंग फैक्टर का लेवल कितना है. अगर समय रहते बीमारी का पता चल जाए, तो सही इलाज शुरू करके सीरियस रिस्क से बचा जा सकता है.
हीमोफीलिया एक ऐसी बीमारी है जिसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है. इसके लक्षण अक्सर सामान्य लगते हैं, लेकिन इनके पीछे छिपा खतरा बड़ा हो सकता है. जागरूकता, सही समय पर जांच और सही इलाज ही इस बीमारी से बचाव का सबसे बड़ा उपाय है.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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