- मनोज जरांगे पाटिल महाराष्ट्र के जालना जिले में अनिश्चितकालीन आमरण अनशन पर बैठे हैं और उनकी तबीयत गंभीर है
- मनोज जरांगे मराठा समाज को कुनबी प्रमाणपत्र देकर ओबीसी आरक्षण का लाभ देने की मांग कर रहे हैं
- ओबीसी नेता लक्ष्मण हाके ने सरकार को चेतावनी दी है कि ओबीसी आरक्षण में छेड़छाड़ पर तीव्र आंदोलन होगा
महाराष्ट्र के जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव के एक खेत में 30 मई से अनिश्चितकालीन आमरण अनशन पर बैठे मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख चेहरा मनोज जरांगे पाटिल की तबीयत अचानक बिगड़ गई है. दिनभर तेज धूप में बैठने के कारण उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ा है और उन्हें लगातार उल्टियां हो रही हैं. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टरों की एक विशेष टीम तुरंत मौके पर पहुंच गई है और उनके स्वास्थ्य की लगातार जांच की जा रही है.
तबीयत बिगड़ने के बावजूद जरांगे पाटिल अपने रुख पर अड़े हैं. सरकार के साथ हुई पहले दौर की बातचीत बेनतीजा रहने के बाद उन्होंने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा.
OBC नेताओं ने दी तीव्र आंदोलन की चेतावनी
दूसरी ओर, मराठा समाज को OBC श्रेणी से आरक्षण देने की मांग के खिलाफ ओबीसी संगठनों ने भी मोर्चा खोल दिया है. ओबीसी नेता और सामाजिक कार्यकर्ता लक्ष्मण हाके ने राज्य सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि ओबीसी आरक्षण के अधिकारों से छेड़छाड़ की गई, तो राज्यभर में तीव्र आंदोलन शुरू किया जाएगा.

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मनोज जरांगे पाटिल की मुख्य मांग
मराठा समाज के लोगों को बड़े पैमाने पर कुनबी प्रमाणपत्र दिए जाएं, जिससे उन्हें ओबीसी आरक्षण का लाभ मिल सके. उनका आरोप है कि सरकार ने पहले जो आश्वासन दिए थे, उन्हें अब तक पूरी तरह लागू नहीं किया गया है. उन्होंने मांग की है कि मराठवाड़ा सहित राज्य के लाखों मराठाओं को कुनबी प्रमाणपत्र देने की प्रक्रिया तत्काल पूरी की जानी चाहिए.
सरकार की बातचीत रही बेनतीजा
इस बीच राज्य सरकार की ओर से मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ने जरांगे से मुलाकात कर आंदोलन टालने की कोशिश की थी, लेकिन यह बातचीत सफल नहीं हो सकी. सरकार का दावा है कि अब तक 58 लक्ष्मी कुनबी रिकॉर्ड खोजे जा चुके हैं और लगभग 12 लाख प्रमाणपत्र वितरित किए जा चुके हैं. इसके बावजूद जरांगे सरकार के जवाब से संतुष्ट नहीं दिखे और उन्होंने अपना आंदोलन जारी रखने का फैसला किया.
लक्ष्मण हाके का सरकार पर 'पिछले दरवाजे' से आरक्षण देने का आरोप
उधर, लक्ष्मण हाके ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ सरकारी निर्णय संविधान की भावना के खिलाफ हैं और मराठा समाज को “पिछले दरवाजे” से ओबीसी आरक्षण देने की कोशिश की जा रही है. उनका कहना है कि इससे ओबीसी समुदाय के अधिकारों और उनकी हिस्सेदारी पर सीधा असर पड़ेगा. हाके ने यह भी दावा किया कि ओबीसी समाज में भारी नाराजगी है और यदि सरकार ने इस पर अपना रुख स्पष्ट नहीं किया, तो राज्यव्यापी संघर्ष यात्रा और आंदोलन शुरू किया जाएगा.
लक्ष्मण हाके ने कहा कि "मनोज जरांगे ने आज जो आंदोलन शुरू किया है, अगर यह जारी रहता है और ओबीसी समाज की थाली से उनके हक और अधिकार का आरक्षण छीना जाता है, तो हम कल से पूरे ओबीसी समाज की ओर से एक आक्रामक आंदोलन शुरू करेंगे.
सरकार के सामने राजनीतिक और कानूनी चुनौती
राजनीतिक रूप से भी यह मुद्दा सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है. एक तरफ मराठा समाज आरक्षण और कुनबी प्रमाणपत्रों की मांग पर दबाव बढ़ा रहा है, तो दूसरी तरफ ओबीसी संगठन अपने आरक्षण को बचाने के लिए खुलकर मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं. ऐसे में महाराष्ट्र में एक बार फिर 'ओबीसी बनाम मराठा' संघर्ष की स्थिति बनने की आशंका जताई जा रही है.
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