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40 की उम्र के बाद तेजी से घट रही है मसल्स, जानें क्या होता है मसल मास और क्यों है जरूरी?

आज के समय में मसल लॉस की समस्या काफी देखी जा रही है. इससे बचने के लिए बैलेंस डाइट, पर्याप्त प्रोटीन और रेगुलर स्ट्रेंथ ट्रेनिंग बेहद जरूरी है.

40 की उम्र के बाद तेजी से घट रही है मसल्स, जानें क्या होता है मसल मास और क्यों है जरूरी?
क्या होता है मसल मास.
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सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने हाल ही में लंबी भूख हड़ताल के बाद अपना अनशन समाप्त किया. इस दौरान उनका वजन लगभग 11 किलो तक घट गया और डॉक्टरों ने उनके शरीर में भारी मसल मास (Muscle Mass) कम होने की बात कही. लेकिन ये मसल मास आखिर होता क्या है और यह क्यों इतना ज़रूरी है? आपको बता दें कि आजकल 40 की उम्र के आसपास भी लोगों में मसल्स तेजी से कम होने की समस्या यानी सारकोपेनिया देखने को मिल रही है. न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. सुधीर कुमार (MD, DM) ने इस बारे में अहम जानकारी साझा की है. और, लिखा है कि बैलेंस डाइट में पर्याप्त प्रोटीन और रेगुलर स्ट्रेंथ ट्रेनिंग मसल्स का वॉल्यूम और ताकत बनाए रखने में सबसे बड़ी भूमिका निभाते हैं. डॉक्टरों का कहना है कि खराब खानपान, डायबिटीज और फिजिकली इनएक्टिव रहना इस समस्या को तेजी से बढ़ा रहे हैं.

मसल मास क्या है और ये क्यों ज़रूरी है?

​सरल शब्दों में कहें तो हमारे शरीर में हड्डियों, फैट और पानी को छोड़कर मांसपेशियों का जो कुल वजन होता है, उसे ही मसल मास कहते हैं.

क्या है सारकोपेनिया और क्यों बढ़ रहे हैं इसके मामले?

सारकोपेनिया का मतलब है शरीर की मसल्स का धीरे धीरे कम होना. पहले इसे सिर्फ बढ़ती उम्र से जुड़ी प्रॉब्लम माना जाता था. लेकिन अब कम उम्र के लोगों में भी इसके मामले तेजी से सामने आ रहे हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक डायबिटीज, लंबे समय तक स्टेरॉयड का इस्तेमाल, किडनी जैसी पुरानी बीमारियां और सबसे बढ़कर प्रोटीन की कमी इसकी प्रमुख वजह हैं. भारत में ज्यादातर लोगों की डाइट में कार्बोहाइड्रेट ज्यादा और प्रोटीन कम होता है. यही कारण है कि शरीर को मसल्स बनाने और उन्हें बनाए रखने के लिए जरूरी न्यूट्रीशन्स नहीं मिल पाता.

इन संकेतों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें-

अगर आपको पहले के मुकाबले ज्यादा कमजोरी महसूस होने लगे, हाथों की पकड़ कमजोर हो जाए, बार बार चीजें हाथ से गिरने लगें, सीढ़ियां चढ़ने में परेशानी हो, चलने की रफ्तार धीमी पड़ जाए या बार-बार बैलेंस बिगड़ने लगे, तो ये सारकोपेनिया का संकेत हो सकता है. ऐसे लोगों में गिरने और हड्डी टूटने का खतरा भी बढ़ जाता है. डॉक्टर हैंडग्रिप टेस्ट, चेयर सिट-टू-स्टैंड टेस्ट, गेट स्पीड, काफ सर्कमफेरेंस और जरूरत पड़ने पर DEXA स्कैन के जरिए इसकी जांच करते हैं.

सिर्फ वॉक काफी नहीं, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग भी जरूरी-

विशेषज्ञों का कहना है कि केवल सुबह-शाम टहलना मसल्स को बचाने के लिए काफी नहीं है. सप्ताह में 2-3 दिन 15-20 मिनट की स्ट्रेंथ या रेजिस्टेंस ट्रेनिंग मसल्स को मजबूत बनाए रखने में मदद करती है. इसके साथ रोजाना शरीर के वजन के हिसाब से पर्याप्त प्रोटीन, विटामिन D, विटामिन B12, 7 घंटे की नींद और नियमित धूप लेना भी जरूरी है.

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