मेरे पास जिम में जब भी कोई नया क्लाइंट आता है, तो बात शुरू होते ही उसकी जेब से एक जादुई नंबर निकलता है. और मजे की बात यह है कि 10 में से 8 लोगों का वो नंबर बिल्कुल एक जैसा होता है- "सर, बस 10 किलो वजन कम करना है."
मैंने कभी किसी को यह कहते नहीं सुना कि मुझे आठ किलो घटाना है, या साढ़े बारह किलो कम करना है. हर किसी को सीधा 10 का गोल आंकड़ा ही चाहिए होता है.
यह बात अपने आप में बहुत कुछ कह देती है. असल में यह 10 किलो कोई बहुत सोच-समझकर निकाला गया आंकड़ा नहीं होता. यह बस दिमाग में बैठा एक ऐसा नंबर है जो सुनने में काफी गंभीर लगता है और दिल को तसल्ली देता है कि चलो इसे पाना मुमकिन है. लेकिन क्या वजन कम करने के लिए ऐसा नंबर तय करना वाकई फायदेमंद है? सच कहें तो हां भी और ना भी.
टार्गेट बनाना अच्छा क्यों माना जाता है?
रिसर्च बताती है कि अगर आपके पास एक साफ लक्ष्य है, तो आप उन लोगों से बेहतर नतीजे लाते हैं जो बस हवा में तीर चलाते हैं और कहते हैं कि "हां, मुझे फिट होना है."
- "मुझे फिट होना है" एक बहुत धुंधली बात है, इसका कोई सिरा नहीं होता.
- वहीं "मुझे 10 किलो कम करना है" दिमाग को एक दिशा देता है.
- इससे आपको समझ आता है कि हफ्ते भर क्या करना है और क्या छोड़ना है.
इस लिहाज से देखा जाए तो एक नंबर तय करना बिल्कुल सही कदम लगता है. लेकिन असली पेंच इसके बाद शुरू होता है.
कांटे पर दिखने वाला नंबर आपको कैसे धोखा देता है?
दिक्कत तब शुरू होती है जब आप अपनी सारी मेहनत और खुशी को सिर्फ उस वजन नापने वाली मशीन के कांटे से बांध देते हैं. आपको यह बात समझनी होगी कि मशीन पर दिखने वाले वजन पर आपका पूरा कंट्रोल कभी नहीं होता.
- अगर आपने रात को खाने में नमक थोड़ा ज्यादा खा लिया, तो सुबह वजन एक किलो बढ़ा हुआ दिख सकता है.
- शरीर में पानी का जमाव यानी वॉटर रिटेंशन वजन को रातों-रात ऊपर नीचे कर देता है.
- महिलाओं में पीरियड्स के दिनों में वजन का दो से तीन किलो तक बढ़ जाना बिल्कुल सामान्य बात है.
- अगर मंगलवार को आपने बहुत तगड़ी कसरत की है, तो मांसपेशियों में खिंचाव की वजह से शरीर पानी रोक लेता है और बुधवार को वजन ज्यादा दिखता है.
इसका मतलब यह हुआ कि अगर आप रोज सुबह खाली पेट मशीन पर खड़े होकर अपना मूड खराब कर रहे हैं, तो आप एक ऐसे नंबर के गुलाम बन रहे हैं जो हफ्ते में चार बार झूठ बोलता है.
फैट लॉस और वेट लॉस का असली फर्क
वजन की मशीन सबसे बड़ी बेवकूफ होती है. उसे यह नहीं पता होता कि आपके शरीर से चर्बी घटी है या आपकी कीमती मांसपेशियां (मसल्स) गल गई हैं.
मेरे कई ऐसे क्लाइंट्स रहे हैं जिन्होंने 12 हफ्ते तक जमकर पसीना बहाया. उनकी पुरानी पैंट ढीली हो गई, टी-शर्ट की फिटिंग शानदार आने लगी, शरीर की ताकत और स्टैमिना दोगुना हो गया. लेकिन जब 12 हफ्ते बाद वे कांटे पर खड़े हुए, तो वजन 10 किलो की जगह सिर्फ चार किलो कम हुआ था.
अब कायदे से तो उन्हें जश्न मनाना चाहिए था क्योंकि उनका फैट कम हुआ था और अच्छी मांसपेशियां बनी थीं. लेकिन वे मायूस होकर बैठ गए कि "अरे, मेरा तो सिर्फ चार किलो ही घटा, मैं तो फेल हो गया." यह गलत सोच अच्छे-भले इंसान की हिम्मत तोड़ देती है और लोग जिम जाना ही छोड़ देते हैं.
तारीख तय करने का जानलेवा चक्कर
इसके ऊपर से लोग एक और बड़ी गलती करते हैं- डेडलाइन तय करना. "मुझे भाई की शादी तक दो महीने में 10 किलो घटाना है."
जब सिर पर तारीख नाचने लगती है, तो इंसान उल्टी-सीधी हरकतें करने लगता है. खाना-पीना एकदम बंद कर देगा, दिन भर सिर्फ उबली घास-फूस खाएगा या भूखा रहेगा. ऐसी पागलों जैसी डाइटिंग से शरीर का फैट कम हो या न हो, अंदरूनी ताकत जरूर खत्म हो जाती है.
जैसे ही शादी खत्म होती है या क्रैश डाइट बंद होती है, वजन पहले से भी ज्यादा तेजी से वापस लौट आता है. इसे यो-यो इफेक्ट कहते हैं. धीरे-धीरे वजन घटाना ही सबसे टिकाऊ रास्ता है.
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तो फिर सही तरीका क्या है?
मैं अपने हर क्लाइंट को एक सीधी सी सलाह देता हूं- उस 10 किलो वाले नंबर को दिमाग के किसी कोने में लिख कर छोड़ दीजिए, पर रोज-रोज उसकी पूजा करना बंद कर दीजिए.
उस नंबर के बजाय, हर हफ्ते उन चीजों का टार्गेट बनाइये जो पूरी तरह आपके हाथ में हैं:
- हफ्ते में कम से कम चार दिन जिम जाना या 40 मिनट पसीना बहाना.
- हर बार के खाने में कटोरी भर दाल, पनीर, अंडे या सोयाबीन जैसा अच्छा प्रोटीन शामिल करना.
- रोजाना कम से कम आठ से दस हजार कदम पैदल चलना.
- रात को मोबाइल दूर रखकर कम से कम सात घंटे की गहरी और सुकून भरी नींद लेना.
- दिन भर में पर्याप्त पानी पीना ताकि शरीर में पानी की कमी न रहे.
रविवार की शाम को बैठकर खुद से पूछिए कि क्या आपने ये पांच काम ईमानदारी से किए? अगर जवाब हां है, तो यकीन मानिए आप सही रास्ते पर हैं. यह आपकी असली जीत है.
अपनी तरक्की को नापने का नया पैमाना
वजन की मशीन को अलमारी में बंद कर दीजिए और उसे महीने या तीन महीने में सिर्फ एक बार बाहर निकालिए. अपनी प्रगति जांचने के लिए ये आसान तरीके अपनाएं:
- इंची टेप से अपनी कमर और पेट का नाप लें.
- हर पंद्रह दिन में एक जैसी रोशनी में अपनी तस्वीरें खींच कर रखें. कपड़ों की फिटिंग पर ध्यान दें.
- जिम में देखें कि क्या आप पहले से ज्यादा वजन उठा पा रहे हैं? क्या सीढ़ियां चढ़ते वक्त आपकी सांस फूलना बंद हो गई है?
10 किलो वजन घटाने की इच्छा रखना बिल्कुल गलत नहीं है. लेकिन यह आपके पूरे सफर का इकलौता रिपोर्ट कार्ड नहीं हो सकता. जब आप सही आदतों को रोज दोहराना शुरू कर देंगे, तो वजन का कांटा अपने आप झुक जाएगा.
लेखक के बारे में : सुमित दुबे दिल्ली के सर्टिफाइड फिटनेस कोच और Sumit Dubey Fitness (SDF) के संस्थापक हैं. उन्हें फिटनेस ट्रेनिंग और वेट लॉस कोचिंग का 14+ वर्षों का अनुभव है.
FAQs -
क्या 10 किलो वजन कम करने का लक्ष्य बनाना सही है?
लक्ष्य बनाना मददगार हो सकता है, लेकिन सिर्फ वजन की मशीन पर ध्यान देने के बजाय स्वस्थ आदतों और फैट लॉस पर फोकस करना ज्यादा जरूरी है.
Fat Loss और Weight Loss में क्या अंतर है?
Weight Loss में शरीर का कुल वजन कम होता है, जबकि Fat Loss का मतलब शरीर की अतिरिक्त चर्बी कम होना है. फिटनेस विशेषज्ञ Fat Loss को बेहतर मानते हैं.
क्या रोज वजन चेक करना चाहिए?
रोज वजन नापने से शरीर में पानी और अन्य कारणों से उतार-चढ़ाव दिख सकता है. कई विशेषज्ञ सप्ताह या महीने के अंतराल पर प्रगति देखने की सलाह देते हैं.
वजन घटाने की प्रगति कैसे मापें?
कमर का नाप, कपड़ों की फिटिंग, स्टैमिना और ताकत में सुधार भी प्रगति के महत्वपूर्ण संकेत हैं.
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