Causes of Insomnia: आजकल अच्छी नींद लेना किसी लग्जरी से कम नहीं रह गया है. बहुत से लोग दिनभर थके होने के बावजूद जब रात को बिस्तर पर जाते हैं, तो नींद आंखों से कोसों दूर रहती है. करवटें बदलती रहती हैं, दिमाग चलता रहता है और घड़ी की सुइयां आगे बढ़ती जाती हैं. इस समस्या को मेडिकल भाषा में स्लीप ऑनसेट इनसोमनिया कहा जाता है, यानी सोने के लिए लेटने के बाद भी नींद न आना. यह सिर्फ एक छोटी परेशानी नहीं है. लगातार नींद की कमी आपके शरीर और दिमाग दोनों पर गहरा असर डालती है. इसका प्रभाव अगले दिन की एनर्जी, काम करने की क्षमता, मूड और मानसिक स्वास्थ्य पर साफ दिखाई देता है. लंबे समय तक नींद पूरी न होने से तनाव, चिड़चिड़ापन, याददाश्त कमजोर होना और इम्यूनिटी गिरने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं.
क्यों नहीं आती आपको नींद? | Why Can You Sleep?
स्क्रीन टाइम नींद का सबसे बड़ा दुश्मन
आज के दौर में मोबाइल, लैपटॉप और टीवी हमारी जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं. बहुत से लोग सोने से ठीक पहले फोन स्क्रॉल करते हैं या टीवी देखते हुए सो जाते हैं. लेकिन, यही आदत नींद को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाती है.
इन स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी (ब्लू लाइट) शरीर में नींद के हार्मोन मेलाटोनिन के बनने को रोक देती है. दिमाग को यह संकेत मिलता है कि अभी दिन बाकी है और उसे एक्टिव रहना चाहिए. आयुर्वेद में इसे मानसिक अशांति और लाइट से पैदा होने वाला विकार कहा जा सकता है. नतीजा यह होता है कि शरीर बिस्तर पर होने के बावजूद रिलैक्स नहीं कर पाता और नींद नहीं आती.
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सोचते-सोचते नींद उड़ जाना
कई लोगों की शिकायत होती है कि जैसे ही वे बिस्तर पर लेटते हैं, दिमाग चलने लगता है. दिनभर की बातें, अधूरे काम, भविष्य की चिंताएं या बीती गलतियां सब कुछ एक साथ याद आने लगता है. आयुर्वेद में इस स्थिति को चित्त विकार कहा गया है.
जब ब्रेन लगातार अलर्ट मोड में रहता है, तो शरीर को आराम का संकेत नहीं मिल पाता. धीरे-धीरे यह आदत बन जाती है और दिमाग बिस्तर को भी सोचने की जगह समझने लगता है. यही वजह है कि नींद आने में देर होती है.

कैफीन का असर देर तक रहता है:
चाय और कॉफी आजकल लोगों के रूटीन का अहम हिस्सा हैं. लेकिन, दोपहर के बाद कैफीन का सेवन नींद पर भारी पड़ सकता है. वैज्ञानिकों के अनुसार, कैफीन का असर शरीर में 6 से 8 घंटे तक बना रह सकता है.
अगर आप शाम को चाय या कॉफी पीते हैं, तो रात में दिमाग पूरी तरह शांत नहीं हो पाता. आयुर्वेद इसे पित्त और वात के असंतुलन से जोड़ता है, जिससे शरीर में गर्मी और बेचैनी बढ़ जाती है और नींद आने में रुकावट होती है.
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सोने-जागने का समय
रोज अलग-अलग समय पर सोना और जागना भी स्लीप ऑनसेट इनसोमनिया की एक बड़ी वजह है. अलग-अलग समय पर सोना और जागना भी स्लीप ऑनसेट इनसोमनिया की एक बड़ी वजह है. शरीर की एक प्राकृतिक घड़ी होती है, जो तय करती है कि कब नींद आएगी. जब इस रूटीन को बार-बार बदला जाता है, तो शरीर कन्फ्यूज हो जाता है. आयुर्वेद में इसे शरीर की प्राकृतिक लय का विघटन माना गया है, जिससे स्लीप क्वालिटी और समय दोनों प्रभावित होते हैं.
नींद सुधारने के आसान उपाय | Easy Ways to Improve Sleep
- सोने से कम से कम 1 घंटे पहले मोबाइल, लैपटॉप और टीवी बंद करें.
- कमरे में हल्की रोशनी या अंधेरा रखें.
- गहरी सांस लेने या हल्का संगीत सुनने की आदत डालें
- दोपहर के बाद चाय-कॉफी से बचें.
- रोज एक ही समय पर सोने और जागने की कोशिश करें.
- आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां जैसे अश्वगंधा और ब्राह्मी मानसिक शांति में मदद कर सकती हैं (डॉक्टर की सलाह से).
स्लीप ऑनसेट इनसोमनिया आज की लाइफस्टाइल से जुड़ी समस्या है, लेकिन सही आदतें अपनाकर इसे काफी हद तक सुधारा जा सकता है. स्क्रीन टाइम कम करना, दिमाग को शांत करना और रेगुलर रूटीन अपनाना नींद को प्राकृतिक रूप से बेहतर बनाने में मदद करता है.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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