कब दें अपने बच्चों को फोन?
- बच्चा चीज़ें खोए तो उन्हें फोन ना दें
- फेक कॉल्स और मैसेज ना समझें तो उन्हें फोन ना दें
- अगर बच्चा अपनी जिम्मेदारियों को समझें तो उन्हें फोन दें
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नई दिल्ली:
हाल ही में एक रिसर्च के नतीजों से पता चलता है कि आयरन और विटामिन बी12 की कमी की वजह से आठ साल की उम्र वाले बच्चों में औसत की तुलना में आक्रमकता और नियमों को तोड़ने जैसे व्यवहार 10 फीसदी ज्यादा होते हैं. लेकिन इसके अलावा भी कई कारण हैं, जिनके चलते बच्चों के व्यवहार में बदलाव देखने को मिलता है. इन्हीं में से एक है स्मार्ट फोन का ज्यादा इस्तेमाल.
बच्चों को खाना खिलाना हो या फिर उन्हें बिज़ी रखना हो, हर चीज़ के लिए आजकल उन्हें फोन चाहिए. उनके हाथ में फोन देकर उनसे सारे काम करवाए जा सकते हैं और अपने भी किए जा सकते हैं, लेकिन बच्चों को फोन देने से उन्हें उसकी आदत हो जाती है जो भविष्य में उनके लिए अच्छी नहीं. इससे ना सिर्फ उनकी आंखे कमज़ोर होती हैं बल्कि उनकी ग्रोइंग एज में आस-पास की चीज़ों को समझने की क्षमता भी कम होती है. इसके अलावा बाद में बच्चों से फोन छुड़वाना काफी मुश्किल हो जाता है, जिस वजह से बच्चों के विहेवियर में चिड़चिड़ापन, जिद और गुस्से जैसे लक्षण दिखने लगते हैं.
इसी वजह से बड़ा सवाल उठता है कि आखिर बच्चों को किस उम्र में फोन दिया जाए. बचपन से डाली गई आदत को कंट्रोल करने के लिए किस उम्र में उनके हाथ में उनका फोन थमाया जाए, क्योंकि आजकल स्कूल में ही बच्चों को फोन देने की मांग बढ़ जाती है. इसीलिए नीचे दिए गए पॉइंट्स से समझें कि आखिर कब आपको बच्चों के हाथ में देना चाहिए.

1. क्या आपका बच्चा अपनी जिम्मेदारियों को समझता है? जैसे घर से जाते हुए आपको जगह और वक्त बता कर जाता हो, साथ ही यह भी बताता हो कि वो किस वक्त तक घर लौटेगा. अगर ऐसा है तो आप अपने बच्चे को फोन दे सकते हैं.
2. क्या आपका बच्चा चीज़ें खोता है? जैसे स्कूल में पेंसिल खोना, बैग या फिर किमती सामानों को खोना? अगर ऐसा है तो फोन देने का अभी समय नहीं आया है.
3. क्या आपको बच्चे की आदतों की वजह से नज़र रखनी पड़ती है? अगर ऐसा है तो अभी फोन देने का सही वक्त नहीं है.
4. क्या आपके बच्चे को फोन देने से उन्हें दोस्तों से कनेक्ट करने में कोई फायदा? अगर हां, तभी उन्हें फोन दें. वहीं, अगर आपको लगे कि फोन देने से दोस्तों के साथ उन्हें ज़्यादा वक्त मिलेगा जो पढ़ाई में रूकावट हो तो फोन ना दें.
5. क्या आपका बच्चा घर में मौजूद फोन पर ही पढ़ाई को छोड़ घंटों लगा रहता है तो उसे अभी फोन देने का वक्त नहीं आया है.
6. क्या आपके बच्चे को फेक कॉल्स और मैसेज को नहीं समझता हो तो उसे अभी फोन ना दें.
7. अगर आपके बच्चे को समझ हो कि वो किसी भी वीडियो और फोटो से प्रभावित ना हो तो उसे फोन दे सकते हैं.
इसके साथ ही ध्यान रखें कि बच्चों को फोन देने की उम्र नहीं होती. कोई बच्चा 14 साल में भी समझदार हो जाता है तो कोई 17 की उम्र में भी मेच्योर नहीं होता. इसीलिए ऊपर दिए गए पॉइंट्स के अनुसार समझें.
बच्चों को खाना खिलाना हो या फिर उन्हें बिज़ी रखना हो, हर चीज़ के लिए आजकल उन्हें फोन चाहिए. उनके हाथ में फोन देकर उनसे सारे काम करवाए जा सकते हैं और अपने भी किए जा सकते हैं, लेकिन बच्चों को फोन देने से उन्हें उसकी आदत हो जाती है जो भविष्य में उनके लिए अच्छी नहीं. इससे ना सिर्फ उनकी आंखे कमज़ोर होती हैं बल्कि उनकी ग्रोइंग एज में आस-पास की चीज़ों को समझने की क्षमता भी कम होती है. इसके अलावा बाद में बच्चों से फोन छुड़वाना काफी मुश्किल हो जाता है, जिस वजह से बच्चों के विहेवियर में चिड़चिड़ापन, जिद और गुस्से जैसे लक्षण दिखने लगते हैं.
इसी वजह से बड़ा सवाल उठता है कि आखिर बच्चों को किस उम्र में फोन दिया जाए. बचपन से डाली गई आदत को कंट्रोल करने के लिए किस उम्र में उनके हाथ में उनका फोन थमाया जाए, क्योंकि आजकल स्कूल में ही बच्चों को फोन देने की मांग बढ़ जाती है. इसीलिए नीचे दिए गए पॉइंट्स से समझें कि आखिर कब आपको बच्चों के हाथ में देना चाहिए.

1. क्या आपका बच्चा अपनी जिम्मेदारियों को समझता है? जैसे घर से जाते हुए आपको जगह और वक्त बता कर जाता हो, साथ ही यह भी बताता हो कि वो किस वक्त तक घर लौटेगा. अगर ऐसा है तो आप अपने बच्चे को फोन दे सकते हैं.
2. क्या आपका बच्चा चीज़ें खोता है? जैसे स्कूल में पेंसिल खोना, बैग या फिर किमती सामानों को खोना? अगर ऐसा है तो फोन देने का अभी समय नहीं आया है.
3. क्या आपको बच्चे की आदतों की वजह से नज़र रखनी पड़ती है? अगर ऐसा है तो अभी फोन देने का सही वक्त नहीं है.
4. क्या आपके बच्चे को फोन देने से उन्हें दोस्तों से कनेक्ट करने में कोई फायदा? अगर हां, तभी उन्हें फोन दें. वहीं, अगर आपको लगे कि फोन देने से दोस्तों के साथ उन्हें ज़्यादा वक्त मिलेगा जो पढ़ाई में रूकावट हो तो फोन ना दें.
5. क्या आपका बच्चा घर में मौजूद फोन पर ही पढ़ाई को छोड़ घंटों लगा रहता है तो उसे अभी फोन देने का वक्त नहीं आया है.
6. क्या आपके बच्चे को फेक कॉल्स और मैसेज को नहीं समझता हो तो उसे अभी फोन ना दें.
7. अगर आपके बच्चे को समझ हो कि वो किसी भी वीडियो और फोटो से प्रभावित ना हो तो उसे फोन दे सकते हैं.
इसके साथ ही ध्यान रखें कि बच्चों को फोन देने की उम्र नहीं होती. कोई बच्चा 14 साल में भी समझदार हो जाता है तो कोई 17 की उम्र में भी मेच्योर नहीं होता. इसीलिए ऊपर दिए गए पॉइंट्स के अनुसार समझें.
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