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जिम जानें वालों में क्यों बढ़ रहा ब्रेन स्ट्रोक का खतरा? क्या सर्जरी से पूरी तरह ठीक हो सकता है मरीज? जानें क्या कहते हैं डॉक्टर

Fitness Safety Tips: आज के समय में युवा वर्ग खुद को फिट रखने के लिए ज्यादातर जिम का सहारा लेते हैं, लेकिन हद से ज्यादा वर्कआउट उनकी सेहत के लिए खतरा भी बन सकता है. इस आर्टिकल में जानें ब्रेन स्ट्रोक आने पर क्या सर्जरी से पूरी तरह ठीक हो सकता है मरीज.

जिम जानें वालों में क्यों बढ़ रहा ब्रेन स्ट्रोक का खतरा? क्या सर्जरी से पूरी तरह ठीक हो सकता है मरीज? जानें क्या कहते हैं डॉक्टर
Brain Surgery: ब्रेन स्ट्रोक कितना खतरनाक. (AI Generated Image)

आज के समय में फिट रहने का क्रेज युवाओं में सिर चढ़कर बोल रहा है. घंटों जिम में पसीना बहाना और मस्कुलर बॉडी बनाना एक ट्रेंड बन गया है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि जरूरत से ज्यादा एक्सरसाइज आपकी जान की दुश्मन भी बन सकती है? जी हां बिल्कुल सही सुना. नागपुर से एक ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां 23 साल के एक युवक को 'ओवर-वर्कआउट' की वजह से ब्रेन हेमरेज और पैरालिसिस (लकवा) का सामना करना पड़ा. तो चलिए डॉक्टर विकास गुप्ता से जानते हैं. आखिर ऐसा क्यों होता है.

​जिम में ऐसा क्यों होता है? 

​डॉक्टर का कहना है कि जब हम अपनी शारीरिक क्षमता से कहीं ज्यादा वजन उठाते हैं या बिना ब्रेक लिए घंटों कार्डियो करते हैं, तो हमारे ब्लड प्रेशर में अचानक भारी उछाल आता है. इसे 'हेमरेजिक स्ट्रोक' कहते हैं.

  1. ​नस का फटना- अत्यधिक दबाव के कारण दिमाग की कोई बारीक नस फट जाती है.
  2. ​ब्लड लीकेज- नस फटने से खून दिमाग के टिश्यूज में फैल जाता है.
  3. ​प्रेशर और पैरालिसिस- यह जमा हुआ खून दिमाग की कोशिकाओं पर दबाव डालता है. दिमाग का वह हिस्सा जो शरीर के अंगों (हाथ, पैर या बोलने की शक्ति) को कंट्रोल करता है, वह काम करना बंद कर देता है. इसे ही हम पैरालिसिस या लकवा कहते हैं.
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Photo Credit: ians

डॉक्टर से जानें मेजर सर्जरी के रोल-

  • डॉक्टर विकास का कहना है कि अगर ब्लड है और वो प्रेशर दे रहा या मरीज का एक साइड का हिस्सा पैरालिसिस हो गया है, वो बेहोस हो रहा है उसकी जान का खतरा है, ऐसे में उस ब्लड को निकालने से उसकी जान का खतरा तुरंत कम हो सकता है.
  • जब ब्लड क्लॉट निकाल देते है, जो ब्रेन उससे दबा हुआ है उसकी रिकवरी फास्ट होती है.
  • जब दिमाग में खून का दबाव बंद होता है, उसमें जब हम बोन निकालते हैं उसे ढीला करते हैं उससे भी तुरंत जान का खतरा टलता है और लाइफ थ्रेड चली जाती है.

स्ट्रोक के इलाज में गोल्डन आवर क्या है?

डॉक्टर के अनुसार अगर स्ट्रोक के 4.5 घंटे के भीतर इलाज किया जाए, जिसे ‘गोल्डन आवर' कहा जाता है, तो मरीज की स्थिति को बेहतर तरीके से संभाला जा सकता है. 

जिम जाने वाले युवा किन बातों का रखें ख्याल-

  1. ​क्षमता से ज्यादा न करें- हर शरीर की अपनी एक लिमिट होती है. भारी वजन उठाने की होड़ में खुद को खतरे में न डालें.
  2. ​ट्रेनर की सलाह लें- बिना किसी प्रोफेशनल कोच की देखरेख के हैवी वर्कआउट शुरू न करें.
  3. ​लक्षणों को पहचानें- अगर वर्कआउट के दौरान सिर में तेज दर्द, धुंधला दिखना, चक्कर आना या शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी महसूस हो, तो तुरंत रुक जाएं.
  4. ​स्टेरॉयड्स से बचें- बॉडी बनाने के चक्कर में लिए जाने वाले सप्लीमेंट्स और स्टेरॉयड्स भी नस फटने का कारण बन सकते हैं.

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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