Harsha Richharia - Anilanand Dispute: मध्य प्रदेश में साधु‑संतों के बीच बयानबाज़ी एक बार फिर सुर्खियों में है. प्रयागराज महाकुंभ और अब सिंहस्थ से जुड़े विवाद के बीच हर्षा रिछारिया उर्फ हर्षानंदगिरी ने संत समिति के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष अनिलानंद महाराज के तीखे आरोपों पर खुलकर जवाब दिया है. अनिलानंद महाराज द्वारा उनके सन्यास और आचरण पर उठाए सवालों को हर्षानंदगिरी ने ईर्ष्या और टीआरपी बटोरने की कोशिश करार दिया है. उन्होंने कहा कि वे लंबे समय से व्यक्तिगत हमलों और अपमान को चुपचाप सहती रहीं, लेकिन अब चुप रहना संभव नहीं है.
अनिलानंद महाराज के बयान से शुरू हुआ विवाद
संत समिति के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष अनिलानंद महाराज ने हर्षा रिछारिया के सन्यास पर सवाल उठाते हुए कहा था कि “यह कोई सन्यास नहीं है.” उन्होंने दावा किया कि सन्यास और जीवन‑मरण एक ही बार होता है. अनिलानंद महाराज ने यह भी आरोप लगाया था कि हर्षा रिछारिया ने पहले प्रयागराज महाकुंभ को “खराब” किया और अब सिंहस्थ में अपना बोरिया‑बिस्तर लेकर आ गई हैं. यहां तक कि उन्होंने संत समाज से ऐसे लोगों को सनातन से बाहर का रास्ता दिखाने की मांग भी की.
हर्षानंदगिरी का कड़ा पलटवार
अनिलानंद महाराज के इन बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए हर्षानंदगिरी ने कहा कि उनके खिलाफ की जा रही टिप्पणियां ईर्ष्या और टीआरपी की राजनीति का हिस्सा हैं. उन्होंने साफ कहा कि पिछले डेढ़ साल से वे लगातार अपमान सह रही थीं, लेकिन अब निजी हमलों के खिलाफ आवाज उठाना जरूरी हो गया था.
“परिवर्तन किसी में भी आ सकता है”
हर्षानंदगिरी ने कहा कि व्यक्ति में परिवर्तन किसी भी समय आ सकता है और इसे नकारा नहीं जा सकता. उन्होंने यह भी जोड़ा कि समाज में ऐसे कई संत हैं जिनका लंबा आपराधिक रिकॉर्ड रहा है, लेकिन उनके खिलाफ ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं है. इसके बावजूद उन्हें निशाना बनाया जा रहा है.
आपत्तिजनक शब्दों पर जताई नाराज़गी
अनिलानंद महाराज द्वारा कथित तौर पर “नचनिया” जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर हर्षानंदगिरी ने कड़ी आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि इस तरह की भाषा न सिर्फ अपमानजनक है, बल्कि संत समाज की गरिमा के भी खिलाफ है.
संत समाज में जारी बहस
यह पूरा विवाद अब संत समाज और धार्मिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है. एक ओर जहां अनिलानंद महाराज अपने बयान पर कायम हैं, वहीं हर्षानंदगिरी ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अपने सम्मान और पहचान के सवाल पर अब चुप नहीं रहेंगी. इस बयानबाज़ी ने आने वाले सिंहस्थ और संतों की भूमिका को लेकर नई बहस छेड़ दी है.
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