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'सत्ता विरोधी लहर और SIR की वजह से हुई बंपर वोटिंग...', बंगाल चुनाव पर अधीर रंजन चौधरी से खास बातचीत

पश्चिम बंगाल में पहले चरण की 152 सीटों पर रिकॉर्ड 92.66% मतदान हुआ. बहरामपुर से कांग्रेस उम्मीदवार अधीर रंजन चौधरी ने इसे सत्ता‑विरोधी लहर बताया. उन्होंने महिला वोटिंग, SIR, लक्ष्मी भंडार, ध्रुवीकरण, सुरक्षा बलों और कम हिंसा जैसे मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी.

कोलकाता:

पश्चिम बंगाल के चुनावी इतिहास में गुरुवार का दिन खास बन गया. विधानसभा चुनाव के पहले चरण में राज्य की कुल 294 सीटों में से 152 सीटों पर ऐसी जबरदस्त वोटिंग हुई कि पुराने सभी रिकॉर्ड टूट गए. रात 10 बजे तक बंगाल में 92.66 फीसदी मतदान दर्ज किया गया. भारी गर्मी के बावजूद मतदाताओं, खासकर महिलाओं की लंबी कतारें लोकतंत्र के प्रति उत्साह की गवाही देती रहीं.

इसी पहले चरण में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने मुर्शिदाबाद जिले की बहरामपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा. 2024 के लोकसभा चुनाव में हार के बाद लगभग 30 साल बाद अधीर रंजन की राज्य की राजनीति में वापसी मानी जा रही है. वह इस बार कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में मैदान में हैं.

'गर्मी में भी वोटरों का उत्साह अभूतपूर्व'

NDTV से बातचीत में अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि चुनाव का माहौल उत्साहजनक रहा. उन्होंने कहा, 'वोटरों की भीड़ उमड़ी, खासकर महिलाओं के अंदर जो उत्साह दिखा, वह अच्छा लगा. इतनी गर्मी में भी लोग वोट देने आए, यह अभूतपूर्व है.'

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ध्रुवीकरण पर क्या बोले अधीर

राज्य में ध्रुवीकरण को लेकर पूछे गए सवाल पर अधीर रंजन ने सीधे तौर पर भाजपा और तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधा. उनका कहना था, 'ध्रुवीकरण का मुद्दा मोदी और दीदी के हाथ में है. बहरामपुर में इसका कोई असर नहीं हुआ.' बहरामपुर और मुर्शिदाबाद से उम्मीदों के सवाल पर उन्होंने संक्षिप्त लेकिन आत्मविश्वास भरा जवाब दिया. 'अच्छा रहेगा.' मालदा को लेकर भी उन्होंने कहा कि 'वहां भी अच्छा रहेगा.'

हुमायूं कबीर की गाड़ी पर पथराव का मामला

हुमायूं कबीर की गाड़ी पर पथराव के मामले पर अधीर रंजन चौधरी ने दो टूक कहा कि कांग्रेस का इससे कोई लेना-देना नहीं है. उन्होंने कहा, 'हुमायूं भी तृणमूल का ही नेता है, अभी भी विधायक है, न उसने इस्तीफा दिया है और न तृणमूल ने उसे हटाया है. दोनों गुंडागर्दी में माहिर हैं, यह उनका आपसी झगड़ा है.'

रिकॉर्ड वोटिंग के मायने

जब उनसे 91.78 फीसदी से अधिक वोटिंग के कारण पूछे गए तो अधीर रंजन ने इसे सत्ता विरोधी लहर और SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) से जोड़ा. उनका दावा था, 'लोगों को लगा कि अगर वोट नहीं देंगे तो नागरिकता चली जाएगी, इसी वजह से भी वोटिंग बढ़ी.'

महिला वोटरों की निर्णायक भूमिका

महिलाओं की भारी भागीदारी पर उन्होंने कहा कि यह समाज के लिए सकारात्मक संकेत है, लेकिन साथ ही तृणमूल पर आरोप भी लगाए. उनका कहना था, 'TMC ने महिलाओं को लुभाया भी है और डराया भी कि वोट नहीं दिया तो लक्ष्मी भंडार बंद हो जाएगा. फिर भी महिलाओं का ज्यादा वोट करना हमारे समाज के लिए बहुत अच्छा है.' लक्ष्मी भंडार योजना के असर पर अधीर ने माना कि इसका प्रभाव जरूर है. 'गरीब लोगों को पैसा दिया गया है और यह बात फैलाई गई कि ममता नहीं आईं तो योजना बंद हो जाएगी.'

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भाजपा की घोषणाओं पर हमला

भाजपा द्वारा और ज्यादा पैसे देने की घोषणा पर अधीर रंजन ने तंज कसते हुए कहा, 'एक पैसा दे रहा है और दूसरा देगा. इन दोनों में फर्क है.' प्रधानमंत्री की ओर से महिलाओं के लिए योजनाओं की घोषणाओं को उन्होंने आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन बताया. उनका कहना था, 'चुनाव के बीच ऐसी घोषणाएं करना शोभनीय नहीं है.'

कांग्रेस के अकेले लड़ने पर क्या बोले

इंडिया गठबंधन से अलग होकर कांग्रेस के अकेले चुनाव लड़ने के सवाल पर अधीर रंजन ने कहा, 'हम संघर्ष कर रहे हैं और कुछ हद तक अपनी जमीन वापस जरूर पाएंगे.'

सुरक्षा बलों और हिंसा पर राय

चुनाव आयोग और सुरक्षा इंतजामों पर उन्होंने मिश्रित प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि SIR पर कांग्रेस को आपत्ति है, लेकिन चुनाव के दिन केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती से माहौल बदला. 'लोकल पुलिस पंगु हो गई और सुरक्षा बलों की वजह से आम आदमी बिना डर खुशी‑खुशी वोट देने निकला.' बंगाल में अपेक्षाकृत कम हिंसा को भी उन्होंने बड़ी बात बताया. उन्होंने कहा,  'थोड़ा बहुत हुआ है, लेकिन बंगाल के लिहाज से यह बहुत कम है.' रिकॉर्ड वोटिंग, महिलाओं की निर्णायक भागीदारी और हिंसा में कमी. इन सबके बीच पश्चिम बंगाल का यह चुनावी गुरुवार आने वाले नतीजों के लिए अहम संकेत देता नजर आ रहा है.

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